Moonlighting: मूनलाइटिंग पर सरकार ने संसद में रखा पक्ष, मंत्री बोले- नियमों को माने बिना की गई छंटनी ‘अवैध’
Moonlighting in India: केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने सदन में कहा है कि 100 व्यक्तियों या उससे अधिक को रोजगार देने वाली कंपनियों को प्रतिष्ठानों को बंद करने, छंटनी या ले-ऑफ करने से पहले उपयुक्त सरकार की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता होती है। ऐसे किसी भी छंटनी और ले-ऑफ को अवैध माना जाता है, जो आईडी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नहीं किया गया हो।
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मूनलाइटिंग पर सरकार की ओर से सोमवार को संसद में कहा गया कि कानूनी ढांचे के तहत कामगार अपने काम के अलावा नियोक्ता के हित के खिलाफ किसी भी तरह का काम ना करें। हालांकि सराकर की ओर से यह भी कहा गया है कि उसकी ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई अध्ययन नहीं किया गया है।
जब किसी कंपनी का पूर्णकालिक कर्मचारी एक अतिरिक्त नौकरी लेता है, जिसके बारे में आम तौर नियोक्ता को जानकारी नही होती उसे मूनलाइटिंग कहा कहा जाता है। बीते कुछ समय में यह विषय आईटी पेशेवरों के बीच सार्वजनिक चर्चा में रहा है क्योंकि उनमें से कुछ ने कथित तौर पर कोविड महामारी के दौरान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए मूनलाइटिंग का सहारा लिया था।
श्रम और रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, "औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946 के अनुसार, एक श्रमिक किसी भी समय (किसी प्रकार का) कोई ऐसा काम नहीं करेगा जो उस औद्योगिक प्रतिष्ठान के हितों के खिलाफ हो जिसमें वह कार्यरत है। उसे अपनी नौकरी के अलावे किसी ऐसे रोजगार की शुरुआत नहीं करनी चाहिए तो जो उनके नियोक्ता के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
तेली इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या सरकार मूनलाइटिंग को कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का उपयुक्त कारण मानती है? क्या इसी मूनलाइटिंग के कारण हाल के दिनो में छंटनी की खबरें आ रही हैं, तेली ने कहा, "औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ले-ऑफ यानी छंटनी एक नियमित घटना है। इसका स्पष्ट कारण बताने के लिए कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है ये छंटनी मूनलाइटिंग के कारण हो रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने इससे संंबंधित कोई सर्वे कराया है, मंत्री जवाब दिया, “नहीं”।
इस सवाल के बारे में कि क्या सरकार ने मूनलाइटिंग के कारण कंपनियों को कर्मचारियों को नहीं निकालने का निर्देश दिया है, मंत्री ने कहा कि आईटी, सोशल मीडिया, एडटेक फर्मों और संबंधित क्षेत्रों में बह-राष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों के मामलों में अधिकार क्षेत्र संबंधित राज्य सरकारों के पास है।
हालांकि, उन्होंने सदन को बताया कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कामबंदी और छंटनी से संबंधित मामले औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (आईडी अधिनियम) के प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं, जो कामगारों की छंटनी से पहले कामबंदी के विभिन्न पहलुओं और शर्तों को भी नियंत्रित करता है।
उन्होंने कहा, ‘आईडी अधिनियम के अनुसार, 100 व्यक्तियों या उससे अधिक को रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों को बंद करने, छंटनी या ले-ऑफ करने से पहले उपयुक्त सरकार की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी छंटनी और ले-ऑफ को अवैध माना जाता है, जो आईडी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नहीं किया गया हो।