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West Asia Crisis: कच्चा तेल 100 डॉलर पार, ईंधन की कीमतें बढ़ाएंगी घरेलू बजट का बोझ; अब क्या करे आम आदमी?

Sat, 06 Jun 2026 08:38 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 06 Jun 2026 08:38 PM IST
सार

पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल महंगा हो गया है। अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, यह बढ़ती कीमतें घरेलू बजट पर दबाव डालेंगी और सरकार के प्रयासों के बावजूद आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानें। 

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West Asia Crisis: Crude Oil Crosses USD 100, Fuel Prices to Strain Household Budgets
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे आम लोगों के लिए ईंधन की लागत बढ़ना अपरिहार्य हो गया है। इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें घरेलू बजट पर दबाव डालेंगी

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शर्मा ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। सरकार के उपभोक्ताओं को बचाने के प्रयासों के बावजूद ईंधन महंगा होना तय है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। 
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यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल आयात का लगभग 60 फीसदी इसी मार्ग से करता है। संघर्ष शुरू होने पर तेल 67-68 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पर है। स्पॉट कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। सरकार ने आम आदमी को राहत देने की कोशिश की है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट में सुरक्षा की सीमाएं हैं। पिछले कुछ हफ्तों से ईंधन की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर असर पड़ना तय है।

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वैश्विक संकट का असर

यह एक वैश्विक मुद्दा है जो नीति निर्माताओं के नियंत्रण से बाहर है। शर्मा ने कहा कि इससे घरेलू बजट पर असर पड़ेगा और परिवारों को कुछ कठिनाइयां होंगी। भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई को भी बढ़ा सकती हैं। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है।

नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान

भारत तेल मूल्य झटकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता कम करने पर काम कर रहा है। देश नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत का एक तिहाई कुल ऊर्जा उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों से होता है। यह दुनिया में सबसे स्वस्थ ऊर्जा उत्पादन अनुपातों में से एक है। हालांकि, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में समय लगेगा।

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