बैंक गारंटी न होने से महंगी हो गई एनडीए द्वारा की गई राफेल डीलः रिपोर्ट
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राफेल विमान खरीदने पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक एनडीए सरकार द्वारा फ्रांस सरकार से डील पर बैंक गारंटी न करने से सौदा काफी महंगा हो गया है। अखबार के मुताबिक बैंक गारंटी ना होने के कारण राफेल के दाम करीब 246 मिलियन यूरो तक बढ़ गए।
2016 की नोटिंग का दिया हवाला
द हिंदू में एन राम द्वारा लिखी गई रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के पास 21 जुलाई 2016 को जमा की गई फाइनल रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि यह डील यूपीए सरकार द्वारा की गई डील से महंगी हो गई है। इस रिपोर्ट को भारत की तरफ से बनी सात सदस्यीय इंडियन निगॉशियटींग टीम (आईएनटी) ने कहा कि बैंक गारंटी नहीं होने से लागत में इजाफा हो गया।
फ्रांस सरकार ने नहीं दी बैंक गारंटी
रिपोर्ट में कहा गया है इस डील के लिए फ्रांस सरकार ने बैंक गारंटी देने से मना कर दिया था। इसके बाद भारत सरकार ने अपनी तरफ से बैंक गारंटी दी है। सरकार ने फ्रांस से केवल 36 लड़ाकू विमानों का सौदा किया जबकि प्रस्तावित संख्या 126 थी। मगर सरकार ने विमानों की संख्या को कम करके प्रति विमान की कीमत को 41 फीसदी तक बढ़ा दिया। मतलब हर विमान अब 41 फीसदी ज्यादा की कीमत से अधिग्रहीत किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि असल सौदे में दसॉल्ट भारत में बनने वाले 13 विमानों के डिजायन और विकास की फीस के तौर पर एक बार 1.4 बिलियन यूरो का मूल्य वसूल रहा था। इस राशि को नए सौदे में बातचीत करके 1.3 बिलियन यूरो पर लाया गया।
हालांकि यह राशि बहुत कम विमानों के लिए दी जा रही है तो इसका मतलब है कि प्रति विमान की कीमत जो पहले 11.11 मिलियन यूरो थी अब बढ़कर 36.11 मिलियन यूरो हो गई है। इसके परिणामस्वरूप एनडीए द्वारा जिस सौदे पर हस्ताक्षर किए गए हैं उसमें यूपीए की तुलना में प्रति विमान की कीमत 41 प्रतिशत तक बढ़ गई है। आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार के अंतर्गत सात सदस्यीय टीम में से तीन ने इस सौदे पर उंगली उठाई थी क्योंकि इसमें विमान की कीमत बहुत ज्यादा थी।