चार साल में 11 हजार वेबसाइट को सरकार ने किया ब्लॉक, नहीं बताया कारण
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केंद्र सरकार ने पिछले चार साल में 11 हजार से अधिक वेबसाइट्स बिना किसी को कारण बताए ब्लॉक कर दी हैं। इनमें कुछ वेबसाइट एनजीओ द्वारा चलाई जा रही थीं। सरकार इन वेबसाइट को बंद करने के लिए इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों (आईएसपी) को आदेश देती है, जिसके बाद इनका एक्सेस लोगों के लिए बंद किया जाता है।
2016 में ब्लॉक किए गए थे 633 यूआरएल
2016 में केंद्र सरकार ने 633 वेबसाइट्स को ब्लॉक किया था। इसके बाद 2017 में 1385 और 2018 में 2799 के यूआरएल को ब्लॉक किया गया था। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से एक आरटीआई के तहत जवाब दिया गया। हालांकि इसमें मंत्रालय की तरफ से किसी तरह के कोई कारण का उल्लेख नहीं किया गया।
3200 की लिस्ट को किया तैयार
बंगलूरू स्थित सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी ने 3200 वेबसाइट्स की लिस्ट को तैयार किया है, जिनको सरकार ने ब्लॉक किया है। इसमें उन एनजीओ की वेबसाइट्स भी शामिल हैं, जो सरकार के द्वारा लिए गए फैसलों का विरोध करती हैं।
सरकार का तर्क-- कोर्ट का फैसला
हालांकि मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि किसी भी वेबसाइट को ऐसे ही ब्लॉक नहीं किया जाता है। सरकार अपनी तरफ से उस वेबसाइट को ही केवल ब्लॉक करती है, जिसके लिए कोर्ट की तरफ से आदेश आए या फिर उसने आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए और 79 का उल्लंघन किया हो।
यह है सेक्शन की परिभाषा
आईटी एक्ट की सेक्शन 69ए के अनुसार केंद्र सरकार उस वेबसाइट को ब्लॉक कर सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो। सेक्शन 79 के मुताबिक सरकार आईएसपी को ऐसी वेबसाइट हटाने का आदेश जारी कर सकती है।
जियो ने किया सबसे ज्यादा वेबसाइट को ब्लॉक
रिलायंस जियो ने सबसे ज्यादा वेबसाइट को अपने सर्वर पर ब्लॉक किया हुआ है। उसने सोशल मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम और संगीत शेयर करने वाली वेबसाइट साउंडक्लाउड को ब्लॉक कर रखा है। हालांकि यह पता नहीं चला है कि किसके आदेश पर इन वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया है। सरकार के इस कदम से लोगों को सूचना मिलने का अधिकार प्रभावित होता है, जो कि मौलिक अधिकारों का हनन है।