फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Whoever wants to bring inheritance tax is not a friend of India, says Gautam Sen

Tax: 'विरासत कर की बात करने वाले भारत के मित्र नहीं', पित्रोदा-राहुल के बयानों पर अर्थशास्त्री का पलटवार

Wed, 08 May 2024 10:04 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 08 May 2024 10:04 AM IST
सार

Tax: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धन के पुनर्वितरण के विचार पर, अर्थशास्त्री गौतम सेन ने कहा है कि यह भारत में काम नहीं करेगा। उन्होंने कहा केवल लगभग 12 करोड़ लोगों के पास 102 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। लेकिन इनमें से लगभग सभी ने अपने व्यवसायों में निवेश किया है। इसलिए, आपको उनकी संपत्ति छीनने के लिए उनके व्यवसायों को समाप्त करना होगा।

विज्ञापन
Whoever wants to bring inheritance tax is not a friend of India, says Gautam Sen
अर्थशास्त्री गौतम सेन - फोटो : ANI

विस्तार

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस में सैम पित्रोदा के उत्तराधिकार कर (इनहेरिटेंस टैक्स) संबंधी टिप्पणी पर अर्थशास्त्री गौतम सेन ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, "पहली बात तो यह कि अमेरिका में इनहेरिटेंस टैक्स नहीं लगाया जाता है। उनके पास विरासत कर नहीं है, उसे एस्टेट ड्यूटी और गिफ्ट टैक्स कहा जाता है। अमेरिका में, यह 2022 तक यह मृतकों में से 0.14% द्वारा इसका भुगतान किया गया। 2.5 मिलियन लोगों में से केवल 0.14% यानी पूरे अमेरिका में 4000 लोग ही एस्टेट ड्यूटी के अधीन हैं। अधिकांश सम्पदाओं को इससे छूट मिली हुई है, क्योंकि छूट की सीमा बहुत अधिक यानी 13.6 मिलियन डॉलर है। दूसरी ओर अमीरों का पैसा वास्तव ट्रस्टों के पास है। इसलिए, अमेरिका का उदाहरण भारत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।

विज्ञापन

विज्ञापन


सभी घरों और व्यवसायों का सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव कई कारणों से अव्यावहारिक है। भारत में, 2.4% या उससे थोड़ा कम लोग आयकर का भुगतान करते हैं। उस समूह में, मुझे लगता है कि उस में से अत्यधिक संपत्ति वाले लोगों की संख्या 12 करोड़ लोगों से अधिक नहीं है। उन्हें विरासत कर के दायरे में लाने के लिए मजबूर करने पर, आपको उनके व्यवसायों को बंद करना होगा। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में आर्थिक अराजकता फैलेगी। जिसने भी इस विचार के बारे में सोचा था, वह बहुत वास्तविक रूप से नहीं सोच रहा था। अब हमारे पास जो कुछ भी है उसमें पहले की तुलना में एक एक बहुत बड़ा सुधार हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हमारे पास एक अविश्वसनीय संयोजन है जो लगभग कभी हासिल नहीं किया गया था। यह निवेश के माध्यम से धन सृजन और पुनर्वितरण के साथ बुनियादी ढांचे का संयोजन है। यहां तक कि अगर कुछ हासिल भी करते हैं तो यह एक बहुत समझदार विचार नहीं होगा। यह आपको अपने बच्चों और पोते-पोतियों से दूर ले जाएगा। ऐसे में जो कोई ऐसा करना चाहता है, वह भारत का मित्र नहीं है। भारत की राजनीतिक और आर्थिक अराजकता तुरंत चीन-पाकिस्तान जैसे देशों को आक्रमण करने के लिए उकसाएगी, क्योंकि वे भारत के साथ हिसाब बराबर करने और भारतीय क्षेत्र को जब्त करने के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए जो भी ऐसा करना चाहता है, वह भारत का दोस्त नहीं है।"

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर सेन ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धन के पुनर्वितरण के विचार पर, अर्थशास्त्री गौतम सेन कहते हैं, "... यह भारत में काम नहीं करेगा ... जैसा कि मैंने कहा, केवल लगभग 12 करोड़ लोगों के पास 102 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। लेकिन इनमें से लगभग सभी ने अपने व्यवसायों में निवेश किया है। इसलिए, आपको उनकी संपत्ति छीनने के लिए उनके व्यवसायों को समाप्त करना होगा। अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी। मेरा तर्क यह है कि जिस व्यक्ति के पास संपत्ति है उनकी आबादी कुल आबादी के डेढ़ प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में उनका सब कुछ छीनने से आपको जो कुल कर की राशि मिलेगी वह वह शेष 98-99% लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। वे बस पीड़ित होंगे। ध्यान रहे, आपको यह सर्वे हर दो साल में करना होगा। हमारे यहां पिछले 10 वर्षों में विकास से, वास्तविक वस्तुओं से बेहतर पुनर्वितरण है।"

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed