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Biz Updates: 2024 में वैश्विक स्तर पर वस्तुओं के व्यापार की मात्रा में आ सकती है 1.2% की कमी, GTRI का दावा
Thu, 11 Apr 2024 05:07 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 11 Apr 2024 05:07 PM IST
सार
Biz Updates: विश्व वस्तु व्यापार का अमेरिकी डॉलर मूल्य 2023 में 5 प्रतिशत गिरकर 24.01 ट्रिलियन डॉलर हो गया, लेकिन इस गिरावट को ज्यादातर वाणिज्यिक सेवाओं के व्यापार में मजबूत वृद्धि से सहारा मिला, जो 9 प्रतिशत बढ़कर 7.54 ट्रिलियन डॉलर हो गया।
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- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने गुरुवार को दावा किया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण मात्रा के संदर्भ में वैश्विक स्तर पर वस्तुओं के व्यापार में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। विश्व वस्तु व्यापार का अमेरिकी डॉलर मूल्य 2023 में 5 प्रतिशत गिरकर 24.01 ट्रिलियन डॉलर हो गया, लेकिन इस गिरावट को ज्यादातर वाणिज्यिक सेवाओं के व्यापार में मजबूत वृद्धि से सहारा मिला, जो 9 प्रतिशत बढ़कर 7.54 ट्रिलियन डॉलर हो गया।
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इससे भुगतान संतुलन के आधार पर वैश्विक सतर पर वस्तुओं और वाणिज्यिक सेवाओं का निर्यात 2023 में 2 प्रतिशत फिसलकर 30.8 ट्रिलियन डॉलर हो गया। जीटीआरआई ने कहा, "विश्व व्यापार संगठन (WTO) की ओर से वैश्विक व्यापार की मात्रा में 2024 में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताने के बावजूद विश्व वस्तु व्यापार का मूल्य अभी भी 2023 की तुलना में 2024 में अब तक 1.2 प्रतिशत तक फिसल गया है।
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विश्व व्यापार संगठन ने अनुमान लगाया है कि वैश्विक स्तर पर वस्तु व्यापार की मात्रा 2024 में 2.6 प्रतिशत और 2025 में 3.3 प्रतिशत बढ़ेगी। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, "डब्ल्यूटीओ के पूर्वानुमान में व्यापार मूल्यों पर प्रभाव शामिल नहीं है, जो व्यापार प्रदर्शन को मापने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला पैरामीटर है। व्यापार मूल्य की गणना करना सीधा है, क्योंकि इसमें सभी लेनदेन के मूल्यों को जोड़ना शामिल हो है।"
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उन्होंने कहा, "हालांकि वस्तुओं के व्यापार की मात्रा की गणना करना उतना आसान नहीं है जितना कि लौह अयस्क और हीरे जैसी विभिन्न वस्तुओं की मात्रा को जोड़ना, इस कारण गलत निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ व्यापार की मात्रा में बदलाव की गणना करने के लिए एक जटिल तरीका अपनाता है।"
भारत और मॉरीशस ने कर संधि में संशोधन के लिए प्रोटोकॉल पर किए हस्ताक्षर
भारत और मॉरीशस ने दोहरे कराधान बचाव समझौते (डीटीएए) में संशोधन के लिए एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें यह तय करने के लिए एक प्रिंसिपल परपज टेस्ट (पीपीटी) शामिल है कि कोई विदेशी निवेशक संधि लाभों का दावा करने के लिए पात्र है या नहीं।
कर विशेषज्ञों ने कहा कि प्रोटोकॉल में एक नया आर्टिकल ‘आर्टिकल 27बी लाभ का अधिकार’ जोड़ा गया है। संशोधित प्रोटोकॉल पर 7 मार्च को हस्ताक्षर किए गए और अब इसे सार्वजनिक किया गया है। पीपीटी की शुरुआत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संधि लाभ केवल वास्तविक उद्देश्य वाले लेनदेन के लिए ही हो। साथ ही इसका मकसद करदाताओं की ओर से कर समझौते के दुरुपयोग को रोकना है। कर समझौते में संशोधन के बाद से अब मॉरीशस से आने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को कड़ी जांच का सामना करना पड़ सकता है। पीपीटी नियम के अनुसार, विदेशी निवेशकों को अब कर अधिकारियों को यह दिखाना होगा कि उनके ज्यूरिडिक्शन का चुनाव सिर्फ कर बचाने के उद्देश्य से नहीं था।
निर्यातकों के लिए पांच साल तक बढ़ सकती है ब्याज समानीकरण योजना
वाणिज्य मंत्रालय निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रुपया निर्यात कर्ज पर ब्याज समानीकरण योजना को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की मांग कर सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, योजना 30 जून को समाप्त हो रही है। योजना अच्छी चल रही है और निर्यातकों को मदद मिल रही है।
30 जून को समाप्त हो रही है रुपया निर्यात कर्ज योजना
अधिकारी ने कहा, 8 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को 30 जून तक जारी रखने के लिए 2,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन को मंजूरी दी। यह योजना चिन्हित क्षेत्रों के निर्यातकों और सभी एमएसएमई निर्माता निर्यातकों को ऐसे समय में प्रतिस्पर्धी दरों पर रुपया निर्यात ऋण का लाभ उठाने में मदद करती है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रही है। इस योजना के तहत निर्यातकों को ब्याज समानीकरण योजना के तहत शिपमेंट से पहले और बाद में रुपया निर्यात कर्ज के लिए सब्सिडी मिलती है।
30 जून को समाप्त हो रही है रुपया निर्यात कर्ज योजना
अधिकारी ने कहा, 8 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को 30 जून तक जारी रखने के लिए 2,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन को मंजूरी दी। यह योजना चिन्हित क्षेत्रों के निर्यातकों और सभी एमएसएमई निर्माता निर्यातकों को ऐसे समय में प्रतिस्पर्धी दरों पर रुपया निर्यात ऋण का लाभ उठाने में मदद करती है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रही है। इस योजना के तहत निर्यातकों को ब्याज समानीकरण योजना के तहत शिपमेंट से पहले और बाद में रुपया निर्यात कर्ज के लिए सब्सिडी मिलती है।
तंबाकू कारोबार के मासिक रिटर्न की तिथि 45 दिन बढ़ी
सरकार ने पान मसाला, गुटखा और इस तरह के तंबाकू उत्पादों के निर्माताओं के पंजीकरण और मासिक रिटर्न दाखिल करने के लिए विशेष प्रक्रिया के कार्यान्वयन की सीमा 45 दिन बढ़ाकर 15 मई कर दी है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड यानी सीबीआईसी ने पहले इस योजना को एक अप्रैल से क्रियान्वित करने की घोषणा की थी। उस समय एक अप्रैल से इस प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान था।
नाओया निशिमुरा बने मुसाशी ऑटो के सीईओ
जापानी कंपनी मुसाशी ऑटो ने नाओया निशिमुरा को सीईओ बनाया है। वे शोध एवं रिसर्च प्रमुख थे। निशिमुरा वैश्विक स्तर पर काम कर चुके हैं। निशिमुरा ने कहा, हम ऐसे आधुनिक समाधान लेकर आते हैं जो ऑटोमोटिव क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाएं।
सेबी ने प्रभु स्टील सहित 3 पर लगाया जुर्माना
नियामकीय उल्लंघन के मामले में पूंजी बाजार नियामक सेबी ने प्रभु स्टील सहित इसके प्रवर्तक हरीश अग्रवाल, दिनेश और अशिता अग्रवाल पर 12 लाख का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि 45 दिनों में भरना होगा। सेबी को फरवरी, 2022 में शिकायत मिली थी।
सूरजमुखी तेल का आयात रिकॉर्ड 4.45 लाख टन
सूरजमुखी तेल का आयात मार्च में रिकॉर्ड 4.45 लाख टन पर पहुंच गया है। कुल खाद्य तेलों का आयात 11.49 लाख टन रहा है। सोयाबीन तेल आयात बढ़कर 2.18 लाख टन व पाम तेल आयात घटकर 3.81 लाख टन रहा है। हाल में सूरजमुखी तेल सस्ता हो गया है।
विकास व निवेश पर सरकार का जोर: आरबीआई
सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे के विकास पर है। व्यावसायिक आशावाद के साथ निवेश चक्र में निरंतरता से पुनरुद्धार को बढ़ावा मिल सकता है। आरबीआई ने रिपोर्ट में कहा, जहां निश्चित निवेश ने वास्तविक जीडीपी वृद्धि को प्रेरित किया, वहीं निजी खपत को स्थिर शहरी मांग से समर्थन मिला। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कम इनपुट लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार से लाभ उठाकर विनिर्माण गतिविधि और मजबूत हुई।