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Telecom Industry: रेल मंत्री की 42 सीईओ के साथ बैठक, चीन से आयातित सामान पर नजर रखने के लिए 5 टास्क फोर्स

Sun, 04 Dec 2022 05:31 AM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Sun, 04 Dec 2022 05:31 AM IST
सार

Telecom Industry in India: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव नें कहा है कि पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना अच्छी तरह से तैयार की गई है और इसकी सादगी के लिए इसकी सराहना हुई है। चर्चा के दौरान कई नए विचार सामने आए जिसके लिए 5-6 टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

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Union Minister held a meeting with 42 CEOs, said - India will become a technology exporting country
अश्विनी वैष्णव - फोटो : ANI

विस्तार

सरकार टेलीकॉम क्षेत्र में चीन से आने वाले सामान पर लगाम लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आयात पर लगाम लगाने के लिए एक कार्यप्रणाली बनाई जाएगी। सरकार ने कहा है जो देश दूरसंचार क्षेत्र के विश्वसनीय स्रोत नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, वहां से आने वाले सामानों की सघन जांच की जाएगी। इसके लिए पांच टास्क फोर्स बनाई गई है।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को टेलीकॉम गियर निर्माताओं के 40 से अधिक सीईओ के साथ बैठक की। इन सभी की कंपनियां उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के लिए योग्य हैं। उन्हें समर्थन देने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में मूल्यवर्धन के लिए उनके कारोबार को व्यवस्थित किया जाएगा। इसके लिए 5 टास्क फोर्स स्थापित करने का निर्णय लिया गया। टेलीकॉम गियर निर्माताओं ने इस बैठक में चीन से नेटवर्क गियर के आयात पर चिंता व्यक्त की। इन सामानों को अन्य पड़ोसी देशों के माध्यम से भेजा जा रहा है। वैष्णव ने कहा, इस मुद्दे पर चर्चा की गई है। सीमा शुल्क विभाग, वित्त मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे। इसे व्यवस्थित तरीके से जांचने पर मंथन चल रहा है। मंत्री ने कहा कि टेलीकॉम पीएलआई के तहत कंपनियां अपने गियर का निर्यात शुरू करने के करीब हैं और भारत बहुत जल्द एक निर्यातक देश बन जाएगा। ब्यूरो
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एक करोड़ के निवेश पर 15 लोगों को रोजगार
दूरसंचार विभाग ने 42 कंपनियों का चयन किया है जिन्होंने 4,115 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार का अनुमान है कि योजना से 2.45 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री उत्पन्न होगी। साथ ही योजना की अवधि के दौरान 44,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार भी निर्मित होंगे। बैठक के दौरान, उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा कि पीएलआई निवेश से उत्पन्न राजस्व 50,000 करोड़ रुपये हो सकता है। 1 करोड़ रुपये के निवेश पर 15 लोगों को रोजगार मिलता है।
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छोटे शहरों में एफटीटीएच कंपनियां कर रहीं मदद
चीन के उत्पाद बांग्लादेश के माध्यम से भारतीय बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। उनमें से कुछ सीधे आ रहे हैं। छोटे शहरों में फाइबर-टू-द-होम (एफटीटीएच) कंपनियां उन्हें स्थापित कर रही हैं। एफटीटीएच कंपनियों की उन बाजारों में करीब 50 फीसदी हैं।  टास्क फोर्स : कंपोनेंट इकोसिस्टम के लिए एक टास्क फोर्स गठित की जाएगी। दूसरी 4-5 चिप्स विकसित करने के लिए होगी। कुशल श्रमिकों, डिजाइनरों को विकसित करने के लिए तीसरी टास्क फोर्स स्थापित की गई है। निर्यात के लिए जो आवश्यक है, उसके लिए आईआईटी मद्रास, टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर में टेस्ट बेड के उपयोग के लिए एक और टास्क फोर्स का गठन किया गया है। रेलवे, बिजली और रक्षा जैसे विभिन्न सरकारी विभागों के तहत कुल मांग के लिए भी एक टास्क फोर्स बनाई गई है।


उन्होंने कहा कि पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना अच्छी तरह से तैयार की गई है और इसकी सादगी के लिए इसकी सराहना हुई है। चर्चा के दौरान कई नए विचार सामने आए जिसके लिए 5-6 टास्क फोर्स का गठन किया गया है। भारत को आने वाले वर्षों में निश्चित तौर पर एक प्रौद्योगिकी निर्यातक देश बनना चाहिए।

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