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10 वर्ष... भारत में घटे 27.3 करोड़ गरीब : संयुक्त राष्ट्र
Fri, 17 Jul 2020 02:53 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Fri, 17 Jul 2020 02:53 PM IST
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गरीबी
- फोटो : pixabay
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भारत में गरीबी को लेकर राष्ट्र से एक सकारात्मक रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2005-06 से लेकर 2015-16 के दौरान भारत में 27.3 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी के दायरे से बाहर निकले हैं। यह संख्या दुनिया के किसी भी देश में गरीबों की संख्या में होने वाली सबसे बड़ी कमी है।
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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यूएनडीपी और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (ओपीएचआई) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 75 में से 65 देशों में वर्ष 2000 से 2019 के बीच बहुआयामी गरीबी स्तर में काफी कमी आई है। बहुआयामी गरीबी दैनिक जीवन में गरीब लोगों द्वारा अनुभव किए जाने वाले विभिन्न भावों को समाहित करती है जिसमें खराब सेहत, शिक्षा की कमी, जीवन स्तर में अपर्याप्तता, काम की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा और पर्यावरण के लिए खतरनाक क्षेत्रों में रहना शामिल है। रिपोर्ट में जो 65 देश शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ी कंपनी भारत में देखने को मिली जो भारत की बड़ी सफलता है।
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प्रतिकूल असर डाल सकती है महामारी
रिपोर्ट के मुताबिक, 14 देशों ने अपने सभी उप प्रादेशिक क्षेत्रों में गरीबी कम की है। इनमें नेपाल, बांग्लादेश, बोलीविया, गाम्बिया, गुयाना, माली, नाइजीरिया, रवांडा आदि शामिल हैं। हालांकि आशंका जताई गई है कि गरीबी के मोर्चे पर हुई प्रगति पर कोरोना महामारी का प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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बच्चों के बीच भी बेहतर काम
एक फुटनोट में कहा गया है कि भारत में गरीबी यूएन के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (2019) के आबादी आंकड़ों पर आधारित है। भारत ने बच्चों के बीच अपने (एमपीआई) मूल्यों को आधा करके बेहतर काम किया है।
भारत का प्रदर्शन सबसे बेहतर
आर्मेनिया (2010 से 2015-16), भारत (मार्च 2005 से 2015-16), निकारागुआ (2001 से 2011-12) और उत्तर मैसेडोनिया (2005 से 2014) में अपने वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) को आधा कर दिया। यह चार देश दिखाते हैं कि असंभव कुछ नहीं। इनमें भारत का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।