ब्लैक मनी पर ईडी ने कसा शिकंजा, मनी लांड्रिंग-फेमा के तहत दर्ज किए 3,700 केस
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नोटबंदी के बाद सामने आए कालाधन के मामलों के खिलाफ कार्रवाई के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मनी लांड्रिंग और हवाला लेन-देन के तहत 3,700 से अधिक मामलों की छानबीन कर रही है जिनमें 9,935 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति शामिल है। बृहस्पतिवार को एक आधिकारिक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई।
पिछले साल 8 नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद दर्ज किए गए इन मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी ‘जोखिम आंकलन’ भी किया जिनमें 43 फीसदी वित्तीय अपराध फर्जी कंपनियों के माध्यम से बैंकों या वित्तीय संस्थानों के साथ धोखाधड़ी करके किए गए।
नोटबंदी के बाद हुए अन्य श्रेणी के वित्तीय अपराधों में 31 फीसदी भ्रष्टाचार, 6.5 फीसदी ड्रग्स या नशीले पदार्थों के व्यापार और 4.5 फीसदी विस्फोटक और 8.5 फीसदी अन्य मामले शामिल रहे जिनकी जांच ईडी कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि बैंकों के माध्यम से इकट्ठा किए गए गैरकानूनी धन और भ्रष्टाचार से हासिल किए गए धन, कालाधन का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। नोटबंदी के बाद सामने आए सामान्य मामलों की समीक्षा से पता चलता है कि व्यवसायी और पेशेवर एक साथ मिलकर फर्जी कंपनियों के माध्यम से गैरकानूनी पैसों को वैध संपत्ति में तब्दील कर रहे हैं।
ईडी के निदेशक कर्नल सिंह का कहना है कि एजेंसी कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है और अपने काम में पेशेवर रवैया अपनाने को तैयार है।
एजेंसी ने पिछले साल 8 नवंबर से इस साल सितंबर तक कुल 3,758 मामले दर्ज करके इनकी जांच कर रही थी जिनमें 3,567 मामले विदेशी मुद्रा कानून और 191 मामले कालाधन-रोधी अधिनियम के तहत दर्ज किए गए थे।
उसने इनमें से 777 मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किया और कुर्की के आदेश भेजे। वहीं उसने 620 मामलों में छापेमारी भी की। इन मामलों में संपत्ति और विदेशी मुद्रा उल्लंघन राशि का कुल मूल्य 9,935 करोड़ रुपये है जिनमें से एजेंसी ने मनी लांड्रिंग अधिनियम के तहत 5,335 करोड़ की संपत्ति की कुर्की कर ली है।
वहीं एजेंसी ने 4,600 करोड़ रुपये के लिए फेमा के तहत नोटिस जारी किया।