Year Ender 2024: बैंकों में आम लोगों की जमा राशि एक साल में 10% से ज्यादा बढ़ी, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
Money Deposit Year Ender 2024: साल 2024 का आखिरी महीना चल रहा है। बीते एक वर्षों में बैंकों में आम लोगों की ओर से जमा की गई राशि में बड़ा इजाफा दिखा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर 2023 और नवंबर 2024 के बीच बैंकों में जनता की ओर से जमा की गई राशि में 10.6% का इजाफा हुआ है। आंकड़ों में इजाफे से आरबीआई की लंबे समय से जारी चिंता बहुत हद तक दूर हुई है। इस बारे में और जानें।
विस्तार
साल 2024 का आखिरी महीना चल रहा है। बीते एक वर्षों में बैंकों में आम लोगों की ओर से जमा की गई राशि में बड़ा इजाफा दिखा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर 2023 और नवंबर 2024 के बीच बैंकों में जनता की ओर से जमा की गई राशि में 10.6% का इजाफा हुआ है, यह आंकड़ा ऋण वृद्धि के अनुरूप है।
बैंकों की ओर से जमा बढ़ाने के लिए की गई मेहनत रंग लाई
आंकड़ों के अनुसार बीते एक साल की अवधि में सावधि जमा और मांग जमा में भी दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। जमा में वृद्धि के यह आंकड़े बैंकों की ओर से जमा राशि जुटाने के अथक प्रयास और ऋण विस्तार में गिरावट का परिणाम हैं। आरबीआई ने पिछले महीने अपनी अर्थव्यवस्था की स्थिति रिपोर्ट में कहा था, "कुल मिलाकर, जमा और ऋण वृद्धि के बीच बेहतर संतुलन उभर रहा है, वृद्धिशील ऋण-जमा अनुपात पहले के उच्च स्तर से गिरकर सामान्य स्तर पर आ गया है।"
ऋण और जमा के अनुपात में हुआ सुधार
रिपोर्ट के अनुसार वास्तव में, वृद्धिशील जमा संग्रह वृद्धिशील ऋण वृद्धि से आगे निकल गया है। मार्च 2024 के अंत में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का वृद्धिशील ऋण-जमा अनुपात 95.8% था। आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त-अक्तूबर के दौरान वृद्धिशील जमा के वृद्धिशील ऋण से आगे निकल जाने से 1 नवंबर को यह घटकर 82.7% रह गया।
सार्वजनिक जमा राशि ₹203.2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹224.7 लाख करोड़ हुई
आरबीआई की ओर से बीते गुरुवार को जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास सार्वजनिक जमा 29 नवंबर की तारीख में '224.7 लाख करोड़' थी, जबकि एक साल पहले यह राशि '203.2 लाख करोड़' थी। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि मांग जमा (Demand Deposit) 26.3 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल आधार पर 10.3% बढ़ रही है जबकि सावधि जमा 10.6% बढ़कर '198.4 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान, बैंकों का ऋण भी 10.6% बढ़कर '179.6 लाख करोड़ हो गया, जो एक साल पहले' 162.4 लाख करोड़ था।
ऋण-जमा अनुपात में सुधार से बैंकों को मिली राहत
केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह आंकड़े अस्थाई हैं। पिछले दो वित्तीय वर्षों में, जमा की तुलना में ऋण में तेजी से विस्तार हुआ। बीते कुछ समय से आरबीआई लिक्विडिटी की असमानता को देखते हुए चिंतित था। सितंबर की शुरुआत में ऋण और जमा की वृद्धि का अंतर 220 आधार अंक तक था। अब इस दिशा में सुधार होने से राहत मिली है।