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1.3 लाख करोड़ घटेगी भारतीय विमानन कंपनियों की कमाई, तीन साल तक रहेगा कोरोना का असर
Thu, 16 Jul 2020 05:30 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला, नेटवर्क, मुंबई
अमर उजाला, नेटवर्क, मुंबई
Published by: अवधेश कुमार
Updated Thu, 16 Jul 2020 05:30 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
भारतीय विमानन कंपनियों को तीन वित्तवर्षों में 1.1-1.30 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को बताया कि कोराना से दुनियाभर में वीजा और यात्रा पर प्रतिबंध लगा है। घरेलू विमानन उद्योग पर इसका असर तीन साल तक रहेगा।
क्रिसिल ने बताया कि फिलहाल इन कंपनियों का राजस्व कोविड-19 के पूर्व की अवस्था में आने की उम्मीद नहीं है। 2020 से 2022 तक इन कंपनियों को 1.30 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है। अगर क्रूड के दाम 2021 में 38-42 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित रहते हैं, तो विमानन कंपनियों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
विमान परिचालन के खर्च में 30-45% हिस्सेदारी ईंधन की होती है। फिलहाल जो माहौल है, उससे चालू वित्तवर्ष में घरेलू विमान यात्रियों की संख्या में 40-45% और विदेशी यात्रियों में 60-65 फीसदी गिरावट का अनुमान है।
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कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजेगी एयर इंडिया
भारी कर्ज और घाटे से गुजर रही एयर इंडिया की हालत कोरोना संकट में और खराब हो गई है। कंपनी सूत्रों के मुताबिक, कई कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जा रहा है। इस दौरान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। लागत घटाने को कंपनी ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है। इन्हें छह महीने से दो साल तक भेजा जा सकता है, जो बाद में 5 साल तक हो सकता है। सूची तैयार करने के लिए मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों में हर कर्मचारी का मूल्यांकन किया जाएगा।
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क्रिसिल ने बताया कि फिलहाल इन कंपनियों का राजस्व कोविड-19 के पूर्व की अवस्था में आने की उम्मीद नहीं है। 2020 से 2022 तक इन कंपनियों को 1.30 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है। अगर क्रूड के दाम 2021 में 38-42 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित रहते हैं, तो विमानन कंपनियों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
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विमान परिचालन के खर्च में 30-45% हिस्सेदारी ईंधन की होती है। फिलहाल जो माहौल है, उससे चालू वित्तवर्ष में घरेलू विमान यात्रियों की संख्या में 40-45% और विदेशी यात्रियों में 60-65 फीसदी गिरावट का अनुमान है।
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भारी कर्ज और घाटे से गुजर रही एयर इंडिया की हालत कोरोना संकट में और खराब हो गई है। कंपनी सूत्रों के मुताबिक, कई कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जा रहा है। इस दौरान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। लागत घटाने को कंपनी ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है। इन्हें छह महीने से दो साल तक भेजा जा सकता है, जो बाद में 5 साल तक हो सकता है। सूची तैयार करने के लिए मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों में हर कर्मचारी का मूल्यांकन किया जाएगा।