क्या हैं 'टैक्स हैवन' देश, कैसे छुपाया जाता है यहां काला धन

अनुज कुमार मौर्या/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 04 Apr 2016 06:03 PM IST
टैक्स हैवेन देशों में जमा होता है कालाधन
टैक्स हैवेन देशों में जमा होता है कालाधन
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रविवार को एक रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि कई बड़े नेताओं ने विदेशों में कालाधन जमा कर रखा है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का परिवार, पाकिस्तानी प्रधामंत्री और कई देश के राष्ट्राध्यक्षों के नाम शामिल हैं। इसमें बॉलीवुड के मशहूर सितारे अमिताभ बच्चन, उनकी बहू ऐश्वर्या रॉय बच्चन और रीयल इस्टेट टायकून केपी स‌िंह, मृतक गैंगस्टर इकबाल मिर्ची समेत 500 भारतीयों के नाम भी हैं।
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यह जांच एक मीडिया संगठन ने करावाई है। इस जांच समिति में करीब 100 मीडिया संस्थानों के 300 से ज्यादा पत्रकारों को शामिल किया गया था। इस रिपोर्ट में दुनिया के करीब 140 राजनेताओं के नाम शामिल किए गए हैं। इसके अलावा कई खेल और उद्योग से जुड़े लोगों के भी नामों का खुलासा हुआ है।


जांच के लिए समिति ने पनामा स्थित 'मोजाक फोंसेका' नामक एक कंपनी के दस्तावेजों का सहारा लिया जो दुनिया भर के कई बड़े और नामचीन लोगों के पैसों को छिपाने में उनकी मदद करती है। इसमें कंपनी के करीब 214,000 दस्तावेज शामिल थे। टैक्स हैवेन देश उन लोगों के लिए स्वर्ग (हैवेन) साबित होते हैं, जो टैक्स चोरी करते हैं।

क्या होते हैं टैक्स हैवन देश

टैक्स हैवन देश ऐसे देश होते हैं जहां पर पैसे जमा करने पर कोई टैक्स नहीं लगता या बहुत ही कम टैक्स लगता है। ऐसे देश टैक्स में किसी प्रकार की पारदर्शिता नहीं रखते न ही किसी प्रकार की वित्तीय जानकारी को साझा करते हैं। ये देश उन लोगों के लिए स्वर्ग (हैवन) हैं, जो टैक्स चोरी करके पैसे इन देशों में जमा कर देते हैं।

ऐसे देशों में पैसे जमा करने पर वे पैसे जमा करने वाले व्यक्ति या संस्था के बारे में कुछ भी नहीं पूछते। यही कारण है कि टैक्स चोरों के लिए ऐसे देश स्वर्ग जैसे होते हैं, जो अपने देश से पैसे इन देशों में कालेधन के रूप में जमा कर देते हैं। आपको बता दें कि कालाधन वह पैसा होता है, जिस पर टैक्स लगने के बावजूद टैक्स नहीं चुकाया जाता है।

साथ ही इन देशों में लोग अपनी उस कमाई को भी छुपा देते हैं, जो उन्हें किसी दूसरे देश में स्थित संपत्ति के कारण होती है। इसमें विदेश में स्थित घर से मिलने वाला किराया या अन्य तरह की कमाई भी शामिल होती है। टैक्स हैवन देश वहां पर पैसे जमा करने वाले व्यक्ति की हर जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखते हैं और किसी अन्य देश या एजेंसी के साथ उन जानकारी को साझा नहीं करते।

कौन-कौन से देश हैं टैक्स हैवन की लिस्ट में

मॉरिशस
मॉरिशस
टैक्स हैवेन की लिस्ट में कई देशों का नाम है, जिसमें से कुछ ये भी हैं-
 
1- लक्समबर्ग- यह एक छोटा सा यूरोपियन देश है, जिसकी सीमाएं बेल्जियम, फ्रांस और जर्मनी से जुड़ी हैं। इस देश की आबादी 5,50,000 लोगों की है।
2- केमैन आइलैंड्स- यह उन देशों में से एक है जहां पर बिना टैक्स अदा किए कंपनी खोली जा सकती है या फिर संपत्ति रखी जा सकती है।
3- आइल ऑफ मैन- यह आइलैंड इंग्लैंड और आयरलैंड के बीच में स्थित है।
4- जर्सी- यह इंग्लैंड और फ्रांस के बीच में स्थित है, जो 20वीं सदी में टैक्स हैवन में शामिल हुआ।
5- आयरलैंड- यहां पर भी पैसे जमा करने पर उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। 
6- मॉरिशस- यह एक आइलैंड है जो हिंद महासागर में स्थित है। यहां पर कैपिटल गेन और ब्याज पर किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता है।
7- बरमूडा- इस देश में कॉरपोरेट टैक्स नहीं लगता, जिससे कारोबारियों को खूब फायदा होता है।
8- मोनैको- यहां की आबादी सिर्फ 36,000 लोगों की है। यहां का इनकम टैक्स नियम 1869 के बाद अब तक बदला नहीं गया है।
9- स्विटजरलैंड- यहां पर बहुत ही कम टैक्स लगता है और साथ ही यहां का बैंक सिस्टम अपने खाताधारकों को पूरी सुरक्षा प्रदान करता है।
10- बहामास- यहां कैपिटल गेन, उत्तराधिकार या गिट टैक्स नहीं देना होता है। यहां रियल एस्टेट एक्जीविशन टैक्स (स्टाम्प ड्यूटी) और होल्डिंग टैक्स (रियल प्रॉपर्टी टैक्स) लागू है। खुलासे के अनुसार अमिताभ बच्चन बहामास की ही चार कंपनियों में डायरेक्टर हैं।
11- ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड- हाल की रिपोर्ट के अनुसार ऐश्वर्या राय इसी आइलैंड की एक फर्म में शेयरहोल्डर हैं। डीएलएफ प्रमोटर केपी सिंह और परिजनों की भी ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कंपनियां हैं।

कैसे जाता है पैसा विदेशों में

विदेशों में भारत से कालाधन न जा सके इसके लिए फरवरी 2004 में एक स्कीम शुरू की गई, जिसका नाम लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम था। इस स्कीम के तहत कोई भी व्यक्ति विदेशों में हर साल सिर्फ 25 हजार डॉलर (करीब 13.23 लाख रुपए) की राशि ही भेज सकता था, वो भी दिए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए। इन दिशा निर्देशों के तहत कोई भी व्यक्ति विदेश में पढ़ाई, घूमने, चिकित्सा या फिर किसी कंपनी के शेयर खरीदने के लिए भेज सकता था।

सितंबर 2007 में यह सीमा बढ़ाकर 2,00,000 डॉलर कर दी गई। हालांकि अगस्त 2013 में फिर से इसे कम करते हुए 75,000 डॉलर कर दिया गया। यह कटौती रुपए में आई भारी गिरावट के मद्देनजर की गई थी। कुछ समय बाद फिर से इसे बढ़ाकर 2,50,000 डॉलर (करीब 1.65 करोड़ रुपए) कर दिया गया। यह पैसे विदेश में रह रहे किसी रिश्तेदार या दोस्त को खर्चे के लिए, तोहफे में या दान के रूप में भी भेजे जा सकते हैं।

2004 में इस स्कीम के आ जाने के बाद विदेश में पैसे भेजने पर काफी सख्ती हो गई, जिसके चलते बहुत से लोगों ने 2004 के बाद भी विदेशों में कुछ साल पुरानी तारीख की कंपनियां खोल लीं, जिससे वे कंपनी के नाम पर विदेश पैसे भेज सकें। आपको बता दें कि लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत विदेश में कंपनी नहीं खोली जा सकती है, लेकिन वहां पर किसी कंपनी के शेयर खरीदे जा सकते हैं। इस तरह एक व्यक्ति हर साल 2.5 लाख डॉलर की राशि विदेश भेज सकता है।
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