Union Budget 2026: 2017 से आज तक कैसा रहा शेयर बाजार का हाल, कब दिखी बढ़त; कब हुए निवेशक बेहाल?
केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बीते पांच वर्षों के रुझानों को देखें तो बजट के दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। आइए 2020 के बाद से शेयरों बाजार की चाल पर नजर डालें।
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केंद्रीय बजट 2026 के एलान के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। पिछले पांच वर्षों में बाजार के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि बजट का दिन बाजार के लिए एक जैसा नहीं रहता है। कुछ बजट में निवेशकों को मुनाफा मिला तो कुछ बजट वाले दिन निवेशकों को नुकसान सहना पड़ा है। इस साल भी निवेशकों और बाजार के दिग्गजों की नजरें बजट पर लगी हुईं हैं कि सरकार इस बार किस तरह की घोषणाएं कर सकती है।
बजट 2026: बाजार में भारी गिरावट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा डेरिवेटिव पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि का प्रस्ताव रखने के बाद रविवार को बेंचमार्क शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 2 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1546.84 अंक या 1.88 प्रतिशत गिरकर 80,722.94 अंक पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 495.20 अंक या 1.96 प्रतिशत गिरकर 24,825.45 अंक पर बंद हुआ।
बजट 2025: सपाट बंद हुए बाजार
विशेषज्ञों के मुताबिक, 2025 में बजट वाले दिन शेयर बाजार की शुरुआत तो अच्छी रही थी, लेकिन दिन के अंत तक रफ्तार धीमी हो गई थी। 1 फरवरी 2025 को बजट पेश होने के बाद सेंसेक्स महज 5.39 अंक की तेजी से साथ 77,505.96 पर बंद हुआ था, वही निफ्टी 26.25 अंक गिरकर 23,482.15 पर कारोबार करते हुए समाप्त हुआ था।
बाजार में गिरावट की वजह -वैश्विक बाजार की चिंताओं और बजट में हुई घोषणा के असर की वजह से बाजार में गिरावट आई थी।
साल 2024 में बजट दिन की घोषणाओं में कैपिटल गेन टैक्स को लेकर की गई घोषणाओं से बाजार में गिरावट आई। साल 2024 के बजट में निश्चित वित्तीय एसेट्स पर एसटीसीजी टैक्स ही (शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन) को बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया था, जो कि इससे पहले 15 प्रतिशत था। जबकि अन्य वित्तीय एसेट्स पर 15 प्रतिशत का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को बरकरार रखा गया था।
लंबी अवधि के कैपिटल गेन्स एलटीसीजी (लॉन्ग-टर्म कैपिटल जनरल ) के लेकर दो बड़े बदलाव हुए, पहला एलटीसीजी की छूट सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई थी। कर दर को 10 प्रतिशत बढ़ाकर 12.25 प्रतिशत कर दिया गया था। यह नियम सभी वित्तीय और गैर वित्तीय एसेट्स पर लागू किया गया।
इसकी वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। कैपिटल गेन टैक्स का जिक्र होते ही निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी थी। जिसकी वजह से सेंसेक्स में लगभग 1200 अंक की गिरावट और निफ्टी 400 अंकों से अधिक टूटा था। हालांकि कुछ समय बाद रिकवरी हुई थी, लेकिन सेंसेक्स 106.81 अंकों की गिरावट के साथ 71,645.30 अंक गिर गया और निफ्टी 28.20 अंक गिरकर 21,697.50 अंक पर बंद हुआ।
साल 2023 में बजट वाले दिन वित्त मंत्री के बजट भाषण के साथ बाजार की मजबूत शुरुआत हुई थी। इस साल बजट में सिगरेट के दाम बढ़ाने और टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए घोषणाएं की गई थी। सेंसेक्स एक समय 1200 अंकों से अधिक चढ़कर 60 हजार के पार पहुंच गया था। हालांकि, दिन के अंत तक यह बढ़त समाप्त हो गई।
हालांकि, दिन के कारोबार के अंत तक सेंसेक्स 158.18 अंक बढ़त के साथ 59,708.08 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 45.85 अंक गिरकर 17,616.30 पर बंद हुआ।
साल 2022 में बजट वाले दिन शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 848.40 अंक बढ़कर 58,862.57 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 237 अंक चढ़कर 17,576.85 पर बंद हुआ था। दरअसल, इस दिन बजट में अहम घोषणाएं रहीं। इस बजट में अगले 25 वर्षों में अर्थव्यवस्था को दिशा देने की नींव रखी गई थी। यह बजट चार स्तंभों पर आधारित रहा, आर्थिक विकास, लगातार विकास के लिए प्रधामंत्री गति शक्ति नीति, समावेशी विकास, उत्पादकता वृद्धि और निवेश व निवेशों का वित्तपोषण इसमें मुख्य थे। सार्वजनिक पूंजीगत खर्च के लिए आवंटन 2021-22 में 5.54 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2022-23 में 7.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया, जो 35.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता था।
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साल 2021 का बजट का दिन शेयर बाजार और निवेशकों दोनों के लिए बेहतरीन रहा था। यह अप्रत्याशित कोविड-19 के संकट के मद्देनजर एक डिजिटल बजट भी था। इस बजट में मुख्य रूप स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं में निवेश बढ़ाया गया। छह साल के लिए 64,180 करोड़ रुपये के खर्च वाली नई केंद्रीय प्रायोजित स्कमी पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना की शुरुआत की गई थी भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 13 सेक्टर्स में पीएलआई स्कीम की घोषणा की गई, जिसके लिए सरकार ने अगले पांच वर्षों में लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये की निवेश की योजना पेश की थी ।
शेयर बाजार और निवेशकों के लिए 2021 का बजट शानदार रहा। इस दिन सेंसेक्स 2314.84 अंकों यानी 5 प्रतिशत उछल कर 48,600.61अंक पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी में भी 646.60 अंकों की तेजी वृद्धि देखी गई। निफ्टी 14,281.20 अंक पर बंद हुआ।
वेंचुरा के हेड ऑफ रिसर्च विनीत बोलिंजकर ने कहा शेयर बाजार को उम्मींद है कि बजट 2026 ग्रोथ पर फोकस करेगा, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल खर्च को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये करने, मध्यम वर्ग को कर में राहत देने और पब्लिक सेक्टर में लैंड मोनेटाइजेशन में तेजी लाने पर जोर होगा। मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और ईवी जैसे सेक्टर में पीएलआई स्कीम को बढ़ाने की उम्मींद बाजार कर रहा है। जबकि एफएमसीजी और बैंकिंग में जीएसटी को आसान बनाने और कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 22 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है। विनीत कहते हैं, ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि रिफॉर्म से ग्रामीण भारत की आय और खपत दोनों को सुधार जा सकता है, जिससे वैश्विक चुनौतियों के बीच आठ से नौ प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य पूरा हो सकता है।
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यूनियन बजट पॉलिसी और स्ट्रक्चरल ग्रोथ पर आधारित हो सकता है, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, और खपत को बढ़ाने वाले सेक्टर के साथ सेक्टरल परफॉर्मेंस (जैसे बैंकिंग, आईटी, फार्मा, ऑटो) जैसे सेक्टर अर्थव्यवस्था को आकार देंगे। बीच-बीच में होने वाले करेक्शन से निपटने के लिए अनुशासित जोखिम प्रबंधन, यानी व्यवसाय या निवेश में निवेश को बढ़ावा देना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें कम करना और मुख्य सपोर्ट जोन पर ध्यान देने और क्रूड ऑयल और इंटरेस्ट रेट्स सहित ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स पर नजर रखने की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर, 2026 में नपी-तुली ग्रोथ के मौके मिलेंगे, जो उन निवेशकों को फायदा पहुंचाएगा जो मार्केट में गुणवत्ता, मजबूती और रेजिलिएंस (लचीलापन) पर फोकस करते हैं।
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