फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Wholesale inflation reached 7.39 percent in March

कोरोना का असर : थोक मुद्रास्फीति मार्च में 7.39 प्रतिशत पर पहुंची, आठ साल में सबसे ऊंची

Fri, 16 Apr 2021 07:29 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 16 Apr 2021 07:29 AM IST
सार

  • थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति एक महीना पहले फरवरी में 4.17 प्रतिशत और एक साल पहले मार्च में 0.42 प्रतिशत पर रही थी।

विज्ञापन
Wholesale inflation reached 7.39 percent in March
थोक महंगाई - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

कच्चे तेल और धातु की बढ़ती कीमतों के कारण थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च में आठ साल के उच्चतम स्तर 7.39 प्रतिशत पर पहुंच गई।

विज्ञापन


पिछले साल मार्च में मुद्रास्फीति का निम्न आधार होने के कारण भी मार्च 2021 में माच माह की महंगाई ऊंची रही है। पिछले साल कोविड-19 महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के चलते कीमतें कम थीं।
विज्ञापन


थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति एक महीना पहले फरवरी में 4.17 प्रतिशत और एक साल पहले मार्च में 0.42 प्रतिशत पर रही थी। डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि मुद्रास्फीति की वार्षिक दर मार्च 2020 के मुकाबले मार्च 2021 में 7.39 प्रतिशत (अनंतिम) रही। डब्ल्यूपीआई का इतना उच्च स्तर इससे पहले अक्टूबर 2012 में रहा था, जब मुद्रास्फीति 7.4 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।

मार्च में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 3.24 प्रतिशत रही और इस दौरान दाल, फल तथा धान की कीमतों में कमी आई है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण मार्च में ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति 10.25 प्रतिशत रही, जो फरवरी में 0.58 प्रतिशत थी।

वहीं खुदरा मुद्रास्फीति की यदि बात की जाए तो इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति चार महीने के उच्च स्तर 5.52 प्रतिशत पर पहुंच गई।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि थोक महंगाई में बढ़ोतरी धातु, वस्त्र, रसायन, रबर आदि से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के टीकाकरण से दुनिया भर में आशावाद बढ़ा है, जिसके चलते प्रमुख जिंसों की कीमतें बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि, मार्च 2021 में कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तर से गिरावट देखने को मिली, लेकिन इस कारण अप्रैल 2021 में भी मुद्रास्फीति के बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रुपये में गिरावट का असर भी महंगाई के रूप में देखने को मिलेगा।


इक्रा को उम्मीद है कि मुद्रास्फीति अगले दो महीनों तक बढ़ेगी और अपने चरम पर प्रमुख मुद्रास्फीति 11-11.5 प्रतिशत और डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 8-8.5 प्रतिशत पर रह सकती है।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंडरा) के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि उच्च थोक मुद्रास्फीति का असर एक समय के बाद खुदरा मुद्रास्फीति पर देखने को मिलता है और इससे केंद्रीय बैंक का काम मुश्किल हो जाता है। हालांकि, इंडरा को उम्मीद है कि नीतिगत दरें निम्न स्तर पर ही रहेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed