सऊदी अरब व रिलायंस कर सकते हैं पेट्रोकेमिकल्स व रिफाइनरी में निवेश
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दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब व देश के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) संयुक्त रूप से पेट्रोकेमिकल्स व रिफाइनरी परियोजना में निवेश के लिए विचार कर रहे हैं। यह बात सऊदी तेल मंत्री खालिद अल-फलीह ने कही। अंबानी के लगभग एक दशक से जानने वाले अल-फलीह इस महीने अंबानी की बेटी की शादी से पहले के समारोह में शामिल होने अजय पीरामल के बेटे आनंद के साथ उदयपुर आए थे। उस दौरान भी उन्होंने अंबानी से इस संदर्भ में बात की थी, जिसकी जानकारी अल-फलीह ने इस सप्ताह ट्वीट कर जारी की। अल-फलीह ने अंबानी के साथ आठ व नौ दिसंबर को हुए कार्यक्रम की तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा कि हमने पेट्रोकेमिकल्स, रिफाइनिंग व दूरसंचार परियोजनाओं में संयुक्त रूप से निवेश व साझेदारी करने की बातचीत की। हालांकि रिलायंस ने इससे जुड़ी कोई भी जानकारी साझा नहीं की है।
पेट्रोकेमिकल्स व टेलीकॉम कारोबार पर ध्यान
मौजूदा समय में रिलायंस 6.82 अरब टन सालाना क्षमता वाली जामनगर स्थित दो रिफाइनरीज का संचालन करती है। रिलायंस अपनी एईजेड रिफाइंनिंग क्षमता को 3.52 करोड़ टन से बढ़ाकर 4.1 करोड़ टन करने की योजना बना रहा है, इसको सिर्फ निर्यात के लिए इस्तेमाल किया जाता है। औद्योगिक सूत्रों ने कहा कि मौजूदा समय में कंपनी पेट्रोकेमिकल्स व टेलीकॉम कारोबार को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। पेट्रोकेमिकल्स के निर्माण के लिए कच्चा तेल सबसे अहम कच्चा माल है।
भारतीय बाजार में पांव जमाना चाहता है सऊदी
वहीं सऊदी अरब दुनिया के सबसे तेज बढ़ते ईंधन बाजार बाजार पर कदम जमाना चाहती है। सऊदी अपने कच्चे तेल की खरीद के लिए बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठा रही है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको व उसकी साझेदार कंपनी अबुधाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) ने महाराष्ट्र की रिफाइनरी में 44 अरब डॉलर की राशि में 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है लेकिन घरेलू नेताओं के विरोध के कारण इस परियोजना की जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है। अरामको व एडीएनओसी की संयुक्त रुप से 6 करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी में 50 फीसदी की हिस्सेदारी होगी। साथ ही 2025 तक महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बनने वाले 1.8 करोड़ टन सालाना क्षमता वाले पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में भी संयुक्त रूप से इनकी हिस्सेदारी होगी।
कुवैत भी निवेश में इच्छुक
रिफाइनिरीज के प्रसंस्करण के लिए जरूरी कच्चे तेल की आधी आपूर्ति अरामको व एडीएनओसी करेंगे। अन्य प्रमुख उत्पादकों की तरह यह दोनों कंपनियां भी विश्व के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश में निवेश के जरिए अपने ग्राहकों की संख्या पुख्ता कर रही हैं। वहीं, अपने तेल की लिवाली के बदले कुवैत भी परियोजनाओं में निवेश कर सकता है। सऊदी अरामको भारत में ईंधन की बिक्री को लेकर उत्साहित है। यूरोप और अमेरिका में घाटे वाले देशों को ईंधन निर्यात करने के लिए भारत में एक रिफाइनरी भी आधार हो सकती है। भारत की रिफाइनिंग क्षमता 24.76 करोड़ टन है, जो 20.62 करोड़ टन की मांग से अधिक है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के अनुसार 2040 तक भारत की मांग 45.8 करोड़ टन तक पहुंच जाएगी।