PAN से आसानी से पता चलेगा कहां मौजूद हैं आप, सरकार ने की तैयारी
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केंद्र सरकार हरेक स्थायी खाता संख्या (पैन) की ई-लोकेशनिंग कर रही है। यानी आपका पैन देश में किस जगह पर सक्रिय है, वह सरकार को देश के डिजिटल नक्शे पर दिखाई देगा। इससे सरकार को कर वसूली संबंधी विभिन्न प्रकार के विश्लेषण करने में मदद मिलेगी और सरकार यह भी पता लगा सकेगी कि देश के किस स्थान पर अधिक काला धन पैदा हो रहा है और किस स्थान पर अधिक कर चोरी हो रही है।
यह जानकारी यहां सीई इनफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट विलास कुलकर्णी ने कंपनी के एक समारोह में इतर मौके पर अमर उजाला के साथ हुई एक बातचीत में दी। सीई इनफोसिस्टम्स को मैपमाईइंडिया के नाम से अधिक जाना जाता है, जो सरकार की इस बहुएजेंसी परियोजना में पैन की लोकेशनिंग के काम को अंजाम दे रही है।
मैपमाईइंडिया से किया सीबीडीटी ने करार
कुलकर्णी ने बताया कि वित्त मंत्रालय के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की इस परियोजना में मैपमाईइंडिया द्वारा तैयार किया गया देशभर का डिजिटल नक्शा (मैप) और देश के अधिकतर घरों और महत्वपूर्ण स्थानों को कंपनी द्वारा दिए गए एक डिजिटल कोड ‘ई-लॉक’ (वर्चुअल लोकेशन) का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने पैन की ई-लोकेशनिंग का कंसैप्ट समझाते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति या कारोबारी तथा अन्य संस्थान आयकर रिटर्न दाखिल करता है, तब उसमें पैन का उल्लेख किया जाता है।
साथ ही यह भी उल्लेख किया जाता है कि यह रिटर्न किस पते से दाखिल किया जा रहा है। यानी, सरकार के पास यह आंकड़ा है कि कौन सा पैन किस पते पर सक्रिय है। लेकिन इस पैन और पते के करोड़ों आंकड़ों का विश्लेषण करना काफी बोझिल काम है।
आयकर जमा करने के स्थान से पता चलेगा कहां है पैन
परियोजना के तहत डिजिटल मैप में हर पैन को उसी पते वाली जगह पर टैग किया जा रहा है, जहां से उस पैन का उल्लेख कर आयकर जमा किया गया है। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि पैन को उस पते पर टैग नहीं किया जाता है, जो पैन में दर्ज है, बल्कि उस पते पर चिह्नित किया जा रहा है, जहां से वह सक्रिय है।
कर वसूली के विश्लेषण में होगी सुविधा
इससे कोई भी अधिकारी सरलता से सिर्फ डिजिटल मैप पर जाकर यह विश्लेषण कर सकता है कि देश के किस हिस्से से किस-किस पैन से कितना कर जमा हो रहा है।
वहीं मैप के किसी भी हिस्से में जाकर वहां किसी भी पैन पर क्लिक कर उससे हुए किसी भी प्रकार के लेन-देन, खरीद व कर जमा तथा उसका पता व उस मकान के दरवाजे तक पहुंचने का मानचित्र देखा जा सकता है। इससे आयकर विभाग यह सरलता से विश्लेषण कर सकता है कि पैन से हुए लेन-देन व उस पैन से हो रहे कर जमाओं में तालमेल है या नहीं।
कुलकर्णी ने कहा कि परियोजना के तहत अभी मुख्यत: कंपनियों व कारोबारियों के पैन की ई-लोकशनिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। बाद में आम लोगों के पैन की भी नक्शे पर लोकेशनिंग होगी।
क्या है ई-लॉक
मैपमाईइंडिया ने देश के हर घर या हर पते को एक डिजिटल कोड देने की एक प्रणाली विकसित की है। इस प्रणाली से हर पते के लिए छह अंकों का एक अल्फान्यूमरिक कोड तैयार किया जाता है।
कंपनी ने इसका नाम ई-लॉक रखा है। संपूर्ण पता के मुकाबले इस कोड को याद रखना, लिखना और किसी को देना काफी आसान है। कोई भी ई-लॉक के सहारे उससे संबंधित पते का संपूर्ण विवरण तथा वहां तक पहुंचने का पूरा मानचित्र हासिल कर सकता है। अब तक देशभर में दो करोड़ से अधिक ई-लॉक तैयार हो चुके हैं।