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कर्ज लेने वाले किसानों के लिए जरूरी नहीं होगा फसली बीमा
Tue, 18 Jun 2019 06:17 AM IST
Avdhesh Kumar
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 18 Jun 2019 06:17 AM IST
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bima fasal yojana
वैसे तो बीमा आग्रह की विषय-वस्तु है, लेकिन बैंकों से फसली ऋण लेने वाले किसानों को यह अनिवार्य रूप से लेना पड़ता है। ऐसे में अधिकतर किसान इसे फायदे का सौदा नहीं मानते हैं। सरकार इसका दायरा बढ़ाने के लिए फसली बीमा को स्वैच्छिक बनाने की तैयारी में है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, कुछ जरूरी औपचारिकताओं के बाद जल्द ही इसकी अधिसूचना निकाल दी जाएगी। मंत्रालय ने इसे नई सरकार के 100 दिन की कार्य योजना में भी शामिल है। उन्होंने बताया कि फसल बीमा को स्वैच्छिक करने से किसान या किसान संगठन जागरूक होंगे। वे मौसम, स्थानीय स्थिति और फसल के हिसाब से खतरे का अनुमान लगाएंगे और अगर जरूरी होगा तो ही फसल बीमा लेंगे। इसके लिए बैंकों को भी जरूरी निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे फसल ऋण लेने वाले किसानों पर बीमा कराने का दबाव न डाल सकें।
बीमा कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
फसल बीमा अनिवार्य होने से कंपनियों को बिना कोशिश किए कारोबार मिल रहा है और वे इस दिशा में सक्रिय नहीं हैं। नई नीति लागू होने के बाद उन्हें भी जीवन बीमा या सामान्य बीमा की तरह किसानों से आग्रह करना होगा, जिससे फसली बीमा उत्पाद और भी आकर्षक बनेगा। इसके अलावा अभी तक फसल बीमा बैंककर्मी ही करते हैं और वही फॉर्म भरते हैं, जिससे नाम, रकबा, फसल या क्षेत्र के नाम में गलतियों की आशंका ज्यादा होती है। अब किसान और उनके प्रतिनिधि खुद रुचि लेंगे तो इस तरह की गलतियां कम होंगी।
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बढ़ सकता है प्रीमियम
अभी फसल बीमा के प्रीमियम के निर्धारण में सरकार का दबाव ज्यादा रहता है, लेकिन नए नियम लागू हुए तो बीमा कंपनियां अपने हिसाब से जोखिमों का आकलन करेंगी और उसी आधार पर प्रीमियम निर्धारित होगा। ऐसे में फसली बीमा का प्रीमियम पर खर्च बढ़ सकता है। इसका असर किसानों के साथ सरकार पर भी होगा, क्योंकि किसान रबी फसल में कुल प्रीमियम का डेढ़ फीसदी और खरीफ में दो फीसदी ही देता है। बाकी भुगतान केंद्र और राज्य सरकारें आधा-आधा करती हैं।
आसान हो जाएगा बीमा लेना
फसल ऋण के साथ बीमा अनिवार्य होने पर अभी किसानों को कर्ज देने वाले बैंक ही अमूमन उसका बीमा भी कर देते हैं। दूसरी ओर, जो किसान बैंक से कर्ज लिए बिना खेती करते हैं, उन्हें फसली बीमा पाने के लिए काफी जहमत उठानी पड़ती है। इसकी अनिवार्यता खत्म होने के बाद ऐसे किसानों को भी फसली बीमा आसानी से मिल सकेगा।
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, कुछ जरूरी औपचारिकताओं के बाद जल्द ही इसकी अधिसूचना निकाल दी जाएगी। मंत्रालय ने इसे नई सरकार के 100 दिन की कार्य योजना में भी शामिल है। उन्होंने बताया कि फसल बीमा को स्वैच्छिक करने से किसान या किसान संगठन जागरूक होंगे। वे मौसम, स्थानीय स्थिति और फसल के हिसाब से खतरे का अनुमान लगाएंगे और अगर जरूरी होगा तो ही फसल बीमा लेंगे। इसके लिए बैंकों को भी जरूरी निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे फसल ऋण लेने वाले किसानों पर बीमा कराने का दबाव न डाल सकें।
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बीमा कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
फसल बीमा अनिवार्य होने से कंपनियों को बिना कोशिश किए कारोबार मिल रहा है और वे इस दिशा में सक्रिय नहीं हैं। नई नीति लागू होने के बाद उन्हें भी जीवन बीमा या सामान्य बीमा की तरह किसानों से आग्रह करना होगा, जिससे फसली बीमा उत्पाद और भी आकर्षक बनेगा। इसके अलावा अभी तक फसल बीमा बैंककर्मी ही करते हैं और वही फॉर्म भरते हैं, जिससे नाम, रकबा, फसल या क्षेत्र के नाम में गलतियों की आशंका ज्यादा होती है। अब किसान और उनके प्रतिनिधि खुद रुचि लेंगे तो इस तरह की गलतियां कम होंगी।
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बढ़ सकता है प्रीमियम
अभी फसल बीमा के प्रीमियम के निर्धारण में सरकार का दबाव ज्यादा रहता है, लेकिन नए नियम लागू हुए तो बीमा कंपनियां अपने हिसाब से जोखिमों का आकलन करेंगी और उसी आधार पर प्रीमियम निर्धारित होगा। ऐसे में फसली बीमा का प्रीमियम पर खर्च बढ़ सकता है। इसका असर किसानों के साथ सरकार पर भी होगा, क्योंकि किसान रबी फसल में कुल प्रीमियम का डेढ़ फीसदी और खरीफ में दो फीसदी ही देता है। बाकी भुगतान केंद्र और राज्य सरकारें आधा-आधा करती हैं।
आसान हो जाएगा बीमा लेना
फसल ऋण के साथ बीमा अनिवार्य होने पर अभी किसानों को कर्ज देने वाले बैंक ही अमूमन उसका बीमा भी कर देते हैं। दूसरी ओर, जो किसान बैंक से कर्ज लिए बिना खेती करते हैं, उन्हें फसली बीमा पाने के लिए काफी जहमत उठानी पड़ती है। इसकी अनिवार्यता खत्म होने के बाद ऐसे किसानों को भी फसली बीमा आसानी से मिल सकेगा।