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Hindi News ›   Business ›   New Monetary Policy: In view of the rising Kovid-19 transition, interest rates are not expected to rise, announcement soon

नई मौद्रिक नीति : कोविड-19 संक्रमण बढ़ने के मद्देनजर ब्याज दरें बढ़ने के आसार नहीं,  घोषणा जल्द

Sun, 28 Mar 2021 03:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 28 Mar 2021 03:57 PM IST
सार

  • रिजर्व बैंक सात अप्रैल को वित्त वर्ष 2021-22 की पहली मौद्रिक नीति घोषित करेगा
  • विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा

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New Monetary Policy: In view of the rising Kovid-19 transition, interest rates are not expected to rise, announcement soon
RBI - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश में एक बार पुन: कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। इस महामारी को लेकर अनिश्चितता कायम है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा आगामी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों को बढ़ाए जाने के आसार नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने के उपाय करने से पहले अभी कुछ समय और इंतजार करेगा। 
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फरवरी में नहीं किया था कोई बदलाव
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिनी बैठक अगले माह होगी। इसके बाद सात अप्रैल को वह नई मौद्रिक नीति घोषित करेगा। इससे पहले पांच फरवरी को पिछली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया था।
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विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक अपने नरम रुख को जारी रखेगा और किसी मौद्रिक कार्रवाई के लिए उचित अवसर का इंतजार करेगा, जिससे मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के मुख्य लक्ष्य के साथ आर्थिक वृद्धि के प्रोत्साहन के उपाय किए जा सकें।
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कर्ज की लागत बढ़ रही : अरुण सिंह
डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने से कई राज्यों ने नए अंकुश लगाए हैं, जिससे औद्योगिक उत्पादन में पुनरुद्धार को लेकर आशंका पैदा हो गई है। इस संस्था के वैश्विक मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि दीर्घावधि के वित्त की प्राप्ति सख्त हो रही है, इससे कर्ज की लागत बढ़ी है। इस संदर्भ में रिजर्व बैंक के समक्ष मुद्रास्फीति दबाव का प्रबंधन करने के साथ कर्ज की लागत में बढ़ोतरी को रोकने की मुश्किल चुनौती है।
नीतिगत दरें यथावत रहने का अनुमान : अनुज पुरी 
एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि उपभोक्ता मुद्रास्फीति अभी स्थिर नहीं हो पाई है। फरवरी, 2020 से रेपो दर में भी 1.15 प्रतिशत की उल्लेखनीय कटौती की गई है। ऐसे में रिजर्व बैंक संभवत: नीतिगत दरों को यथावत रखेगा। 
पुरी ने कहा कि केंद्रीय बैंक की निगाह मुद्रास्फीति और आर्थिक पुनरुद्धार पर रहेगी। भारत में महामारी का दूसरा दौर शुरू हो गया है। कई राज्यों और शहरों में आंशिक लॉकडाउन लगाया गया है। ऐसे में इस बात की संभावना अधिक बनती है कि रिजर्व बैंक यथास्थिति कायम रखेगा।

तरलता संतोषजनक रहेगी : तन्वी गुप्ता
यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया की अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने उम्मीद जताई कि रिजर्व बैंक निकट भविष्य के लिए तरलता को संतोषजनक स्तर पर रखेगा, जिससे सरकार के उधारी कार्यक्रम में किसी तरह की अड़चन नहीं आए। साथ ही केंद्रीय बैंक कोविड-19 के मामले बढ़ने के बीच आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने का प्रयास करेगा।
मुद्रास्फीति बढ़ने से रिजर्व बैंक पर दबाव : आनंद राठी
आनंद राठी की रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा मुद्रास्फीति का नरम रुख हाल के समय में पलटा है, जिससे रिजर्व बैंक पर दबाव बढ़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य मुद्रास्फीति बढ़ने से रिजर्व बैंक के लिए मुश्किल होगी। इसके बावजूद वृद्धि की चिंता के बीच केंद्रीय बैंक नरम मौद्रिक रुख को जारी रखेगा।
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