18 जनवरी को जीएसटी काउंसिल की बैठक, डीजल-पेट्रोल को लेकर हो सकता है अहम फैसला
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वैट घटाने को राजी नहीं राज्य सरकार
केंद्र सरकार अक्टूबर के बाद से राज्य सरकारों से अपील कर चुकी है कि वो पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैट व एक्साइज को घटा दें। लेकिन राज्य सरकारें इस पर राजी नहीं हुई हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय कर रहा कोशिश
पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोलियम पदार्थो को जीएसटी के दायरे में लाना बेहद जरूरी है। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो जीएसटी के साथ सेस भी लग सकता है।
इन राज्यों में लग सकता है एक समान सेस
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड और चंडीगढ़ एक-समान सेस लगा सकते हैं ताकि, इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमत एक रहें। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बढ़ती कीमतों के चलते पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से पेट्रोलियम पदार्थो को जीएसटी के दायरे में लाना एक बेहतर विकल्प है।
इन 4 कारणों से बढ़ रहे हैं दाम
-- तेल कंपनियों के अनुसार 12 दिसंबर 2017 के बाद तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उस दिन डीजल की कीमत 58.34 रुपये लीटर थी। पिछले एक महीने में इसमें 3.40 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इस दौरान पेट्रोल के दाम 2.09 रुपये लीटर बढ़े हैं।
-- वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के व्यापार के दो प्रमुख मानकों ब्रेंट तथा वेस्ट टेक्सास इंटीमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में दिसंबर 2014 के बाद काफी तेजी आयी है। पिछले सप्ताह ब्रेंट 70.05 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि डब्ल्यूटीआई 64.77 डालर पर पहुंच गया था।
-- कच्चे तेल के दाम में वृद्धि के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने शुरू हो गये हैं। इस स्थिति को देखते हुये सरकार से आम लोगों को राहत देने के लिये उत्पाद शुल्क में कटौती की मांग फिर से की जाने लगी है।
-- भाजपा नीत राजग सरकार ने अपने कार्यकाल में उत्पाद शुल्क में एक बार कटौती की है। अक्तूबर 2017 में जब दिल्ली में पेट्रोल का दाम 70.88 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 59.14 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था, सरकार ने उत्पाद शुल्क में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।