ई-वाहनों की वजह से कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को हो सकता है नुकसान
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भारत सरकार इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं पेश कर रही है। लेकिन पर्यावरण परिवर्तन को थामने के लिए बनाई जा रही योजनाओं से कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं जो कंपनियां कार्बन उत्सर्जन को घटाने का प्रयास कर रही हैं, उनको इसका फायादा हो सकता है।
कम हो सकती है इन कंपनियों की वैल्यू
इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र समर्थित प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पांसिबल इन्वेस्टमेंट की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिससे पता चला कि कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों की वैल्यू 43 फीसदी तक कम हो सकती है। लेकिन उत्सर्जन घटाने के प्रयास में जुटी कंपनियों की वैल्यू 33 फीसदी तक बढ़ सकती है।
बता दें कि इस संदर्भ में बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्नी ने कहा था कि पर्यावरण परिवर्तन को गंभीरता से न लेने वाली कंपनियों को आने वाले समय में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ई-वाहनों की ओर शिफ्ट हो रही कंपनियों की बढ़गी वैल्यू
इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि जो कार कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो रही हैं, उनकी वैल्यू 108 फीसदी तक बढ़ सकती है। हालांकि जिन कंपनियों की वजह से सबसे ज्यादा पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, उनकी वैल्यू तेजी से कम हो रही है।
कोयले से जुड़ी कंपनियों को होगा नुकसान
पर्यावरण के मद्देनजर दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां सरकार पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों की संख्या कम करने में कदम उठा सकती है। जिन कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, उनमें कोयले से जुड़ी कंपनियां सबसे आगे हैं। कोयले से जुड़ी कंपनियों की वैल्यू में 44 फीसदी की कमी आ सकती है। ऑयल एंड गैस क्षेत्र की कंपनियों की वैल्यु में करीब 31 फीसदी की कमी आ आना संभव है।
ऐसा होगा बायोफ्यूल से जुड़ी कंपनियों का हाल
इसके अतिरिक्त रिपोर्ट से सामने आया कि सस्टेनेबल बायोफ्यूल और बिना गोमांस वाले प्रोटीन सोर्स के उत्पादन से जुड़ी कंपनियों की वैल्यू में 10 फीसदी की बढ़त आएगी। लेकिन नॉन-सस्टेनेबल एनर्जी से जुड़ी कंपनियों की वैल्यू 15 फीसदी से 43 फीसदी तक कम हो सकती है।