Biz Updates: इस्पात सचिव बोले- अमेरिकी टैरिफ से इस्पात उद्योग पर ज्यादा असर नहीं, मूडीज ने दी यह प्रतिक्रिया
Biz Updates: इस्पात आयात पर शुल्क लगाने की अमेरिका की घोषणा का भारतीय उद्योग पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि घरेलू बाजार मजबूत है और अमेरिका को कम मात्रा में इस्पात का निर्यात किया जाता है। इस्पात सचिव संदीप पौंडरिक ने सोमवार को यह बात कही। मूडीज ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से घोषित टैरिफ पर प्रतिक्रिया दी है। इस बारे में जानें।
विस्तार
इस्पात आयात पर शुल्क लगाने की अमेरिका की घोषणा का भारतीय उद्योग पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि घरेलू बाजार मजबूत है और अमेरिका को कम मात्रा में इस्पात का निर्यात किया जाता है। इस्पात सचिव संदीप पौंडरिक ने सोमवार को यह बात कही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह सोमवार को विभिन्न देशों से आयातित सभी इस्पात और एल्युमीनियम पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा करेंगे।
इस्तात सचिव ने क्या कहा है, आइए विस्तार से जानें
बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (बीसीसीएंडआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारी ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्टील पर टैरिफ लगाने की बात कही है। वास्तव में हम अमेरिका को कितना स्टील निर्यात करते हैं? हमने पिछले साल 145 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया, जिसमें से 95,000 टन अमेरिका को निर्यात किया गया। इसलिए, इससे क्या फर्क पड़ता है कि 145 मिलियन टन में से आप 95,000 टन निर्यात करने में सक्षम नहीं हैं।"
'खनिज खनन व धातु सम्मेलन' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का घरेलू बाजार इतना मजबूत है और खपत भी बढ़ रही है कि आने वाले वर्षों में इस्पात उद्योग के लिए इसकी पूर्ति करना कठिन हो जाएगा। हालांकि, 2018 में, जब अमेरिका ने स्टील और एल्यूमीनियम पर कर लगाया, तो भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 29 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया, जिससे उसे बराबर राजस्व की वसूली हुई। इसके अलावा, निर्यात के बारे में पौंड्रिक ने कहा कि यह एक समस्या बन जाएगी, क्योंकि अधिकाधिक देश सुरक्षा उपाय और प्रतिबंध लगाएंगे।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-जनवरी अवधि के दौरान भारत का निर्यात 28.9 प्रतिशत घटकर 3.99 मिलियन टन रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 5.61 मिलियन टन था। देश इस्पात का शुद्ध आयातक बना रहा तथा चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि के दौरान आयात 20 प्रतिशत बढ़कर 8.29 मिलियन टन हो गया।
अमेरिकी टैरिफ पर मूडीज ने दी यह प्रतिक्रिया
मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के अनुसार सभी इस्पात और एल्युमीनियम आयातों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने के फैसले के बाद भारतीय इस्पात उत्पादकों को अपने उत्पादों के निर्यात में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मूडीज रेटिंग्स के सहायक उपाध्यक्ष हुई टिंग सिम ने कहा कि पिछले 12 महीनों में भारत में इस्पात के उच्च आयात ने पहले ही भारत में इस्पात उत्पादकों की कीमतों और आय को कम कर दिया है।
थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में व्यापार युद्ध शुरू होने के बाद से, अमेरिका में स्टील और एल्युमीनियम का आयात लगातार बढ़ रहा है। प्राथमिक स्टील का आयात 2018 में 31.1 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 33 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। 2024 में सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता कनाडा (7.7 बिलियन अमरीकी डॉलर), ब्राज़ील (5 बिलियन अमरीकी डॉलर) और मैक्सिको (3.3 बिलियन अमरीकी डॉलर) थे। चीन और भारत से आयात क्रमशः 550 मिलियन अमरीकी डॉलर और 450 मिलियन अमरीकी डॉलर था।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, "अगर ट्रंप इसी रणनीति पर चलते हैं, तो स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ की वापसी का इस्तेमाल व्यापार वार्ता में लाभ के तौर पर किया जा सकता है। 2018 के टैरिफ को व्यापक रूप से व्यापारिक साझेदारों को रियायतें देने के लिए मजबूर करने की एक आक्रामक रणनीति के रूप में देखा गया था। अगर नवीनतम कदम को लागू किया जाता है, तो इससे नए व्यापार विवाद पैदा हो सकते हैं और प्रभावित देशों की ओर से जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।"
मूडीज ने कहा कि उसे उम्मीद है कि टैरिफ से अमेरिका में इस्पात उत्पादकों को लाभ होगा, क्योंकि इससे घरेलू इस्पात की मांग बढ़ेगी और उनकी बिक्री कीमतें बढ़ेंगी। ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह सोमवार को स्टील और एल्युमीनियम के आयात पर नए टैरिफ की घोषणा करेंगे। ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि वह "पारस्परिक टैरिफ" की घोषणा करेंगे- संभवतः मंगलवार या बुधवार को- जिसका अर्थ है कि अमेरिका उन उत्पादों पर आयात शुल्क लगाएगा।
हुई टिंग सिम ने कहा, "स्टील पर अमेरिकी टैरिफ से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अन्य स्टील उत्पादक बाजारों में अधिक आपूर्ति बढ़ेगी। भारतीय स्टील उत्पादकों को अपने उत्पादों के निर्यात में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।" इससे पहले 2018 में ट्रंप के राष्ट्रपतित्व काल में वाशिंगटन ने स्टील उत्पादों पर 25 प्रतिशत और कुछ एल्युमीनियम उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया था। जवाबी कार्रवाई में भारत ने जून 2019 में 28 अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त सीमा शुल्क लगा दिया था। प्रारंभिक टैरिफ लगाए जाने के पांच साल से अधिक समय बाद, 3 जुलाई 2023 को, अमेरिका ने भारत से स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर से टैरिफ हटा दिया था।
जीटीआरआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान घोषित व्यापक व्यापार संकल्प का हिस्सा था। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नरमी आई है, जिसमें भारत ने अमेरिकी वस्तुओं के लिए अपने बाजार को और खोलने की प्रतिबद्धता जताई है।
श्रीवास्तव ने कहा, "चूंकि ट्रम्प अपनी आक्रामक व्यापार नीतियों को पुनर्जीवित करने पर विचार कर रहे हैं, इसलिए दुनिया उनकी बारीकी से निगरानी करेगी। यदि इतिहास खुद को दोहराता है, तो अमेरिकी इस्पात और एल्यूमीनियम उद्योगों को अल्पावधि में लाभ हो सकता है, लेकिन वैश्विक व्यापार घर्षण बढ़ सकता है, जिसके दीर्घकालिक आर्थिक परिणाम होंगे।"
अदाणी समूह ने मेयो क्लिनिक के साथ साझेदारी में शुरू की हेल्थ सिटी
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बताया कि विश्व स्तरीय चिकित्सा अनुसंधान, किफायती स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में अग्रणी मेयो क्लिनिक के साथ साझेदारी में अदाणी हेल्थ सिटी को लॉन्च करने पर गर्व है। अहमदाबाद और मुंबई में दो 1000 बिस्तरों वाले अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से शुरुआत करते हुए, हम पूरे भारत में अत्याधुनिक चिकित्सा नवाचार लाने के मिशन पर हैं। यह एक स्वस्थ, मजबूत भारत के लिए बस शुरुआत है- एक समय में एक परिसर।"
Proud to launch Adani Health City in partnership with Mayo Clinic, pioneering world-class medical research, affordable healthcare & education. Starting with two 1000-bed hospitals and medical colleges in Ahmedabad & Mumbai, we are on a mission to bring cutting-edge medical… pic.twitter.com/KQ6Xoql3FH
— Gautam Adani (@gautam_adani) February 10, 2025
65 डॉलर प्रति किलोग्राम से कम वाले मानव बाल के निर्यात पर प्रतिबंध
सरकार ने सोमवार को मानव बालों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, बशर्ते कि इनकी कीमत 65 डॉलर प्रति किलोग्राम से कम हो। जनवरी 2022 में सरकार ने इन निर्यातों पर प्रतिबंध लगा दिए। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, "कच्चे मानव बाल की निर्यात नीति को संशोधित कर प्रतिबंधित से प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, यदि एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) मूल्य 65 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे अधिक है तो निर्यात मुफ्त होगा।"