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अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए निर्णायक भूमिका में आया आरबीआई

Thu, 25 Apr 2019 04:13 AM IST
गौरव द्विवेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 25 Apr 2019 04:13 AM IST
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RBI came in a decisive role to speed up the economy
RBI (logo)

फंसे कर्ज और पूंजी की कमी से जूझ रहे सरकारी बैंकों को उबारने के साथ अर्थव्यवस्था को गति देने में रिजर्व बैंक पिछले कुछ समय से निर्णायक भूमिका निभा रहा है। गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में आरबीआई ने लगातार दो बार नीतिगत दरों में कटौती की और इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए न सिर्फ बैंकों पर दबाव डाल रहा, बल्कि उन्हें पूंजी उपलब्ध करा ब्याज दर घटाने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

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वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने बुधवार को बताया कि आरबीआई एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एकमात्र केंद्रीय बैंक है, जिसने लगातार दो बार नीतिगत दरों में कटौती का साहसिक कदम उठाया। हालांकि, वाणिज्यिक बैंकों ने पूंजी की कमी का हवाला देते हुए इसका लाभ अपने ग्राहकों और कारोबारियों को नहीं दिया। ऐसे में रिजर्व बैंक ने मई में खुला बाजार संचालन के तहत 25 हजार करोड़ रुपये की पूंजी बैंकों में डालने की घोषणा कर ब्याज दरों में कटौती का लाभ सुनिश्चित कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इतना ही नहीं डॉलर-रुपया विनिमय के तहत भी बैंकों में दो बार में करीब 70 हजार करोड़ रुपये डालने की तैयारी है। 
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ब्याज दर कटौती को बढ़ा रहा पूंजी

अमेरिकी बैंक मेरिल लिंच की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री इंद्रानिल सेन गुप्ता का कहना है कि नीतिगत दरों में कटौती का लाभ कर्ज की ब्याज दर में दिलाने के लिए हर महीने 21 हजार करोड़ की पूंजी तरलता बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी की दशा में ही ब्याज दर में कटौती की उम्मीद कर सकते हैं। आरबीआई इस दिशा में बेहतर काम कर रहा है और जून में एक बार फिर 0.25 फीसदी रेपो रेट घटा सकता है।
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भारत में सबसे ऊंची ब्याज दर

विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई और विकास दर के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो पूरे एशिया में भारत की ब्याज दर सबसे ऊंची है। उसका मार्च तिमाही का प्रदर्शन पिछली पांच तिमाहियों में सबसे खराब रहा है। लिहाजा जनवरी-मार्च में उसकी गति फिर सुस्त पड़ सकती है। टाटा म्यूचुअल फंड के प्रमुख मूर्ति नागराजन ने कहा कि बैंक तब तक ब्याज दरें कम नहीं करेंगे, जब तक उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं होगी।


जून में रिपोर्ट सौंपेगी जालान समिति

आरबीआई का पूंजी आकार निर्धारित करने को गठित समिति के अध्यक्ष बिमल जालान ने बुधवार को बताया कि जून तक अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। जनवरी में पहली बैठक के बाद समिति को तीन महीने में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन अभी यह अंतिम रूप से तैयार नहीं है। लिहाजा तीन महीने का विस्तार लिया है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर जालान के अलावा समिति में पांच अन्य सदस्य हैं। यह समिति सरकार और पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के बीच आरबीआई की रिजर्व पूंजी के आकार को लेकर हुए टकराव के बाद दिसंबर 2018 में बनाई गई थी। अमेरिकी बैंक मेरिल लिंच ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जालान समिति आरबीआई से 3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस सरकार को देने के लिए कह सकती है।

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