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पश्चिम एशिया का घमासान: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से अमेरिका के खजाने और हथियारों के भंडार पर कितना असर? जानिए सबकुछ

Tue, 03 Mar 2026 01:41 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 03 Mar 2026 01:41 PM IST
सार

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की लागत और अमेरिकी हथियारों के भंडार पर पड़ने वाले असर का विस्तृत विश्लेषण पढ़ें।

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US Iran War Donald Trump Operation Epic Fury Defense Budget US Economy
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा टकराव अब एक खुले सैन्य युद्ध में बदल गया है। शनिवार को अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए साझा हवाई हमलों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है। इस वैश्विक घटनाक्रम के बीच यह समझना बेहद जरूरी है कि इस युद्ध का अमेरिका के रक्षा बजट, अर्थव्यवस्था और सैन्य स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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आइए इसे आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' क्या है और इसके तात्कालिक परिणाम क्या रहे?

28 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिका ईरान के भीतर एक प्रमुख युद्ध अभियान चला रहा है, इसका उद्देश्य ईरान के मिसाइल उद्योग को नष्ट करना है। पेंटागन ने इसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया है। अमेरिकी गोला-बारूद भंडार पर अपडेट देते हुए दो टूक कहा कि युद्ध हमेशा चलते रह सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास मध्यम और उच्च श्रेणी के हथियारों की आपूर्ति अब तक के सबसे अच्छे स्तर पर है और इन हथियारों की उपलब्धता लगभग असीमित है।

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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि मौजूदा भंडार के दम पर युद्ध लंबे समय तक और प्रभावी ढंग से लड़े जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये हथियार अन्य देशों के सबसे उन्नत हथियारों से भी बेहतर हैं। उन्होंने साफ कहा कि हथियारों के दम पर अमेरिका युद्ध अनंत काल तक और बहुत सफलतापूर्वक लड़े जा सकते हैं।

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  • अमेरिकी सेना ने ईरान में 1,250 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है और 11 ईरानी जहाजों को नष्ट किया है।
  • इस हमले के पहले चरण में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की उनके तेहरान स्थित परिसर में मौत हो गई। 
  • ईरानी रेड क्रीसेंट के आंकड़ों के अनुसार, 130 स्थानों पर अब तक 787 लोगों की जान जा चुकी है।

मध्य पूर्व के इस संघर्ष में अमेरिका का अब तक का कुल खर्च कितना है?

ब्राउन यूनिवर्सिटी की 2025 की 'कॉस्ट्स ऑफ वॉर' रिपोर्ट के अनुसार खर्च का विवरण इस प्रकार है:

  • 7 अक्तूबर 2023 से अमेरिका ने इजरायल को लगभग 21.7 अरब डॉलर (करीब $21.7bn) की सैन्य सहायता प्रदान की है।
  • यमन, ईरान और व्यापक मध्य पूर्व में इजरायल के समर्थन में अमेरिकी अभियानों पर करदाताओं के 9.65 अरब डॉलर से 12.07 अरब डॉलर के बीच खर्च हुए हैं।
  • इस प्रकार, संघर्ष से जुड़ा अमेरिका का कुल खर्च अब तक 31.35 अरब डॉलर से 33.77 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

मौजूदा युद्ध अभियान की शुरुआती लागत क्या है?

किसी भी चल रहे सैन्य अभियान की कुल लागत का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है, लेकिन शुरुआती आंकड़े काफी बड़े हैं।

  • अनादोलू न्यूज एजेंसी के अनुसार, युद्ध के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका ने लगभग 779 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
  • हमले से पहले की सैन्य तैनाती, जिसमें विमानों और नौसैनिक जहाजों की लामबंदी शामिल है, पर करीब 630 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च आया है।
  • इसके अलावा, यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड जैसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को संचालित करने का खर्च लगभग 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन है। कुवैत में तीन अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमानों का दुर्घटनाग्रस्त होना भी एक बड़ा वित्तीय नुकसान है।
  • अमेरिका में एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत रातोंरात 11 सेंट बढ़कर लगभग 3.11 डॉलर हो गई। मोटर क्लब एएए के अनुसार, अमेरिका में एक गैलन गैसोलीन की औसत कीमत रातोंरात 11 सेंट बढ़कर लगभग 3.11 डॉलर हो गई। अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने से पहले ही गैस की कीमतें बढ़ रही थीं क्योंकि रिफाइनर ईंधन के ग्रीष्मकालीन मिश्रणों की ओर रुख कर रहे थे, लेकिन युद्ध के कारण इस सप्ताह कच्चे तेल के वायदा भाव में तेजी से वृद्धि हुई है। मंगलवार को, ईरान द्वारा जवाबी हमलों की एक श्रृंखला शुरू करने के बाद, जिसमें सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला भी शामिल है, तेल वायदा की कीमतें एक साल से अधिक समय में नहीं देखे गए स्तर तक पहुंच गईं। अमेरिकी कच्चे तेल की मानक कीमत में 8.6% की बढ़ोतरी हुई और यह 77.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।

अमेरिका किन रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहा है?

इस अभियान में 20 से अधिक हथियार प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें बी-2 स्टील्थ बॉम्बर, एफ-35 लड़ाकू विमान, टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।

लड़ाई में अमेरिका कितना मजबूत, इसपर जानकार क्या कह रहे?

  • स्टिम्सन सेंटर के वरिष्ठ फेलो क्रिस्टोफर प्रेबल के अनुसार, 1 ट्रिलियन डॉलर के भारी-भरकम रक्षा बजट (और 1.5 ट्रिलियन डॉलर के प्रस्ताव) के कारण यह युद्ध अमेरिका के लिए वित्तीय रूप से पूरी तरह टिकाऊ है। हालांकि, असली चिंता धन की नहीं बल्कि हथियारों के भंडार की है।
  • पैट्रियट और एसएम-6 जैसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, और यह गति अनिश्चित काल तक जारी नहीं रह सकती।
  • इन इंटरसेप्टर्स का निर्माण काफी जटिल होता है और इन्हें यूक्रेन तथा इंडो-पैसिफिक (एशिया) जैसे अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।

अमेरिका के लिए युद्ध में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

अमेरिका का विशाल रक्षा बजट युद्ध की तात्कालिक वित्तीय लागत को आसानी से वहन कर सकता है। लेकिन, हथियारों की जटिल मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया और इंटरसेप्टर मिसाइलों की सीमित इन्वेंट्री एक बड़ा रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है। अगर यह टकराव हफ्तों तक खिंचता है, तो यह अमेरिकी सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं (सप्लाई चेन्स) के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है, जिसका सीधा असर रक्षा कंपनियों के उत्पादन पर देखने को मिलेगा।

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