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'ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगाना मेरे हाथ में नहीं': RBI के गवर्नर ने कहा- महंगाई पर लापरवाही की जगह नहीं

Wed, 24 May 2023 11:41 AM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 24 May 2023 11:41 AM IST
सार

आरबीआई गवर्नर ने कहा, लंबे समय से चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष, विभिन्न देशों से बढ़ते मुद्रास्फीति के दबाव और दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त करने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को सख्त वित्तीय स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

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It is not in my hands to stop interest rate hike RBI Governor shaktikant das
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास - फोटो : एएनआई

विस्तार

देश की आर्थिक वृद्धि दर 2022-23 में 7 फीसदी से अधिक रह सकती है। अगर ऐसा हुआ तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं होगी। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, तीसरी और चौथी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के तेज रहने से अर्थव्यवस्था 2022-23 में 7 फीसदी से अधिक रफ्तार से बढ़ सकती है। चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6.5 फीसदी रह सकती है। 

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राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय ने फरवरी, 2023 में जारी दूसरे अग्रिम अनुमान में कहा था कि 2022-23 में जीडीपी की वृद्धि दर सात फीसदी रहेगी। 2021-22 में यह 8.7 फीसदी रही थी। पिछले वित्त वर्ष के लिए  वृद्धि दर के आंकड़े 31 मई को जारी होंगे। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की सालाना बैठक में गवर्नर ने बुधवार को कहा, ऐसे सुझाव आए हैं कि केंद्रीय बैंक को आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठकों में नीतिगत दर में बढ़ोतरी नहीं करनी चाहिए। लेकिन, इस पर फैसला करना पूरी तरह मेरे हाथ में नहीं है। यह उस समय की जमीनी स्थिति पर निर्भर करता है। आरबीआई ने अप्रैल में रेपो दर को 6.5 फीसदी पर यथावत रख सबको हैरान कर दिया था। 
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खुदरा महंगाई 4.7% से नीचे आएगी, पर लड़ाई अभी जारी
दास ने कहा, खुदरा महंगाई में नरमी आई है। अभी और गिरावट आएगी, पर महंगाई के खिलाफ लड़ाई जारी है। अभी इस मोर्चे पर कोताही बरतने और आत्मसंतुष्टि की गुंजाइश नहीं है। इस पर काबू पाने को लेकर उठाए गए कदम जारी रहेंगे।  गवर्नर ने कहा, खुदरा महंगाई के अगले आंकड़े 4.7 फीसदी से नीचे रहेंगे। यानी मई में खुदरा महंगाई की दर इससे कम रहेगी। अप्रैल में यह 18 माह के निचले स्तर पर आ गई थी। गवर्नर ने कहा, पूर्व में महंगाई में नरमी दिख रही थी। लेकिन, यूक्रेन युद्ध शुरू होने से स्थिति पलट गई। वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से जिंसों के दाम बढ़ गए। 
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दास ने बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा जताते हुए कहा कि लिक्विडिटी और कैपिटल की मजबूत स्थिति और संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के साथ भारत का बैंकिंग सिस्टम स्थिर और मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा रिजर्व बैंक वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए अर्थव्यवस्था को पूरा समर्थन करेगा। 

बैंकिंग प्रणाली : एनपीए को लेकर चिंता घटी
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पूंजी, तरलता की मजबूत स्थिति व संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार से भारतीय बैंकिंग प्रणाली स्थिर एवं मजबूत बनी हुई है। बैंकों की कुल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां दिसंबर अंत में घटकर 4.4 फीसदी रह गईं। एनपीए कभी बैंकों के लिए चिंता का विषय था। अब कम हुआ है, जो अच्छा संकेत है। बैंक से कर्ज लेने में तेजी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह 15.5 फीसदी रहा है। वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने को  आरबीआई जीडीपी को पूरा समर्थन देगा। अल नीनो एक अन्य जोखिम है। यह हमारी अर्थव्यवस्था को किस हद तक प्रभावित करता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


जनसांख्यिकी लाभ भारत के लिए एक बड़ा अवसर  
जीडीपी वृद्धि दर बनी हुई है। चालू खाते का घाटा कम हुआ है और प्रबंधन लायक स्थिति में है। राजकोषीय घाटे में भी गिरावट आई है। इन सबके ऊपर, हमारे पास जनसांख्यिकी लाभ भी है। यह भारत के लिए बड़ा अवसर है। यह कुछ ऐसा है, जो हमारे संभावित उत्पादन में वृद्धि करेगा। कुछ लोग इसे भारत की विकास क्षमता कहना पसंद करते हैं। -शक्तिकांत दास, गवर्नर, आरबीआई

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