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Budget: दो बार लीक हो चुका केंद्रीय बजट, क्यों रखा जाता है गुप्त, अवैध खुलासे पर क्या हैं सजा के नियम? जानें

Fri, 31 Jan 2025 02:30 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 31 Jan 2025 02:30 PM IST
सार

वित्त मंत्री की तरफ से बजट की घोषणा करने से पहले इसकी जानकारी सामने क्यों नहीं आती? इसे गुप्त रखने की वजह क्या है? अगर बजट से जुड़ी जानकारियां पहले ही सामने आ जाएं तो इसका क्या असर होता है? इसके अलावा केंद्रीय बजट पहले कब-कब लीक हुआ और इसके चलते क्या हुआ? बजट की जानकारी लीक करने पर सजा का क्या प्रावधान है? आइये जानते हैं...

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Union Budget 2025 Finance Minister Nirmala Sitharaman presentation know security from Planning Printing to Spe
केंद्रीय बजट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार एक फरवरी को देश का बजट पेश कर रही है। इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत के ऋण से लेकर वित्तीय खर्चों तक का ब्योरा संसद और देश की जनता के सामने रख रही हैं। मोदी सरकार के 12वें बजट से देश ने काफी उम्मीदें भी लगाई हैं। मसलन इनकम टैक्स में छूट, एआई तकनीक को लेकर उम्मीदें और रोजगार के एलानों पर पूरे देश की नजर है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर वित्त मंत्री की तरफ से बजट की घोषणा करने से पहले इसकी जानकारी सामने क्यों नहीं आती? इसे गुप्त रखने की वजह क्या है? अगर बजट से जुड़ी जानकारियां पहले ही सामने आ जाएं तो इसका क्या असर होता है? इसके अलावा केंद्रीय बजट पहले कब-कब लीक हुआ और इसके चलते क्या हुआ? बजट की जानकारी लीक करने पर सजा का क्या प्रावधान है? आइये जानते हैं...
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1. पहले जानें- बजट को क्यों रखा जाता है गुप्त?
केंद्रीय बजट या राज्यों का बजट हमेशा से ही पेश करने से पहले गुप्त रखा जाता रहा है। इसकी वजह यह है कि बजट हमेशा से आर्थिक गतिविधियों और अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी योजनाओं और एलानों का दस्तावेज रहा है। ऐसे में इस तरह की जानकारी सरकार के एलान से पहले बाहर आ जाने से आम लोगों के लिए बनी योजनाओं का लाभ गलत आर्थिक नीतियों के जानकारों की तरफ से गलत तरीके से लिया जा सकता है। 

इसके अलावा अगर सरकार की सालभर की योजनाओं का ब्योरा पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच जाता है तो इससे शेयर बाजार की गतिविधियों को नियंत्रित नहीं किया जा सकेगा। खासकर करों में बदलाव, सब्सिडी या सरकारी खर्चों की जानकारी समय पूर्व मिलने से अर्थव्यवस्था के जानकार यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि किस उद्योग को ज्यादा फायदा हो सकता है और किसे कम। ऐसे में निवेशकों के बीच अस्थिरता का माहौल पैदा हो सकता है। 

इतना ही नहीं, सरकार की तरफ से कर नीतियों (टैक्स पॉलिसी) में बदलाव के बारे में पूर्व जानकारी से लोग महंगाई को अपने हिसाब से नियंत्रित कर सकते हैं। 
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उदाहरण के लिए इसे ऐसे समझें- मान लीजिए सरकार जूतों पर आयात शुल्क को कम कर देती है। ऐसे में देश में जूतों की कीमतें कम हो जाएंगी। हालांकि, जूतों के व्यापारी और उत्पादक इस जानकारी के पहले से ही होने पर जूतों की कीमतों को बजट के एलान से पहले ही काफी ज्यादा कर देंगे। इसका असर यह होगा कि बजट में जब जूतों पर आयात शुल्क घटाने का एलान होगा, तब व्यापारियों को इस एलान से भी कुछ खास नुकसान नहीं होगा। इससे महंगाई दर को नियंत्रित करने की सरकार की योजना को कोई मदद नहीं मिलेगी।

2. पहले कब-कब लीक हुआ है बजट?
भारत में बजट लीक होने की दो बड़ी घटनाएं प्रचलित हैं। इनमें एक बार तो वित्त मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ गया था। आइये जानते हैं पहले कब बजट की जानकारी समय पूर्व सामने आ गई और इसकी वजह क्या रही।

i). आजादी के बाद जब ब्रिटिश सरकार की गलती से लीक हुआ बजट
भारत को ब्रिटेन से अगस्त 1947 में आजादी मिली थी। इसके बाद देश का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश होना था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी जिम्मेदारी सर आरके शनमुखम चेट्टी को शौंपी थी। यह बजट भारत की 15 अगस्त 1947 से लेकर 31 मार्च 1948 तक साढ़े सात महीने की योजनाओं का ब्योरा रखने वाला था। 

भारत में तब ब्रिटिश काल की तर्ज पर शाम 5 बजे बजट पेश करने का चलन था। हालांकि, इससे पहले कि चेट्टी बजट पेश कर पाते, इसका लगभग पूरा ब्योरा मीडिया में लीक हो गया। बताया जाता है कि इसकी वजह ब्रिटिश सरकार थी। दरअसल, उस दौरान भारत का पहला बजट होने की वजह से नेता और अधिकारी इसके बारे में ब्रिटिश सरकार से मशविरा करना चाहते थे। ऐसे में बजट दस्तावेज को ब्रिटेन के तत्कालीन वित्त मंत्री ह्यू डॉल्टन को भेज दिया गया। 

द गार्डियन अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से बजट मिलने के बाद डॉल्टन जब ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउज ऑफ कॉमन्स की तरफ जा रहे थे, तब उन्हें वहां उन्हें डेली स्टार अखबार के पत्रकार जॉन कारवेल मिले। कारवेल के सवाल पर ब्रिटिश वित्त मंत्री ने कर में बदलावों का पूरा ब्योरा उनके सामने रख दिया। डॉल्टन ने कहा- तंबाकू पर अब और (कर) नहीं, बीयर पर थोड़ा बदलाव, डॉग्स और पूल्स पर कुछ लगेगा (कर), लेकिन घोड़ों पर नहीं। खरीदारी पर कर बढ़ेगा, लेकिन सिर्फ उन्हीं चीजों पर जो अभी भी कर के दायरे में  हैं। लाभ पर लगने वाले टैक्स को दोगुना किया जाएगा। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेली स्टार के पत्रकार की यह रिपोर्ट कुछ ही घंटों के समय में पूरे ब्रिटेन में आग की तरफ फैल गई। इसके भारत पहुंचने में भी ज्यादा समय नहीं लगा। आखिरकार भारत के बजट की जानकारी लीक करने की वजह से ब्रिटिश वित्त मंत्री को माफी मांगनी पड़ी और अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा।

(ii). 1950 में बजट लीक के बाद चली गई थी भारत के वित्त मंत्री की कुर्सी
1947 में बजट के लीक होने के बाद ऐसी ही एक घटना 1950 में भी दर्ज हुई। हालांकि, इस घटना के बाद भारत के बजट की सुरक्षा के मानकों को जबरदस्त रूप से सख्त कर दिया गया। दरअसल, तब बजट के दस्तावेजों को छापने का काम राष्ट्रपति भवन में होती थी, जो कि भारत के प्रथम नागरिक का आधिकारिक आवास भी है। बजट की छपाई यहां होती थी, जिससे कि इसके लीक होने का खतरा बाकी जगहों से कम ही रहता था। 

1950 में जब जॉन मथई देश के वित्त मंत्री थे, तब केंद्रीय बजट के कुछ दस्तावेज छपाई के लिए प्रेस में पहुंचने के बाद मीडिया को लीक कर दिए गए। इस घटना के चलते जॉन मथई पर ताकतवर लोगों के हित में काम करने का आरोप लगने लगा। आखिरकार मथई ने इन आरोपों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

अब कैसे बरकरार रखी जाती है बजट की गोपनीयता?
1950 में बजट लीक की घटना के बाद इसके दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर मजबूत इंतजाम की जरूरत महसूस हुई। इसी के चलते बजट की प्रिंटिंग राष्ट्रपति भवन के बाहर मिंटो रोड पर सरकारी प्रेस में शुरू हो गई। इसके बाद 1980 से अब तक बजट के दस्तावेजों की छपाई नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में करने का काम किया गया। हालांकि, जैसे-जैसे सूचना-प्रौद्योगिकी के जरिए बढ़े हैं, बजट को सुरक्षित रखने का काम भी उतना ही मुश्किल हो गया है। दरअसल, पहले की तरह अब सिर्फ बजट के दस्तावेज ही लीक होने का खतरा नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी मौखिक या किसी अन्य तरह से दी जाने वाली सूचना भी लीक का खतरा बढ़ा देती है। इसलिए सरकार ने अब बजट की सुरक्षा को कई दायरों में बांट दिया है। 

बजट को अब इसकी तैयारी शुरू होने से लेकर संसद में पेश होने तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके लिए कई स्तरों पर तैयारियां होती हैं। 

कैसे सुरक्षित रखा जाता है बजट
बजट को सुरक्षित करने की प्रक्रिया इसे पेश करने से कई हफ्ते पहले ही शुरू कर दी जाती है। इसके लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षाबल (सीआईएसएफ) के जवानों और खुफिया विभाग (आईबी) के अधिकारियों की तैनाती होती है, जो कि बजट की तैयारियों से जुड़े कार्यालयों, नेताओं और अफसरों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। 

5. इतना ही नहीं खुफिया विभाग बजट तैयार करने में लगे अधिकारियों के फोन की भी ट्रैकिंग करते हैं। इस दौरान बजट से जुड़े लोगों को क्वारैंटाइन में रख दिया जाता है। उन्हें कार्यालय से बाहर निकलने की इजाजत तक नहीं होती, न ही वे अपने परिवारों से मिल सकते हैं। ऐसे में अगर बजट से जुड़े किसी अधिकारी के परिवार या रिश्तेदारी में आपात घटना होती है तो परिवारवाले उन्हें एक पहले से तय नंबर पर इसकी सूचना दे सकते हैं। लेकिन उनकी भी अधिकारियों से सीधी बात नहीं हो सकती। इस दौरान सिर्फ वित्त मंत्री ही इन अधिकारियों से मिल सकते/सकती हैं।

बजट की तैयारी के बाद अगला संवेदनशील समय होता है इसकी छपाई का। ऐसे में प्रिटिंग शुरू होने से लेकर बजट भाषण तक इसे गुप्त रखने के लिए बजट छपाई का काम महज दो दिन पहले शुरू होता है।

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