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बजट बढ़ाने से इलाज पर घटेगा खर्च, आयुष्मान भारत जैसी योजना पर ध्यान देने की जरूरत

Sat, 30 Jan 2021 02:31 AM IST
Jeet Kumar बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 30 Jan 2021 02:31 AM IST
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Union Budget 2021: Increase in budget will reduce expenses; focus on schemes like Ayushman bharat
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

आर्थिक सर्वेक्षण में स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च एक फीसदी से बढ़ाकर जीडीपी का 2.5 से 3 फीसदी तक करने का सुझाव दिया गया है। 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में भी यह लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद अभी यह एक फीसदी के आसपास ही है।

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सर्वेक्षण में कहा गया है कि सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य सेवाओं पर कुल व्यय में आम लोगों की ओर से किया जाने वाला खर्च 65 फीसदी से घटकर 30 फीसदी तक आ सकता है।
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देश को भविष्य में किसी भी महामारी से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में तेजी लाने की आवश्यकता है। दूर-दराज के क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए टेलीमेडिसिन का पूरा उपयोग किए जाने की आवश्यकता है, जिसके लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी में खासतौर पर निवेश की जरूरत है।
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इसमें यह भी कहा गया है कि ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र की ओर से उपलब्ध कराया जाता है।

ऐसे में नीति-निर्माताओं को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सूचना की विषमता कम करने की नीतियां बनाने में मुश्किलें आती हैं, जिससे बाजार में विफलताएं पैदा होती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विनियमन और निगरानी के लिए एक क्षेत्रीय नियामक पर विचार किया जाना चाहिए।

निम्न वृद्धि दर की स्थिति में भी भारत का कर्ज कम होगा : सीईए 
मुख्य अर्थशास्त्री केवी सुब्रमणियम का कहना है कि आर्थिक वृद्धि के कारण कर्ज के मामले में एक स्थिरता बनी है। अगर भारत की वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 2022-23 से 2028-29 तक 3.8 फीसदी रहती है तो भी देश का कर्ज का स्तर नीचे आएगा। भारत बुनियादी ढांचे पर खर्च पर जोर के साथ विस्तार वाली राजकोषीय नीति को अपनाता रहा है।

उन्होंने कहा, भारत को निश्चित रूप से वृद्धि पर ध्यान देना चाहिए ताकि हम पुनर्वितरण करने में सक्षम हों और लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जाए। उन्होंने कहा, भारत ने इस भीषण संकट से निपटने के लिए परिपक्वता के साथ और जो साहसिक कदम उठाये, उसका जब भी आकलन होगा, सराहना की जाएगी। 

आर्थिक समीक्षा का मकसद स्पष्ट नहीं : चिदंबरम
नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण का मकसद स्पष्ट नहीं है। पूर्व वित्तमंत्री ने ट्वीट में कहा, सरकार ने यह सबसे अच्छा निर्णय लिया कि आर्थिक समीक्षा की छपाई नहीं की, जबकि यह लोगों को अर्थव्यवस्था की स्थिति और आने वाले साल के पहलुओं के बारे में साधारण भाषा में समझाने का माध्यम है। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि अब आर्थिक समीक्षा का मकसद दूसरा हो गया है। 

आईबीसी ने कर्जदार-कर्जदाता के संबंधों को नई दिशा दी
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) ने कर्जदार-ऋणदाता के संबंधों को नए सिरे से परिभाषित किया है। सितंबर, 2020 तक समाधान प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा से पहले ही 80 फीसदी कॉरपोरेट कर्जदारों के मामलों का समाधान कर लिया गया।

आईबीसी ने दिसंबर, 2020 तक समाधान योजना के जरिए 308 कॉरपोरेट कर्जदारों का बचाव किया है। इनपर ऋणदाताओं का 4.99 लाख करोड़ रुपये का बकाया था। हालांकि, इन कंपनियों के कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में जाने तक उनके पास उपलब्ध संपत्तियों का वसूली मूल्य सिर्फ 1.03 लाख करोड़ रुपये था।

प्रक्रिया के तहत ऋणदाताओं ने 1.99 लाख करोड़ रुपये की वसूली की, जो उनकी संपत्तियों के वसूली मूल्य से 193 प्रतिशत अधिक है। आईबीसी को 2016 में लागू किया गया था। उस समय से सितंबर, 2020 तक 18,892 आवेदनों में 5.15 लाख करोड़ रुपये की चूक के 14,884 मामलों को न्याय निर्णय की प्रक्रिया में जाने से पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की विभिन्न पीठों से वापस ले लिया गया।

रियल एस्टेट...बिक्री में सुधार के संकेत
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि महामारी से बुरी तरह प्रभावित रियल एस्टेट क्षेत्र अब सुधार की ओर बढ़ रहा है। जुलाई के बाद से किफायती मकानों की बिक्री में सुधार हुआ है।

मार्च, 2020 से जून, 2020 में तिमाही आधार पर एचपीआई एसेसमेंट प्राइस के लिए कुल लेनदेन में 71 फीसदी की गिरावट आई थी, जबकि सालाना आधार पर जून 2019 से जून 2020 के बीच यह आंकड़ा 67 फीसदी का रहा। इससे यह साफ है कि महामारी का असर आवासीय क्षेत्र पर पड़ा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मकान खरीदारों की संख्या में गिरावट आई।

सर्वेक्षण के मुताबिक, हाउसिंग लोन में वृद्धि नवंबर 2020 में 8.5 फीसदी रही, जबकि उसके पिछले साल नवंबर, 2019 में यह आंकड़ा 18.3 फीसदी था। इसके अलावा, इस क्षेत्र की महंगाई भी 2020-21 (अप्रैल-दिसंबर) में गिरकर 3.3 फीसदी रह गई, जो 2018-19 में 6.7 फीसदी थी।

स्पेस सेक्टर में काम कर रहे हैं 40 स्टार्टअप, जल्द और कंपनियां आएंगी
बजट सत्र से पहले केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि स्पेस सेक्टर (अंतरिक्ष क्षेत्र) के लिए लाए गए रिफॉर्म से काफी लाभ हुआ है। सरकार द्वारा जिन स्टार्टअप को फंड दिया जा रहा है उसमें से 40 स्टार्टअप भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ काम कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से निजी कंपनियों को स्पेस सेक्टर में प्रवेश का मौका मिला है। इससे देश में स्पेस-टेक्नोलॉजी के लिए एक ईको-सिस्टम तैयार हुआ है। आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और बढ़ेगी। निजी कंपनियों को इनोवेशन के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता जरूरी है।

शीर्ष दस में पहुंचने के लिए महत्वकांक्षी होना जरूरी
सर्वे के अनुसार देश में वर्ष 2007 में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स की शुरुआत के बाद से 2020 में पहली बार भारत शीर्ष 50 इनोवेटिव देशों की सूची में शामिल हुआ था।


केंद्रीय और दक्षिण एशिया में इनोवेशन के क्षेत्र में भारत इसी के साथ पहले पायदान पर पहुंच गया है जबकि मध्यम आय वाले देशों में देश तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में ये भी स्पष्ट कहा है कि भारत को दुनिया के शीर्ष दस देशों की सूची में शामिल होने के लिए महत्त्वकांक्षी रहना जरूरी है।

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