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आरबीआई का जोर लांग टर्म एफडी पर
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 12 Nov 2012 11:04 AM IST
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जल्द ही बैंक लंबी अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़ी आकर्षक पेशकश कर सकते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को पांच साल से ज्यादा अवधि वाली एफडी स्कीम की लोकप्रियता बढ़ाने का सुझाव दिया है।
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फिक्स्ड ब्याज दरों वाले लंबी अवधि कर्ज को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई की ओर से गठित एक समिति ने अपनी सिफारिशों में लंबी अवधि के एफडी पर भी जोर दिया है। अभी सरकारी बैंकों के एफडी में पांच साल से ज्यादा अवधि वाली एफडी की हिस्सेदारी सिर्फ 8.3 फीसदी है, जबकि 66 फीसदी डिपॉजिट दो साल की अवधि तक के हैं।
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समिति का मानना है कि ज्यादातर एफडी दो साल के लिए होते हैं, जिनका परिपक्वता अवधि के बाद नवीनीकरण करा लिया जाता है। इस प्रकार बैंक के लिए तरलता के लिहाज से एफडी लंबी अवधि के फंड हैं, जबकि लेकिन ब्याज दरों केमामले में इनकी अवधि मध्यम और लघु मानी जाती है क्योंकि परिपक्व होने पर बैंक को ब्याज की अदायगी करनी होती हैं। लंबी अवधि की एफडी को बढ़ावा मिलने से बैंकों को लंबी अवधि के फिक्स्ड ब्याज दरों वाले कर्जों को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
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हाल ही में आरबीआई की ओर से गठित एक समिति ने ब्याज दरों में आने वाले उतार-चढ़ाव से ग्राहकों को होने वाली उलझन को कम करने केलिए ये सिफारिशें दी हैं। आरबीआई का सुझाव है कि बैंकों को निश्चित अंतराल (5-7 वर्ष) पर ब्याज दरों में संशोधन की सहूलियत के साथ फिक्स्ड ब्याज दर वाले लंबी अवधि के कर्जों की पेशकश करनी चाहिए।
समिति का मानना है कि ब्याज दरों में परिवर्तन से ग्राहकों की ईएमआई पर पड़ने वाले असर केबारे में बैंकों को अपने ग्राहकों को अच्छी तरह समझना चाहिए। इसकेलिए आरबीआई ने इंडियन बैंक एसोसिएशन को आग्रणी भूमिका निभाने को कहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में रिटेल लोन केमामले में बैंकों का झुकाव फिक्स्ड के बजाय फ्लोटिंग ब्याज दरों वाले कर्ज की ओर बढ़ा है।