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विश्व के 113 समृद्ध शहरों में शामिल हुए दिल्ली, बंगलूरू और मुंबई
Fri, 22 Nov 2019 07:40 PM IST
Priyesh Mishra
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 22 Nov 2019 07:40 PM IST
सार
- विकास सूची: बंगलूरू और दिल्लीवासियों को सबसे ज्यादा मिला विकास का लाभ
- आर्थिक और सामाजिक समावेश के पैमाने पर दुनिया के 113 शहरों में मुंबई भी शामिल
- 101वें स्थान पर है दिल्ली वैश्विक समावेशी सूचकांक में बंगलूरू 83वें पायदान पर
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india gate
- फोटो : ANI
विस्तार
आर्थिक समृद्धि के साथ समाज तक उसका लाभ पहुंचाने के मामले में दिल्ली, बंगलूरू सहित तीन भारतीय शहर वैश्विक सूची में शामिल हैं। स्पेन के बिल्बाओ में बृहस्पतिवार शाम समृद्धि एवं समावेशी शहरों की वैश्विक सूची जारी की गई। दुनिया के 113 शहरों की इस सूची में मुंबई भी शामिल है।
यह सूचकांक किसी शहर का आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि इस विकास की गुणवत्ता और जनसंख्या के बीच इसके वितरण को भी दर्शाता है। सूची में शामिल तीन भारतीय शहरों में सबसे आगे बंगलूरू है, जो 83वें पायदान पर काबिज है। इसी सूचकांक में दिल्ली 101वें और मुुंबई 107वें स्थान पर है।
बिस्के की क्षेत्रीय परिषद में सामरिक कायक्रम निदेशक असियर एलिया कास्टानोस ने कहा कि यह पहला गैर वाणिज्यिक रैंकिंग है, जो आर्थिक उत्पादकता के नए उपाय बताता है जो जीडीपी से परे की बात है। इसका मकसद समग्र रूप से यह पता लगाना है कि अर्थव्यवस्था में लोगों की स्थिति क्या हैं। अब सरकारें भी समझने लगी हैं कि समृद्धि का पता लगाते समय नौकरियों, दक्षता और आय के साथ स्वास्थ्य, आवासीय सामर्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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2- वियना (आस्ट्रिया)
3- कोपेनहेगन (डेनमार्क)
4- लक्जमबर्ग (आस्ट्रिया)
5- हेलसिंकी (फिनलैंड)
6- ताइपे (ताइवान)
7- ओस्लो (नॉर्वे)
8- ओटावा (कनाडा)
9- केल (जर्मनी)
10- जिनेवा (स्विटजरलैंड)
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यह सूचकांक किसी शहर का आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि इस विकास की गुणवत्ता और जनसंख्या के बीच इसके वितरण को भी दर्शाता है। सूची में शामिल तीन भारतीय शहरों में सबसे आगे बंगलूरू है, जो 83वें पायदान पर काबिज है। इसी सूचकांक में दिल्ली 101वें और मुुंबई 107वें स्थान पर है।
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बिस्के की क्षेत्रीय परिषद में सामरिक कायक्रम निदेशक असियर एलिया कास्टानोस ने कहा कि यह पहला गैर वाणिज्यिक रैंकिंग है, जो आर्थिक उत्पादकता के नए उपाय बताता है जो जीडीपी से परे की बात है। इसका मकसद समग्र रूप से यह पता लगाना है कि अर्थव्यवस्था में लोगों की स्थिति क्या हैं। अब सरकारें भी समझने लगी हैं कि समृद्धि का पता लगाते समय नौकरियों, दक्षता और आय के साथ स्वास्थ्य, आवासीय सामर्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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अमीर शहरों में पिछड़ा विकास
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के सबसे अमीर शहरों में रहने वाले नागरिकों तक समावेशी विकास नहीं पहुंचा है और वे सूची में काफी पिछले पायदान पर हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन शहरों में आर्थिक विकास की असमानता काफी ज्यादा है। फोर्ब्स के दुनिया के शीर्ष 10 अमीर शहरों में शामिल मुंबई 107वें पायदान पर है, जबकि लंदन 33वें और न्यूयॉर्क सिटी 38वें पायदान पर है। गरीबी और असमानता जैसी चुनौतियों की वजह से अफ्रीकी, एशियाई और दक्षिण अमेरिकी देशों को सूची में काफी कम रैंकिंग मिली है।समावेशी विकास में चीन-पाक से पीछे भारत
समावेशी विकास सूचकांक में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 62वें स्थान पर है, जबकि इस मामले में चीन (26वें) और पाकिस्तान (47वें) पायदान पर हैं। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की फरवरी, 2019 की सूची में नॉर्वे समावेशी आधुनिक शहर विकसित करने के मामले में शीर्ष पर रहा है। इस सूचकांक में रहन-सहन का स्तर, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊपन और भविष्य की पीढ़ियों को कर्ज के बोझ से संरक्षण देने से पहलुओं को शामिल किया जाता है। 2018 में जारी सूची में भारत 60वें पायदान पर था, जिसे दो स्थान का नुकसान हुआ है।शीर्ष तीन शहर यूरोपीय
1 - ज्यूरिख (स्विटजरलैंड)2- वियना (आस्ट्रिया)
3- कोपेनहेगन (डेनमार्क)
4- लक्जमबर्ग (आस्ट्रिया)
5- हेलसिंकी (फिनलैंड)
6- ताइपे (ताइवान)
7- ओस्लो (नॉर्वे)
8- ओटावा (कनाडा)
9- केल (जर्मनी)
10- जिनेवा (स्विटजरलैंड)