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आगराः जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा घोटाला आया सामने
Sun, 08 Mar 2020 01:07 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 08 Mar 2020 01:07 PM IST
सार
-लोहा और स्टील क्षेत्र की 90 फीसद फर्म थी फर्जी
-कागजों में चल रहा था कारोबार, पंजीयन किया रद्द
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फाइल फोटो
- फोटो : social media
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विस्तार
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। 78 बोगस फर्म बनाकर 174 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कर चोरी की है। इसमें सबसे ज्यादा चपत लोहा और स्टील कारोबार के क्षेत्र में लगा। इनके खिलाफ वाणिज्य कर विभाग को ऐसी मुखौटा फर्मों का पंजीयन रदद करने की कार्रवाई करनी पड़ी।
एक जुलाई 2017 से इस नई कर व्यवस्था को लागू किया गया था। इसके बाद से कर चोरी रुकने के दावे किए जा रहे थे। मगर, कहानी उल्टी पड़ गई। मास्टर माइंड लोगों ने आसान पंजीयन का फायदा उठाते हुए धड़ाधड़ फर्जी फर्में बनाई और कर चोरी का अंजाम दिया। जबकि वास्तव में इन फर्मों का अस्तित्व नहीं होता, सिर्फ कागजों में कारोबार चलते हैं।
इनका मकसद फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ लेना होता है। विभाग ने पिछले करीब ढाई साल में ऐसी फर्मों को राडार पर लेते हुए कार्रवाई की। कई जगह छापेमारी भी की गई। इनके द्वारा कुल 174 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई थी।
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एक जुलाई 2017 से इस नई कर व्यवस्था को लागू किया गया था। इसके बाद से कर चोरी रुकने के दावे किए जा रहे थे। मगर, कहानी उल्टी पड़ गई। मास्टर माइंड लोगों ने आसान पंजीयन का फायदा उठाते हुए धड़ाधड़ फर्जी फर्में बनाई और कर चोरी का अंजाम दिया। जबकि वास्तव में इन फर्मों का अस्तित्व नहीं होता, सिर्फ कागजों में कारोबार चलते हैं।
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इनका मकसद फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ लेना होता है। विभाग ने पिछले करीब ढाई साल में ऐसी फर्मों को राडार पर लेते हुए कार्रवाई की। कई जगह छापेमारी भी की गई। इनके द्वारा कुल 174 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई थी।
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ऐसे होती है जालसाजी
सीए सौरभ अग्रवाल के मुताबिक वैट के दौरान पंजीयन लेना मुश्किल था। मगर, जीएसटी के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान हो गई। मजदूर या कर्मचारी का आधार और पैन से दो दिन में रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल कर लेते हैं। खास बात है कि फर्म का मौके पर जाकर सत्यापन भी नहीं होता है।
ऐसे में फर्जी फर्मों की संख्या बढ़ी है। फर्जी फर्म बनने के बाद बिल जारी किए जाते हैं। इसका नुकसान क्रेता उठाता है। क्योंकि क्रेता माल मंगवाकर विक्रेता को टैक्स अदा कर देता है, लेकिन विक्रेता सरकार को टैक्स जमा नहीं करता और आइटीसी का लाभ भी ले लेता है।
पंजीयन रद्द कर नोटिस दिए
जीएसटी लागू होने के बाद से 78 बोगस फर्म पकड़ में आ चुकी है। इनके द्वारा 174 करोड़ रुपये कर चोरी की गई। इनमें लोहा-स्टील क्षेत्र की फर्जी फर्मों का आंकड़ा करीब 90 फीसदी है। सबसे ज्यादा इसी क्षेत्र में कर चोरी के मामले आते हैं। इनका पंजीयन रद्द कर नोटिस जारी किए गए। - डीएन सिंह, ग्रेड-2 एडीशनल कमिश्नर वाणिज्य कर विभाग
सीए सौरभ अग्रवाल के मुताबिक वैट के दौरान पंजीयन लेना मुश्किल था। मगर, जीएसटी के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान हो गई। मजदूर या कर्मचारी का आधार और पैन से दो दिन में रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल कर लेते हैं। खास बात है कि फर्म का मौके पर जाकर सत्यापन भी नहीं होता है।
ऐसे में फर्जी फर्मों की संख्या बढ़ी है। फर्जी फर्म बनने के बाद बिल जारी किए जाते हैं। इसका नुकसान क्रेता उठाता है। क्योंकि क्रेता माल मंगवाकर विक्रेता को टैक्स अदा कर देता है, लेकिन विक्रेता सरकार को टैक्स जमा नहीं करता और आइटीसी का लाभ भी ले लेता है।
पंजीयन रद्द कर नोटिस दिए
जीएसटी लागू होने के बाद से 78 बोगस फर्म पकड़ में आ चुकी है। इनके द्वारा 174 करोड़ रुपये कर चोरी की गई। इनमें लोहा-स्टील क्षेत्र की फर्जी फर्मों का आंकड़ा करीब 90 फीसदी है। सबसे ज्यादा इसी क्षेत्र में कर चोरी के मामले आते हैं। इनका पंजीयन रद्द कर नोटिस जारी किए गए। - डीएन सिंह, ग्रेड-2 एडीशनल कमिश्नर वाणिज्य कर विभाग