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Russia-Ukraine War: अगस्त तक आरबीआई रेपो रेट में 0.75 फीसदी तक कर सकता है बढोतरी, महंगाई बढ़ने की वजह यूक्रेन संकट भी
Mon, 16 May 2022 08:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 16 May 2022 08:32 PM IST
सार
शहरी और ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही कीमतों में भिन्नता है। शहरी क्षेत्र में महंगाई बढ़ने के पीछे का कारण पेट्रोलियम की कीमत में बढ़ोतरी होना है, जबकि ग्रामीण इलाकों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर देखा गया है।
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आरबीआई
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
देश में बढ़ रही महंगाई में रूस-यूक्रेन युद्ध की बड़ी भूमिका है, सोमवार को एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने इसका दावा किया है। उन्होंने बताया कि महंगाई बढ़ने में रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग की वजह से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव का 59 प्रतिशत योगदान है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में अप्रैल में महंगाई का आंकड़ा 7.8 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने बताया कि आरबीआई एक बार फिर रेपो रेट को बढ़ाकर महामारी के पहले के स्तर 5.15 प्रतिशत पर लाने को तैयार है।
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फरवरी को आधार मानते हुए महंगाई पर रूस-यूक्रेन युद्ध के असर का अध्ययन किया गया है। इस शोध में पता चला है कि इन दोनों देशों के बीच चल रही जंग की वजह से खाद्य पदार्थों, ईंधन, लाइट और परिवहन में 52 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ गई है। इसके अलावा एफएमसीजी सेक्टर में इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी होने से वस्तुओं की कीमतों में सात प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
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एसबीआई ईकोरैप के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बढ़ रही महंगाई से हाल-फिलहाल राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे। वहीं उनका कहना है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही कीमतों में भिन्नता है। शहरी क्षेत्र में महंगाई बढ़ने के पीछे का कारण पेट्रोलियम की कीमत में बढ़ोतरी होना है, जबकि ग्रामीण इलाकों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर देखा गया है।
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एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त तक केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 75 बीपीएस यानी 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी करेगा। जून में इस वित्तवर्ष की दूसरी और अगस्त में तीसरी बैठक होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई रेपो रेट को बढ़ाकर 5.25 फीसदी तक करेगा। यह अभी 4.5 फीसदी पर है। अगस्त के बाद दरों को बढ़ाने का मामला थोड़ा धीमा पड़ सकता है।
इसके साथ ही अर्थशास्त्रियों ने आरबीआई को उसके द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर गौर करने को भी कहा है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने एसबीआई से इस पर भी गौर करने को कहा है कि अगर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध संबंधी गतिरोध जल्दी दूर नहीं होते हैं तो क्या इन कदमों से मुद्रास्फीति को सार्थक रूप से नीचे लाया जा सकता है?