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Hindi News ›   Business ›   P Chidambaram targeted Finance Minister over the budget 2021

2020-21 के संशोधित आकलन में लीपापोती कर वित्तमंत्री सुनहरी कहानी पेश करेंगी: चिदंबरम

Fri, 29 Jan 2021 03:34 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 29 Jan 2021 03:34 AM IST
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P Chidambaram targeted Finance Minister over the budget 2021
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को आशंका जताई है कि लीपापोती करते हुए वित्त मंत्री 2020-21 के लिए संशोधित अनुमान प्रस्तुत करके 2021-22 के लिए सुनहरी कहानी गढ़ने का प्रयास करेंगी। पूर्व वित्त मंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि कोरोना संकट से पहले अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।

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चिदंबरम ने कहा, साल 2020-21 का अंत नकारात्मक वृद्धि के साथ होगा। साल की शुरुआत में लगाए गए अनुमान के अनुसार एक भी आंकड़ा हासिल नहीं हो पाएगा। राजस्व के लक्ष्य बड़े अंतर से पीछे छूट जाएंगे, पूंजी निवेश को गहरा आघात लगेगा, राजस्व घाटा 5 फीसदी के लगभग रहेगा और राजकोषीय घाटा बढ़कर 7 फीसदी से अधिक हो जाएगा।
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उनके मुताबिक, 2020-21 के बजट पर समय बर्बाद करने का कोई औचित्य नहीं है। यह शुरू में आपदाकारी था और वित्तवर्ष के अंत में विनाशकारी साबित होगा। ऐसे में 2020-21 के लिए संशोधित अनुमान झूठे आंकड़ों का पुलिंदा होगा और 2021-22 का बजट अनुमान एक भ्रामक मायाजाल होगा।
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चिदंबरम ने सरकार को देर से ही सही, अर्थव्यवस्था को बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक इस तरह के प्रोत्साहन से लोगों के हाथों में पैसा जाएगा और मांग बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था में सबसे नीचे स्थित 20 से 30 फीसदी परिवारों के हाथों में कम से कम छह माह तक सीधे पैसा दिया जाए। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को पुनर्जीवित करने की योजना बनाकर लागू की जाए, ताकि बंद हो चुकी इकाईयां दोबारा खुल सकें, खत्म हो चुकी नौकरियां फिर से शुरू हों और जिन लोगों के पास औसत शिक्षा व कौशल है, उनके लिए नई नौकरियां पैदा हो सकें।

कर की दरों में कटौती का आग्रह
चिदंबरम ने सरकार से कर की दरों, खासकर जीएसटी एवं अन्य अप्रत्यक्ष कर की दरों (यानी पेट्रोल व डीज़ल पर कर की दरों) में कटौती करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, सरकारी पूंजीगत व्यय बढ़ाए जाएं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पैसा पहुंचाया जाए और उन्हें हर लोन पर जांच एजेंसियों की निगरानी के भय के बिना कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

संरक्षणवादी नीतियों को खत्म किया जाए, दुनिया के साथ फिर से जुड़ें, ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते हों एवं आयात के खिलाफ पूर्वाग्रह का त्याग किया जाए। साथ ही दूरसंचार, बिजली, खनन, निर्माण, विमानन एवं पर्यटन व आतिथ्य के लिए सेक्टर विशेष पुनरोद्धार पैकेज बनाने का भी सुझाव दिया।


‘टैक्स टैररिज्म’ के कानून संशोधन रद्द हों
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कानूनों में किए गए संशोधनों की समीक्षा कर उन संशोधनों को रद्द करें, जिन्हें व्यापक रूप से ‘टैक्स टेररिज़्म’ माना गया है। आरबीआई, सेबी, ट्राई, सीईआरसी एवं अन्य नियामक एजेंसियों द्वारा बनाए गए उन नियमों की विस्तृत व समय सीमा में समीक्षा की जाए, जिन्हें व्यापक रूप से अति-नियमन के रूप में देखा गया।’’

उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र शुक्त्रस्वार से आरंभ हो रहा है। एक फरवरी को वित्त मंत्री अगले वित्त वर्ष के लिए बजट पेश करेंगी।

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