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विश्व बैंक की रिपोर्ट: पांच साल में 70 फीसदी नई नौकरियां शहरों से आएंगी, खर्च करने होंगे 2.4 लाख करोड़ डॉलर
Wed, 23 Jul 2025 04:11 AM IST
शिव शुक्ला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Wed, 23 Jul 2025 04:11 AM IST
सार
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार की गई 'टुवर्ड्स रेसिलिएंट एंड प्रोस्पेरोउस सिटीज इन इंडिया' (भारत में समुत्थानशील और समृद्ध शहरों की ओर) नामक शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की शहरी आबादी 2050 तक दोगुनी होकर 95.1 करोड़ हो की उम्मीद है। इसके लिए 2070 तक 14.4 करोड़ से अधिक नए घरों की जरूरत होगी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Freepik
विस्तार
भारतीय शहरों में आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। 2030 तक 70 प्रतिशत नई नौकरियां शहरों से ही आएंगी। यह खुलासा विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में भारतीय शहरों को जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए 2050 तक कम कार्बन उत्सर्जन वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 2.4 लाख करोड़ डॉलर से अधिक के निवेश की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार की गई 'टुवर्ड्स रेसिलिएंट एंड प्रोस्पेरोउस सिटीज इन इंडिया' (भारत में समुत्थानशील और समृद्ध शहरों की ओर) नामक शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की शहरी आबादी 2050 तक दोगुनी होकर 95.1 करोड़ हो की उम्मीद है। इसके लिए 2070 तक 14.4 करोड़ से अधिक नए घरों की जरूरत होगी। इसके साथ ही इन शहरों को जलवायु चुनौतियों से भी निपटना होगा। बढ़ते शहरीकरण के चलते शहरी के तापमान में 3-4 डिग्री का इजाफा भी होगा।
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इसके अलावा इन क्षेत्रों में वर्षाजन्य बाढ़ की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। चेन्नई, इंदौर, नई दिल्ली, लखनऊ, सूरत और तिरुवनंतपुरम पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 24 भारतीय शहरों का अध्ययन करने वाली नई रिपोर्ट में पाया गया है कि समय रहते कम कॉबर्न उत्सर्जन वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण से भविष्य में मौसम के प्रभावों से होने वाले अरबों डॉलर के वार्षिक नुकसान को टाला जा सकता है। उदाहरण के लिए वार्षिक वर्षाजन्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को वर्ष 2030 तक 5 अरब डॉलर से अधिक और वर्ष 2070 तक 30 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान होने की संभावना है। 2050 तक अपेक्षित 50 प्रतिशत से अधिक शहरी बुनियादी ढांचे का निर्माण भी किया जाना है, इसलिए भारत के पास उन्नतशील शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा कि भारत के लिए बड़े पैमाने पर समुत्थानशील शहरों का निर्माण करना स्पष्ट रूप से अनिवार्य है।
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आवास, परिवहन और नगरपालिका सेवाओं सहित अधिक हरित और स्थिति अनुकूलित शहरी विकास में निवेश करके, शहरों में अत्यधिक गर्मी और शहरी बाढ़ की स्थिति को बेहतर ढंग से कम किया जा सकता है और रोजगार में वृद्धि की जा सकती है।
सिफारिशें...जो शहरी विकास में करेगी मदद
- अत्यधिक शहरी गर्मी और बाढ़ की समस्या के लिए ग्रीन बेल्ट का बेहतर विनियमन, ठंडी छतों की स्थापना व प्रभावशाली पूर्व चेतावनी प्रणालियां को विकसित करना।
- स्थिति अनुकूलित बुनियादी ढांचे और नगरपालिका सेवाओं, कुशल ऊर्जा और समुत्थानशील आवास में निवेश करना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का आधुनिकीकरण करना और शहरी परिवहन को बाढ़ प्रतिरोधी बनाना।
- निजी क्षेत्र की बेहतर भागीदारी के माध्यम से शहरी वित्त तक पहुंच में सुधार करना।