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स्टार्टअप्स के लिए आईटी मंत्रालय लेकर आया ‘चुनौती’
Sat, 29 Aug 2020 04:15 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 29 Aug 2020 04:15 AM IST
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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद
- फोटो : एएनआई
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देश में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह की चैलेंज प्रतियोगिताएं लेकर आ रहे केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने अब एक नया कदम उठाया है।
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मंत्रालय ने इस बार चुनिंदा क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को नई तकनीकों की ईजाद करने के लिए बढ़ावा देने को ‘चुनौती- नेक्स्ट जनरेशन स्टार्ट-अप्स चैलेंज प्रतियोगिता’ चालू की है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन किया।
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मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, ‘चुनौती’ चैलेंज के जरिये देश के टियर-2 शहरों के स्टार्टअप्स और सॉफ्टवेयर उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए सरकार ने तीन साल की अवधि के लिए 95.03 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।
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इस चैलेंज के जरिये कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में काम कर रहे लगभग 300 स्टार्टअप्स की पहचान की जाएगी और उन्हें 25 लाख रुपये तक की प्रारंभिक राशि (सीड फंड) व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अधिकारियों ने बताया कि पूरे देश में फैले सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों के माध्यम से इन स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधा, मेंटरशिप, सुरक्षा परीक्षण सुविधाएं, वेंचर कैपिटलिस्ट फंडिंग तक पहुंच, उद्योग से जुड़ने के साथ-साथ कानूनी सलाह, मानव संसाधन (एचआर), आईपीआर और पेटेंट मामलों में सलाह दी जाएगी।
वैचारिक स्तर पर चल रहे स्टार्टअप्स को भी प्री-इन्क्यूबेशन प्रोग्राम के तहत चुनकर अपना बिजनेस प्लान और सॉल्यूशन विकसित करने के लिए छह माह तक सलाह दी जा सकती है। प्री-इन्क्यूबेशन के दौरान हर इंटर्न को 6 महीने तक 10 हजार रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि चुनौती चैलेंज से जुड़ने के इच्छुक स्टार्टअप्स एसटीपीआई की वेबसाइट पर जाकर या https://innovate.stpine&t.in/ लिंक पर क्लिक करके अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बिहार के मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के डिजिटल प्रशिक्षण और कौशल केंद्र का भी शिलान्यास किया। करीब 9.17 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए बिहार सरकार ने एक एकड़ जमीन दी है, जबकि इसे विकसित करने का काम आईअी मंत्रालय करेगा।