Year Ender 2023: कैपिटल गुड्स से जुड़े शेयरों पर बना रहा एफआईआई का भरोसा, 41000 करोड़ रुपये का आया निवेश
Year Ender 2023: एमके ग्लोबल के आंकड़ों से पता चलता है कि एफआईआई इस साल वित्तीय (+5.3%), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (+2%) और उपभोक्ता सेवा क्षेत्रों (+1.2%) में लगातार ओवरवेट रहे हैं, जबकि वे सॉफ्टवेयर और सेवाओं (-2.72%), एफएमसीजी (-2%) और ऊर्जा क्षेत्र (-1.95%) में लगातार अंडरवेट रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
2023 में दलाल स्ट्रीट की रिकॉर्ड तोड़ तेजी में (विदेशी संस्थागत निवेशकों) एफआईआई का खासा योगदान रहा। इन्होंने अपने पसंदीदा वित्तीय सेक्टर के शेयरों पर भरोसा जताया और आईटी शेयरों से दूरी बनाई। दूसरी ओर, पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े शेयरों में वैश्विक निवेशकों का भरोसा बना रहा।
एफआईआई की ओर से वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में 43,911 करोड़ रुपये का आया निवेश
2023 में (15 दिसंबर तक) एफआईआई की ओर से खर्च किए गए 1,45,852 करोड़ रुपये में से लगभग 30% प्रवाह (41,260 करोड़ रुपये) पूंजीगत वस्तुओं ( से जुड़े शेयरों में आया। जनवरी में इस क्षेत्र में महज 86 करोड़ रुपये की छोटी बिकवाली को छोड़कर एफआईआई कैलेंडर वर्ष के शेष सभी 11 महीनों में पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े शेयरों में शुद्ध खरीदार रहे। इस दौरान वित्तीय सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक 43,911 करोड़ रुपये की खरीदारी देखने को मिली। वित्तीय क्षेत्र में एफआईआई का औसत भारांश 33.1 प्रतिशत रहा जबकि पूंजीगत वस्तुओं के मामले में यह 5.1 प्रतिशत रहा।
एमके ग्लोबल के आंकड़ों से पता चलता है कि एफआईआई इस साल वित्तीय (+5.3%), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (+2%) और उपभोक्ता सेवा क्षेत्रों (+1.2%) में लगातार ओवरवेट रहे हैं, जबकि वे सॉफ्टवेयर और सेवाओं (-2.72%), एफएमसीजी (-2%) और ऊर्जा क्षेत्र (-1.95%) में लगातार अंडरवेट रहे हैं।
वैश्विक निवेशकों ने आईटी सेक्टर के शेयरों में की बिकवाली
मंदी की आशंका के बीच निवेशकों ने सॉफ्टवेयर निर्यातकों के प्रति वृद्धि और मार्जिन जोखिम की आशंका व्यक्त करते हुए जारी साल के दौरान करीब 10,600 करोड़ रुपये के आईटी शेयरों की बिकवाली की। वाहन कंपनियों के शेयरों में 28,746 करोड़ रुपये, उपभोक्ता सेवाओं में 16,884 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शेयरों में 11,900 करोड़ रुपये की लिवाली देखी गई।
दिलचस्प बात यह है कि तेल, गैस और उपभोग्य ईंधन से जुड़े ओल्ड इकोनॉमी के क्षेत्रों से जुड़े शेयरों में ही सबसे ज्यादा 26,637 करोड़ रुपये की बिकवाली भी दिखी। मीडिया, धातु और रसायन क्षेत्र के शेयर भी बिकवाली दिखी।
एक साल में बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स में करीब 60 पर्सेंट की आई तेजी
ऐसे में यहां एक बड़ा सवाल है कि क्या आपको निवेश के मामले में एफआईआई का अनुसरण करना चाहिए? पिछले एक साल में बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स में करीब 60 पर्सेंट की तेजी आई है, जबकि सेंसेक्स में 16 पर्सेंट की तेजी आई है। पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी और पूंजी बाजार अपने विस्तार के लिए अच्छी गुणवत्तापूर्ण वूद्धि हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। विश्लेषकों को पूंजीगत व्यय में अधिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि कॉरपोरेट खर्च और हाउसिंग साइकिल में हालिया वृद्धि अभी 5 साल और जारी रह सकते हैं। 85% पूंजीगत व्यय इसके लिए प्रमुख चालक की भूमिका निभाएगा। सरकारी पूंजीगत व्यय में विश्वास कम होने से पूंजीगत व्यय में किसी भी तरह की संभावित गिरावट के दौरान विशेष रूप से निवेशकों को खरीदारी का अवसर मिलेगा।