{"_id":"62ceae6775e2ad25ad24b851","slug":"union-cabinet-decision-tarang-hill-ambaji-abu-road-rail-line-project-to-be-completed-by-2026-27-approved","type":"story","status":"publish","title_hn":"Union Cabinet Decision: तरंग हिल-अंबाजी-आबू रोड रेललाइन परियोजना 2026-27 तक होगी पूरी, मिली मंजूरी","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
Union Cabinet Decision: तरंग हिल-अंबाजी-आबू रोड रेललाइन परियोजना 2026-27 तक होगी पूरी, मिली मंजूरी
Wed, 13 Jul 2022 05:07 PM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Wed, 13 Jul 2022 05:07 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह भी बताया है कि इस रेल लाइन की लंबाई 116.65 किलोमीटर होगी। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत राशि 2798.16 करोड़ होगी जबकि यह साल 2026-27 तक बनकर तैयार होगा।
विज्ञापन
अनुराग ठाकुर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
देश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 116.65 किलोमीटर लंबी तरंगा हिल-अंबाजी-आबू रोड नई रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने यह मंजूरी दी। तरंगा हिल-अंबाजी-आबू रोड नई रेल लाइन 2798.16 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से रेल मंत्रालय द्वारा बनाई जाएगी। इस परियोजना में दो राज्यों के तीन तीर्थ स्थल जुड़ेंगे जिसे, 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
विज्ञापन
प्रस्तावित रेललाइन राजस्थान के सिरोही जिले और गुजरात के साबरकांठा, बनासकांठा और महेसाणा जिलों से होकर गुजरेगी। अंबाजी 51 शक्ति पीठों में से एक है, जो हर साल गुजरात के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों और विदेशों से लाखों भक्तों को आकर्षित करती है। वहीं, माउंट आबू ब्रह्माकुमारी समुदाय का मुख्यालय है और दुनिया भर से इसके अनुयायी आते हैं। इस रेलवे लाइन के बनने से लाखों श्रद्धालुओं को यात्रा में आसानी होगी। तरंगा हिल स्थित अजीतनाथ जैन (24 तीर्थंकरों में से एक) के मंदिर में दर्शन करने वालों को लगभग 40 लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यह रेल लाइन कृषि और स्थानीय उत्पादों के परिवहन में तेज आवागमन की सुविधा प्रदान करेगी और गुजरात और राजस्थान राज्यों का देश के अन्य हिस्सों के साथ बेहतर गतिशीलता प्रदान करेगी। इससे इस पूरे मार्ग पर आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक और समग्र विकास की राह आसान होगी।
विज्ञापन
रेल परिवहन संस्थान का विस्तार, बना गतिशक्ति विश्वविद्यालय
केंद्रीय कैबिनेट ने वडोदरा स्थित राष्ट्रीय रेल परिवहन संस्थान को विस्तार देते हुए इसे गतिशक्ति विश्वविद्यालय बनाने को स्वीकृति प्रदान की है। इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्रदान करने के फैसले पर भी मुहर लगा दी गई है। इस फैसले से अब रेल एवं सड़क परिवहन क्षेत्र से जुड़े अध्ययनों की सुविधा से इसका महत्व देश विदेश में बढ़ जाएगा। यहां गति से संबंधित सभी संसाधनों और माध्यमों में शोध, अध्ययन और नये प्रयोग करने की सुविधा अध्ययनकर्ताओं को दी जाएगी। इसका मकसद देश में परिवहन के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों और अधिक कार्यकुशलता और दक्षता प्रदान करना है। 55 एकड़ में फैले इस विशाल संस्थान में अब गतिशक्ति विश्वविद्यालय देश भर दिग्गजों को रेल, सड़क परिवहन के प्रबंधन, शोध, अध्ययन और नवीन प्रयोगों के अवसर मुहैया कराएगा।
विज्ञापन