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चीनी के दाम पर सरकारी कोशिशें बेअसर: ज्यादातर बाजारों में 60 रुपये किलो से ऊपर भाव; क्यों नहीं मिल रही राहत?
Sun, 30 Aug 2026 07:52 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 30 Aug 2026 07:52 PM IST
सार
सरकारी कोशिशों के बावजूद देश में चीनी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। रविवार को राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये किलो रही। सरकार ने आयात, स्टॉक सीमा और निर्यात रोक जैसे कदम उठाए हैं। इसके बावजूद मिल स्तर पर कीमत घटने का फायदा खुदरा बाजार तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है।
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चीनी का भाव
- फोटो : @AI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देशभर में चीनी की खुदरा कीमत रविवार को औसतन 64.24 रुपये किलो रही। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, एक हफ्ते पहले यह 63.12 रुपये किलो थी। यानी कीमत 1.77 फीसदी बढ़ी है। एक महीने में चीनी 30 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 38.63 फीसदी महंगी है।
कहां कितने रुपये किलो बिक रही चीनी?
30 अगस्त को चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये किलो रही। न्यूनतम कीमत 40 रुपये किलो दर्ज की गई। दिल्ली में 62, मुंबई में 66, चेन्नई में 63 और रांची में 68 रुपये किलो चीनी बिक रही थी। थोक बाजार में चीनी की औसत कीमत 59.73 रुपये किलो रही। एक हफ्ते पहले यह 58.66 रुपये थी। एक महीने में थोक कीमत 31 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 38.63 फीसदी बढ़ी है।
आयात के बाद भी खुदरा दाम ऊंचे क्यों?
सरकार ने कच्ची चीनी की 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके बाद मिल स्तर की कीमत करीब 20 फीसदी घटी है। इसके बावजूद खुदरा और थोक कीमतों में खास गिरावट नहीं आई। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मिल और थोक कीमत में 2-3 रुपये का अंतर सामान्य है। वहीं मिल और खुदरा कीमत में सात-आठ रुपये का अंतर भी आम माना जाता है।
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यह भी पढ़ें: अर्थव्यवस्था: वित्त वर्ष 27 में 7.2% तक रह सकती है भारत की जीडीपी, वृद्धि दर को मिलेगा घरेलू खपत से सहारा
सरकार ने और क्या कदम उठाए?
आयात खोलने के अलावा सरकार ने बड़े खरीदारों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियम कड़े किए हैं। इससे पहले चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाई जा चुकी है। केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि, 2025-26 मार्केटिंग वर्ष में उत्पादन का अनुमान 306 लाख टन है। पहले यह अनुमान 343 लाख टन था।
मांग उत्पादन से कम, फिर कीमत क्यों बढ़ी?
देश में सालाना चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी अनुमानित उत्पादन मांग से अधिक है। इसके बावजूद खुदरा कीमतों में तेजी बनी हुई है।
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कहां कितने रुपये किलो बिक रही चीनी?
30 अगस्त को चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये किलो रही। न्यूनतम कीमत 40 रुपये किलो दर्ज की गई। दिल्ली में 62, मुंबई में 66, चेन्नई में 63 और रांची में 68 रुपये किलो चीनी बिक रही थी। थोक बाजार में चीनी की औसत कीमत 59.73 रुपये किलो रही। एक हफ्ते पहले यह 58.66 रुपये थी। एक महीने में थोक कीमत 31 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 38.63 फीसदी बढ़ी है।
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आयात के बाद भी खुदरा दाम ऊंचे क्यों?
सरकार ने कच्ची चीनी की 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके बाद मिल स्तर की कीमत करीब 20 फीसदी घटी है। इसके बावजूद खुदरा और थोक कीमतों में खास गिरावट नहीं आई। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मिल और थोक कीमत में 2-3 रुपये का अंतर सामान्य है। वहीं मिल और खुदरा कीमत में सात-आठ रुपये का अंतर भी आम माना जाता है।
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सरकार ने और क्या कदम उठाए?
आयात खोलने के अलावा सरकार ने बड़े खरीदारों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियम कड़े किए हैं। इससे पहले चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाई जा चुकी है। केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि, 2025-26 मार्केटिंग वर्ष में उत्पादन का अनुमान 306 लाख टन है। पहले यह अनुमान 343 लाख टन था।
मांग उत्पादन से कम, फिर कीमत क्यों बढ़ी?
देश में सालाना चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी अनुमानित उत्पादन मांग से अधिक है। इसके बावजूद खुदरा कीमतों में तेजी बनी हुई है।