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भारत में क्यों आसमान छू रहे पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें इसके पीछे का खेल...
Mon, 01 Mar 2021 01:57 PM IST
दीप्ति मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Mon, 01 Mar 2021 01:57 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर
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देश में लगातार पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। दूसरी और एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ते जा रहे हैं। लगातार ईंधन की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी बढ़ रहा है, इसका असर सब्जियों के दाम समेत कई और चीजों पर भी पड़ रहा है। आम जनता महंगाई से परेशान है। जबकि सरकार ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल प्राइस में उछाल को बता रही है। क्या ईंधन की कीमत बढ़ने के पीछे यही वजह है? यहां समझें ईंधन की कीमतों को लेकर जारी खेल..
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दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल बाजार वाला देश भारत अपने यहां विकास को बढ़ावा देने के लिए क्रूड ऑयल पर निर्भर है। भारत में हर साल करीब 211.6 मिलियन टन तेल की खपत होती है, जिसमें से 35 मिलियन टन से कम का उत्पादन भारत में होता है। भारत के पास पर्याप्त भंडार नहीं है। भारत अपने यहां करीब 85 तक क्रूड ऑयल का आयात करता है, जो ईंधन की बढ़ती कीमतों का एक बड़ा कारण है। तेल उत्पादक देशों ने आपूर्ति कटौती की है, लेकिन मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसके चलते ईंधन की कीमतें बढ़ती जा रही हैं।
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पेट्रोल और डीजल की वैश्विक कीमत
पेट्रोल और डीजल की वैश्विक कीमत की बात की जाए, तो 60 डॉलर प्रति बैरल यानी करीब 28 रुपये लीटर है। जबकि भारत में लोग पेट्रोल के लिए 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक का भुगतान कर रहे हैं। इसकी पीछे की वजह है शुल्क।
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दुनिया में सबसे अधिक शुल्क भारत वसूलता है :
देश शुल्क
अमेरिका 20 प्रतिशत
जापान 45 प्रतिशत
ब्रिटेन 62 प्रतिशत
इटली 65 प्रतिशत
जर्मनी 65 प्रतिशत
भारत 260 प्रतिशत
दूसरे देशों की तुलना में भारत की क्या स्थिति है?
दुनियाभर में कच्चे तेल का भाव कोरोना काल से पहले के स्तर पर पहुंच रहा है, लेकिन भारत में राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा ज्यादा टैक्स वसूलने की वजह से यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है। पिछले साल जनवरी की तुलना में इस साल जनवरी में पेट्रोल का औसत भाव करीब 13.6 फीसदी ज्यादा है। जबकि इस दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 14 फीसदी कम था। दूसरी ओर पिछले साल की तुलना में इस साल जनवरी में अमेरिका, चीन और ब्राजील के ग्राहकों ने क्रमश: 7.5 फीसदी, 5.5 फीसदी और 20.6 फीसदी सस्ते दर पर ईंधन खरीदा है।