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पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए पैदा करेंगे रोजगार : केंद्रीय पर्यटन मंत्री
Mon, 24 Feb 2020 03:53 AM IST
गौरव पाण्डेय
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 24 Feb 2020 03:53 AM IST
सार
कई अंतरराष्ट्रीय शोध प्रपत्रों में उल्लेख किया गया है कि दुनिया भर में सभी क्षेत्रों में जितने लोगों को रोजगार मिला है, उनमें से हर 10 में से एक व्यक्ति पर्यटन उद्योग से ही जुड़ा है।
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केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल
- फोटो : ट्विटर
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विस्तार
पढ़े लिखे युवाओं की आकांक्षा को पूरा करने के लिए पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग में सरकार रोजगार के असीम अवसर पैदा करेगी। कई अंतर्राष्ट्रीय शोध प्रपत्रों में उल्लेख किया गया है कि दुनिया भर में सभी क्षेत्रों में जितने लोगों को रोजगार मिला है, उनमें से हर 10 में से एक व्यक्ति पर्यटन उद्योग से ही जुड़ा है।
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वर्ल्ड ट्रैवल एवं टूरिज्म काउंसिल (डब्ल्यूटीटीसी) की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2017 के वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (ग्लोबल जीडीपी) में पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी 10.4 फीसदी की थी और इस क्षेत्र ने 31.3 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया था।
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इसी नक्शे कदम पर चलते हुए अब भारत सरकार इस क्षेत्र में अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना चाहती है। यह कैसे होगा, इसे जानने के लिए अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश:-
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प्रश्न- इस समय युवाओं को मनमाफिक रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सबकी नजरें पर्यटन और आतिथ्य उद्योग पर रहती है। इस क्षेत्र में अधिक-से-अधिक रोजगार दिलाने के लिए क्या प्रयास हो रहे हैं?
उत्तर- आप सही कर रहे हैं कि हम इस क्षेत्र में युवाओं को मनमाफिक रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं और करा भी रहे हैं। पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है, जो अधिक-से-अधिक लोगों को रोजगार देने की क्षमता रखता है। इसके लिए सरकार क्षेत्र के सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। हम न सिर्फ विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में कामयाब हो रहे हैं बल्कि घरेलू पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी लोगों से देश के अधिक-से-अधिक स्थानों पर घूमने का आह्वान किया है। इसका असर दिख रहा है। आप देखिए... पर्यटन और आतिथ्य उद्योग में किस-किस क्षेत्र में विशेषज्ञता की जरूरत होती है। यहां ट्रैवल एजेंसी और टूर ऑपरेटर्स को कर्मचारी चाहिए।
कोई विशेषज्ञ कोर्स कर टिकटिंग अधिकारी बन सकता है तो कोई ट्रांसपोर्ट अधिकारी। लॉजिस्टिक व्यवस्था संभाल सकते हैं या फिर होटल प्रबंधन क्षेत्र में जा सकते हैं। विमानन कंपनियों और क्रूज में कई तरह के विशेषज्ञता वाले लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन क्षेत्र के आसपास तो पूरा इको सिस्टम विकसित हो जाता है।
प्रश्न- कहा जा रहा है कि अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद से कई देशों ने भारत की यात्रा करने को लेकर ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है। इससे विदेशी पर्यटकों के आगमन पर क्या असर पड़ा है या पड़ेगा?
उत्तर- ट्रैवल एडवायजरी का विदेशी पर्यटकों के आगमन पर कोई असर नहीं पड़ा है और न ही पड़ेगा। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आंकड़े कह रहे है। आप बीते साल जून से दिसंबर के आंकड़ों को देखें तो एक साल पहले की इसी अवधि के मुकाबले विदेशी पर्यटकों के आगमन में 4.2 फीसदी की बढ़ोती हुई है। यही नहीं, इनसे मिलने वाली विदेशी मुद्रा की आमदनी में तो 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि के दौरान वर्ष 2018 में जहां 6090605 विदेशी पर्यटक आए थे, उनकी संख्या वर्ष 2019 में बढ़ कर 6349422 हो गई। इसी तरह विदेशी पर्यटकों से जून से नवंबर 2018 के दौरान 16.11 अरब डॉलर आए थे, यह वर्ष 2019 की इसी अवधि के दौरान बढ़ कर 18.148 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
प्रश्न- घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना भी सरकार का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इस दिशा में क्या हो रहा है?
उत्तर- घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमने स्वदेश दर्शन योजना और प्रसाद योजना पर काम करना शुरू किया है। स्वदेश दर्शन योजना में हम थीम आ?धारित पर्यटक सर्किट के विकास पर ध्यान देते हैं। इसके तहत हमने पूर्वोत्तर सर्किट, बौद्घ सर्किट, हिमालयन सर्किट, कोस्टल सर्किट, कृष्ण सर्किट, डेजर्ट सर्किट, ट्राइबल सर्किट, इको सर्किट, वन्यजीव सर्किट, रूरल सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, रामायण सर्किट, विरासत सर्किट, तीर्थंकर सर्किट और सूफी सर्किट की पहचान की है। इस योजना के तहत अभी तक 6035.70 करोड़ रुपये की राशि की 75 से भी ज्यादा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत हमने 14 परियोजनाओं को पूरा भी कर लिया है।
प्रश्न- प्रसाद योजना में क्या हो रहा है?
उत्तर- प्रसाद योजना में हम तीर्थ स्थलों का ?समग्र विकास कर रहे हैं। हसके तहत हम चयनित तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्घार कर रहे हैं। वहां पर्यटकों से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं। वहां लोग रात्रि विश्राम कर सके, इसके लिए विश्राम स्थल, धर्मशाला या अतिथि गृह विकसित करने में मदद कर रहे हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने अभी तक इस योजना के तहत 51 धार्मिक शहरों या स्थलों की पहचान की है, जिनमें कुल 840 करोड़ रुपये की 28 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी हमने एक परियोजना शुरू की है, जिसमें देश के 17 स्थलों की पहचान की है जहां ढांचागत संरचना विकसित की जाएंगी। हमारा अनुमान है कि इन स्थलों पर करीब 5000 करोड़ रुपये का खर्च होगा।
प्रश्न- पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं। इसके लिए क्या हो रहा है?
उत्तर- पर्यटकों के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार नहीं हो, इसके लिए हम कृतसंकल्प हैं। हमने देशी-विदेशी, सभी पर्यटकों के हित के लिए एक बहुभाषी पर्यटक हेल्पलाइन शुरू किया है। इसमें हिंदी और अंग्रेजी भाषा के अलावा अरबी, फ्रेंच, जर्मन, इतावली, जापानी, कोरियाई, चीनी, पुर्तगाली, रूसी और स्पेनिश भाषा में बात करने वाले एक्जीक्यूटिव सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। यदि कोई पर्यटन यात्रा के दौरान किसी तरह का संकट महसूस करता है तो वह कभी भी पर्यटक हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है और वहां उपलब्ध व्यक्ति तत्काल संबंधित विभाग और अधिकारी को आगाह करते हैं।