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आज होगा इकोनॉमिक्स के लिए नोबेल पुरस्कार का ऐलान, रघुराम राजन का नाम भी लिस्ट में

Mon, 09 Oct 2017 12:57 PM IST
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल Updated Mon, 09 Oct 2017 12:57 PM IST
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economics nobel prize to announce today as former rbi governor raghuram rajan in list too
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को इस साल का इकोनॉमिक्स में नोबेल पुरस्कार मिल सकता है। इसकी घोषणा आज दोपहर को 2 बजे की जाएगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, राजन का नाम टॉप 6 की लिस्ट में शामिल हो गया है।
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क्लेरीवेट एनालिटिक्स द्वारा तैयार संभावित छह उम्मीदवारों की सूची में राजन का नाम भी है। हालांकि, इस सूची में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि राजन पुरस्कार पाने वालों में सबसे आगे हैं बल्कि वह इसे जीतने वाले संभावित दावेदारों में से एक हैं।
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अखबार के अनुसार राजन का नाम उस कंपनी ने अपनी लिस्ट में शामिल किया है, जो कि नोबेल पुरस्कार पाने वाले लोगों की एकेडमिक और साइंटिफिक रिसर्च के डाटा को कंपाइल करती है। 
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पढ़ें- इनके पढ़ाए बन चुके हैं RBI के गवर्नर, आज ऐसे गुजार रहे जिंदगी...

राजन तीन साल रहे थे रिजर्व बैंक के गर्वनर
राजन को इकोनॉमिक्स के लिए नोबेल पुरस्कार की टॉप 6 की लिस्ट में इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि भारत में तीन साल के लिए रिजर्व बैंक के गर्वनर रहने के दौरान उन्होंने कॉर्पोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में काफी अच्छे फैसले लिए थे।

अब हैं शिकागो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर
राजन इस समय शिकागो यूनिवर्सिटी में बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं। साल 2013 में यूपीए सरकार में उन्हें आरबीआई गवर्नर बनाया गया था, राजन RBI में अपना कार्यकाल बढ़वाना चाहते थे लेकिन एनडीए सरकार की ओर से उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया गया। आरबीआई के गवर्नर के तौर पर राजन का तीन साल का कार्यकाल 4 सितंबर 2016 को पूरा हो गया था। 

जताई थी आर्थिक मंदी की आशंका

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राजन सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रमुख की उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। राजन अक्टूबर, 2003 से दिसंबर, 2006 तक इस संस्था के मुख्य अर्थशास्‍त्री के रूप में कार्यरत रहें। 

गौरतलब है कि राजन ने 2008 में अमेरिका में एक भाषण के दौरान दुनिया को आगाह करते हुए आर्थिक मंदी की संभावना जताई थी जिसके तीन साल बाद यह सच साबित हुई और विश्व ने आर्थिक मंदी का दौर देखा।

नोटबंदी का किया था विरोध
राजन ने हाल में ही अपनी किताब ‘आई डू व्हाट आई डू’ में खुलासा किया कि उन्होंने फरवरी 2016 में नोटबंदी के प्रस्ताव का विरोध किया था। लंबे समय में इसके फायदे हो सकते हैं, लेकिन तत्काल समय में डिमॉनेटाइजेशन से भारतीय इकोनॉमी को नुकसान होगा।

आरबीआई चीफ बनने से पहले राजन भारतीय वित्त मंत्रालय, विश्व बैंक, फेडरल रिजर्व बोर्ड और स्वीडिश संसदीय आयोग के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। 2003 से 2006 तक वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री व अनुसंधान निदेशक रहे।
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