{"_id":"5b238c074f1c1bfa6e8b80b8","slug":"kvic-lodges-complaint-against-fabindia-seeks-damages-worth-525-crore-rupees","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फैबइंडिया पर खादी आयोग ने ठोंका 525 करोड़ का मुकदमा, फैक्ट्री में बने सूती कपड़ों को बता रहा खादी","category":{"title":"Corporate","title_hn":"कॉरपोरेट","slug":"corporate"}}
फैबइंडिया पर खादी आयोग ने ठोंका 525 करोड़ का मुकदमा, फैक्ट्री में बने सूती कपड़ों को बता रहा खादी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 15 Jun 2018 03:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खादी ग्रामउद्योग आयोग ने कपड़े बेचने वाली कंपनी फैबइंडिया पर 525 करोड़ रुपये का मुकदमा ठोंका है। आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दर्ज किए गए मुकदमे में हर्जाना मांगा है।
विज्ञापन
यह लगाया आरोप
खादी आयोग (केवीआईसी) ने फैबइंडिया पर आरोप लगाया है कि वो फैक्ट्री में तैयार कपड़ों को खादी बताकर बेच रहा है और इससे मुनाफा भी कमाया है। इन कपड़ों पर खादी ट्रेडमार्क व मार्क का गलत इस्तेमाल किया गया है।
विज्ञापन
2015 से चल रहा है विवाद
फैबइंडिया और केवीआईसी के बीच खादी ट्रेडमार्क को लेकर के 2015 से विवाद चल रहा है। केवीआईसी ने कहा कि उसने फैबइंडिया को कभी भी खादी ब्रांड का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। केवीआईसी की तरफ से केवल रेमंड और अरविंद मिल्स को खादी नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली हुई है।
विज्ञापन
पहले भी दी थी चेतावनी
केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि वो पहले भी फैबइंडिया को चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी उसने ऐसा करने से रोका नहीं है। फैबइंडिया ने केवीआईसी को पहले भी भरोसा दिया था कि वो खादी नाम का इस्तेमाल करना बंद कर देगा।
जुलाई 2015 में किया था परीक्षण
केवीआईसी ने जुलाई 2015 में फैबइंडिया के सैंपल का परीक्षण करके पता लगाया था कि उसके द्वारा बेचे जा रहे कपड़े खादी उत्पाद नहीं हैं बल्कि वो फैक्ट्री में बने सूती कपड़ों को खादी के नाम से बेच रहा है।