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अहम की लड़ाई में पहुंच रहा ब्रांड इंडिगो को नुकसान, लाभ उठाने की तैयारी में विरोधी कंपनियां

Sat, 20 Jul 2019 03:51 AM IST
Nilesh Kumar शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sat, 20 Jul 2019 03:51 AM IST
सार

  • इंडिगो के सह-संस्थापकों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच बढ़ी लड़ाई 
  • 49 फीसदी हिस्सेदारी है देश के घरेलू एयरलाइन कारोबार में इंडिगो का
  • प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, सेबी और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तक पहुंची गई है शिकायत 
  • प्रबंधन के अधिकारियों को सताने लगा है नौकरी जाने का डर 

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Damage to brand IndiGo by the battle of ego,  Anti-companies in preparation to take advantage
indigo-spicejet - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के सह-संस्थापकों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच अहम की लड़ाई से ‘ब्रांड इंडिगो’ को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। एक ओर कंपनी के आपसी झगडे़ में सरकार ने दखल देते हुए जवाब मांग लिया है तो दूसरी ओर प्रतिस्पर्धी विमानन कंपनियां इस अवसर का लाभ उठाने की तैयारी में हैं। देश के घरेलू एयरलाइन कारोबार में इंडिगो की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी है। 

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केंद्रीय विमानन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि ऐसी स्थिति न सिर्फ इंडिगो के लिए बल्कि भारतीय विमानन जगत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि इस समय इंडिगो देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी है और बेहद प्रोफेशनल तरीके से चल रही है। लेकिन जब इसके संस्थापकों के आपसी लडाई लॉ फर्म तक होते हुए प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, बाजार नियामक सेबी और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तक पहुंच गई है। 
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जाहिर है कि इससे प्रबंधन के मनोबल पर असर पडेगा। उधर, इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की शिकायत पर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने कंपनी कानून-2013 की धारा 26 (4) के तहत इंडिगो से जवाब मांगा है। धारा-26 मंत्रालय को सूचना मांगने, बहीखातों का निरीक्षण करने और पूछताछ करने की शक्तियां देती है। गंगवाल की एयरलाइन में करीब 37 फीसदी और भाटिया के पास 38 फीसदी हिस्सेदारी है। 

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प्रवर्तकों के झगड़े का कंपनी पर असर

अधिकारी ने कुछ बड़े थिंक टैंक का हवाला देते हुए कहते हैं कि प्रवर्तकों के झगड़े का असर कंपनी के कामकाज पर भी पड़ता है। प्रबंधन के अधिकारियों को अब डर लगने लगा है कि पता नहीं कब उन्हें हटा दिया जाएगा। यही नहीं, इससे ग्राहक भी बिदकने लगते हैं।

आपसी झगड़े में कंपनी को नुकसान पहुंचने का सबसे बड़ा उदाहरण रिलायंस है, जब अनिल और मुकेश अंबानी अलग हो गए थे। इस लड़ाई में एक भाई की करीब सभी कंपनियों का बंटाधार हो गया। इसी तरह, यदि इंडिगो की लड़ाई चलती रही तो उसका असर बाजार पर भी पड़ेगा। बात बढ़ने पर ग्राहक भी इससे मुंह मोड़ना शुरू कर देंगे।

प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने कसी कमर

Damage to brand IndiGo by the battle of ego,  Anti-companies in preparation to take advantage
Go Air

इंडिगो की इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए स्पाइसजेट और गो एयर जैसी प्रतिद्वंद्वी विमानन कंपनियों ने भी कमर कस ली है। हालांकि, ये दोनों कंपनियां खुले तौर पर ऐसा कुछ नहीं कह रही हैं, लेकिन उनकी तैयारी को कुछ ऐसा ही देखकर लगता है।

स्पाइसजेट को ही देखें तो 2014 में यह बंद होने की कगार पर थी। इसके बेड़े में महज 35 विमान बचे थे, जो अब 110 हो गए हैं। कंपनी ने इस साल के अंत तक विमानों की संख्या बढ़ाकर 135 पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो और विमान भी बेडे़ में शामिल होंगे।

इसी तरह गो एयर ने भी अपने पूरे प्रबंधन को नया रूप दिया है। इसने कुछ दिन पहले ही विमानन जगत की माहिर मिरांडा मिल्स को अपना चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया है। मिल्स ने एयरबस और रॉल्स रॉयस जैसी बड़ी कंपनियों में काम किया है।

गो एयर ने हाल ही में जेट एयरवेज के खाली किए गए 28 घरेलू और तीन विदेशी मार्गों पर सेवा शुरू करने की घोषणा की है। साथ ही कंपनी ने अपने बेड़े में बीते गुरुवार को 51वां विमान शामिल किया है और हर महीने एक नया विमान शामिल करने की बात कही है। गोएयर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं बचाने की शर्त पर कहा कि यदि अवसर मिला तो इसका लाभ अवश्य उठाएंगे। 

ऐसे सार्वजनिक हुआ झगड़ा

गंगवाल और भाटिया के बीच टकराव नया नहीं है। दोनों के बीच टकराव की बात तब सामने आई थी, जब गंगवाल ने आरपीटी और कॉरपोरेट नियंत्रण के मुद्दों को लेकर बाजार नियामक सेबी को पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में लिखा था कि इंडिगो से बेहतर तो पान की दुकान चलती है।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि पहले इस झगड़े को आपसी स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास किया गया था और जब ऐसा संभव नहीं हुआ तो कानूनी फर्म की सेवाएं ली गईं। वहां से भी जब मामला नहीं सुलझा तो लड़ाई सार्वजनिक हो गई। इस मामले में इंडिगो के प्रवक्ता का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 

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