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दुनिया में भारतीय रुपये की बढ़ती साख: मलेशिया भी व्यापार में करेगा स्वीकार, 35 देश पहले ही दे चुके हैं मंजूरी
Sat, 01 Apr 2023 12:20 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 01 Apr 2023 12:20 PM IST
सार
भारत के साथ अबतक 35 देशों ने रुपयों में व्यापार करने में अपनी रूचि दिखा चुके हैं। इसमें रूस के अलावा भारत के पड़ोसी देश म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल भी शामिल है।
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India Malaysia Trade
- फोटो : Social Media
विस्तार
भारत और मलेशिया के बीच हमेशा से ही घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहा है। दोनों ही देशों के बीच समय-समय पर उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन भी होता है। ये दोनों ही राष्ट्र आसियान समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
व्यापार के मामले में भी दोनों देशों के बीच काफी अच्छा संबंध रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय से भारत मलेशिया के बीच व्यापार को लेकर एक अहम जानकारी दी है। यह जानकारी दोनों देशों के होने वाले व्यापार के मुद्रा से जुड़ा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच होने वाला व्यापार अब अन्य मुद्राओं के अलावा रुपये में हो सकता है।
बता दें कि भारत के साथ अबतक 35 देशों ने रुपयों में व्यापार करने में अपनी रूचि दिखा चुके हैं। इसमें रूस के अलावा भारत के पड़ोसी देश म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग सबसे अधिक है। अभी तक भारत अपने हर चीज के लिए डॉलर में भुकतान करता है। इसके लिए भारत की तरफ से हर साल अरबों डॉलर खर्च होता है। यदि भारत भी आयात की जाने वाली चीजों का भुकतान रुपय के माध्यम से किया जाए तो डॉलर की निर्भरता को कम किया जा सकता है।
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व्यापार के मामले में भी दोनों देशों के बीच काफी अच्छा संबंध रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय से भारत मलेशिया के बीच व्यापार को लेकर एक अहम जानकारी दी है। यह जानकारी दोनों देशों के होने वाले व्यापार के मुद्रा से जुड़ा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच होने वाला व्यापार अब अन्य मुद्राओं के अलावा रुपये में हो सकता है।
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बता दें कि भारत के साथ अबतक 35 देशों ने रुपयों में व्यापार करने में अपनी रूचि दिखा चुके हैं। इसमें रूस के अलावा भारत के पड़ोसी देश म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग सबसे अधिक है। अभी तक भारत अपने हर चीज के लिए डॉलर में भुकतान करता है। इसके लिए भारत की तरफ से हर साल अरबों डॉलर खर्च होता है। यदि भारत भी आयात की जाने वाली चीजों का भुकतान रुपय के माध्यम से किया जाए तो डॉलर की निर्भरता को कम किया जा सकता है।
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