बूचड़खाने बंद होने से लेदर प्रोडक्ट के निर्यात पर संकट
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उत्तर प्रदेश में अवैध तरीके से चल रहे बूचड़खानों के बंद होने से लेदर व लेदर उत्पाद निर्यातकों के समक्ष कच्चे माल का संकट पैदा होता जा रहा है। आलम यह है कि कच्चे माल की कमी से लेदर की कीमतों में फरवरी माह के मुकाबले 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। निर्यातकों का कहना है कि 20 फीसदी तक लागत बढ़ने से काफी हद तक उनका मार्जिन प्रभावित होगा। निर्यातकों को समय पर अपने खरीदारों को डिलीवरी नहीं कर पाने की भी चिंता सता रही है। निर्यातकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में कच्चे माल का संकट लंबे समय तक जारी रहने पर वह अपने कारोबार को कोलकाता शिफ्ट कर सकते हैं।
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पूर्व चेयरमैन व लेदर उत्पाद के निर्यातक रफीक अहमद ने बताया कि बूचड़खानों के बंद होने से लेदर व लेदर उत्पाद निर्यात के लिए कच्चे माल की कमी से लागत में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। उन्होंने बताया कि कच्चे माल की किल्लत से अब खरीदारों को समय पर डिलीवरी नहीं मिलने का संकट मंडराने लगा है। समय पर डिलीवरी नहीं देने पर उन्हें अपने विदेशी खरीदारों को खोने की आशंका रहती है। कानपुर के निर्यातकों ने बताया कि कच्चे माल की कमी पूरे महीने तक बनी रही तो वे अपने कारोबार को कोलकाता भी शिफ्ट कर सकते हैं।
लेदर व लेदर उत्पाद निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी लगभग 20%
उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से कानपुर, आगरा व नोएडा में लेदर व लेदर उत्पाद का कारोबार किया जाता है। देश के लेदर व लेदर उत्पाद निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी है। उत्तर भारत में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश से ही लेदर का निर्यात होता है।
देश में कच्चे लेदर का उत्पादन 3 अरब प्रति वर्ग फुट सालाना
लेदर व लेदर उत्पाद निर्यात को भारत सरकार ने रोजगारपरक निर्यात क्षेत्र का दर्जा दिया है क्योंकि इस क्षेत्र में भारी संख्या में रोजगार मिलते हैं। भारत हर साल 3 अरब प्रति वर्ग फुट कच्चे लेदर का उत्पादन करता है। भारत लगभग 6 अरब डॉलर का लेदर व लेदर उत्पाद का निर्यात करता है।