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सरकार ने MSME के लिए दिवाला कानून में किया संशोधन, जानिए इससे कैसे होगा फायदा
Mon, 05 Apr 2021 03:07 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Mon, 05 Apr 2021 03:07 PM IST
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
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सरकार ने दिवाला कानून में संशोधन किया है। इसके तहत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) के लिए पूर्व-निर्धारित (प्री-पैकेज्ड) समाधान प्रक्रिया का प्रस्ताव किया गया है। एक अधिसूचना के अनुसार, दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन के लिए चार अप्रैल को एक अध्यादेश जारी किया गया है।
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एक साल के लिए नया मामला शुरू करने की थी रोक
करीब दो सप्ताह पहले ही आईबीसी के कुछ प्रावधानों का स्थगन समाप्त हुआ है। कारोना वायरस महामारी की वजह से आर्थिक गतिविधियों में आई अड़चनों के मद्देनजर आईबीसी के कुछ प्रावधानों को स्थगित कर दिया गया था। इसके तहत 25 मार्च, 2020 से एक साल के लिए आईबीसी के तहत कोई नया मामला शुरू करने की रोक थी।
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इसलिए पेश की गई प्री-पैकेज्ड समाधान प्रक्रिया
अध्यादेश के अनुसार, एमएसएमई के कारोबार की विशिष्ट प्रकृति और उनके सुगम कॉरपोरेट ढांचे की वजह से एमएसएमई से संबंधित दिवाला मामलों के निपटान के लिए कुछ विशेष व्यवस्था करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में एमएसएमई के लिए एक दक्ष और वैकल्पिक दिवाला समाधान प्रक्रिया की जरूरत थी। इससे सभी अंशधारकों के लिए एक तेज, लागत दक्ष और अधिकतम मूल्य को सुनिश्चित करने वाला समाधान किया जा सकेगा। अध्यादेश में कहा गया है कि इसी के मद्देनजर एमएसएमई के लिए एक प्री-पैकेज्ड समाधान प्रक्रिया पेश की गई है।
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इस संदर्भ में जे सागर एसोसिएट्स के भागीदार सौमित्र मजूमदार ने कहा कि आईबीसी संशोधन अध्यादेश-2021 से सही और व्यावहारिक मामलों के लिए एक प्री-पैकेज्ड मार्ग उपलब्ध कराया गया है। इससे कारोबार में कम से कम बाधा आएगी। कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश के सभी उद्योग प्रभावित हुए हैं। ऐसे में एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार ने पिछले साल मई में आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा करते हुए एमएसएमई के लिए दिवालिया प्रक्रिया के लिए सीमा एक लाख रुपये से बढ़ा कर एक करोड़ रुपये कर दी थी।