फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Reserve Bank of India preparations, debt restructuring in September may provide relief to many industries

रिजर्व बैंक की तैयारी... सितंबर में कर्ज पुनर्गठन से कई उद्योगों को मिल सकती है राहत

Tue, 30 Jun 2020 08:34 AM IST
योगेश साहू बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 30 Jun 2020 08:34 AM IST
विज्ञापन
Reserve Bank of India preparations, debt restructuring in September may provide relief to many industries
RBI

आरबीआई कोविड-19 और लॉकडाउन से गहरे संकट में फंसे कई उद्योग क्षेत्रों को कर्ज पुनर्गठन से राहत देने पर मंथन कर रहा है। अगस्त में लोन मोरेटोरियम सुविधा खत्म होने के बाद उद्योगों को यह सौगात मिलने की उम्मीद है। कर्ज पुनर्गठन योजना का लाभ उठाने वाले क्षेत्रों में होटल, टूरिज्म, विमानन और निर्माण सबसे आगे हैं। 

विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार, भारतीय बैंक एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने सरकार व आरबीआई से उद्योगों के कर्ज का एक बार पुनर्गठन करने की मांग की थी। सुझावों पर गौर करने के बाद रिजर्व बैंक सरकार के साथ इस योजना पर मंथन कर रहा है। अनुमान है कि अगस्त में छह महीने की ईएमआई मोरेटोरियम सुविधा खत्म होने के बाद महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों को यह सुविधा दी जा सकती है।
विज्ञापन


इसके तहत उद्योगों को डिफॉल्ट होने से बचाया जा सकेगा, साथ ही बैंकों पर भी बैड लोन का भार नहीं बढ़ेगा। कर्ज पुनर्गठन होता है, तो ईएमआई की किस्त, ब्याज, लोन की अवधि या लोन की राशि में बदलाव किया जा सकेगा। आरबीआई ने पिछले वित्तवर्ष में भी 5 लाख से ज्यादा एमएसएमई को कर्ज पुनर्गठन का लाभ दिया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज का दूसरा चरण जरूरी: एसबीआई

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि शेयर बाजार में उछाल को अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत नहीं माना जा सकता है। महामारी से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज का दूसरा चरण जरूरी है। मोरेटोरियम सुविधा खत्म होने के बाद सितंबर से बैंकों का एनपीए बढ़ने लगेगा।

कृषि क्षेत्र पर भी ज्यादा निर्भरता नहीं रह सकती। अगर यह 1951-52 की 15.6 फीसदी की सबसे तेज वृद्धि भी हासिल करता है, तो भी विकास दर को 2 फीसदी का सहारा दे सकेगा। लिहाजा सरकार को राहत पैकेज के दूसरे चरण के बारे में सोचना होगा। खर्च में बड़ी गिरावट आई है, जो प्रति क्रेडिट कार्ड 12 हजार से 3,600 पर और प्रति डेबिट कार्ड 1 हजार से 350 रुपये पर आ गई है।

राज्यों की जीडीपी में 14 फीसदी तक गिरावट, यूपी में कम असर

महामारी और लॉकडाउन की वजह से 2020-21 में राज्यों की जीडीपी का आकार 1.4-14.3 फीसदी तक कम हो जाएगा। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बताया है कि सबसे ज्यादा प्रभावित असम, गोवा, गुजरात, सिक्किम और हरियाणा जैसे राज्यों की जीडीपी में दहाई अंकों की गिरावट आएगी।

लॉकडाउन का सबसे कम असर यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, पंजाब और आंध्रप्रदेश पर हुआ है। जो राज्य कृषि क्षेत्र पर ज्यादा निर्भर रहे हैं, उन्हें सबसे कम नुकसान होगा। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी जैसे सेवा क्षेत्र पर निर्भर राज्यों को भी राहत मिलेगी।

राजस्व पर असर पड़ने से जिन राज्यों के कुल राजस्व में उनके अपने कर का हिस्सा अधिक होगा, उनकी जीडीपी पर भी ज्यादा प्रभाव दिखेगा। ऐसे राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और हरियाणा आते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed