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UN Report: 2005-06 से 2019-21 के बीच भारत में 41.5 करोड़ गरीब घटे, यूएन बोला- ये एक 'ऐतिहासिक परिवर्तन'

Mon, 17 Oct 2022 03:54 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Mon, 17 Oct 2022 03:54 PM IST
सार

UN Report:  यूएन के अनुसार 15 वर्षों में भारत में 41.5 करोड़ लोगों का गरीबी के चक्रव्यूह से बाहर आना एक एतिहासिक बदलाव है। यूनए ने कहा है कि भारत में आया यह बदलाव सतत विकास लक्ष्यों के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। 

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UN Report: Between 2005-06 to 2019-21, 415 million poor decreased in India, says UN
Multidimensional Poverty Index - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वर्ष 2005-06 से वर्ष 2019-21 के बीच भारत में गरीब लोगों की संख्या में लगभग 415 मिलियन (41.5 करोड़) की गिरावट आई है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार यह एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। यह एक ऐसा प्रदर्शन है जो यह साबित करता है कि सतत विकास तहत सभी उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के बीच गरीबी को वर्ष 2030 आधा करने का लक्ष्य बड़े पैमाने पर भी हासिल किया जा सकता है।

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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑक्सफोर्ड गरीबी विभाग और मानव विकास पहल (ओपीएचआई) की ओर से सोमवार को जारी किए गए नए बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) नाम की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2005-06 से वर्ष 2019-21 के बीच करीब भारत में 415 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकल गए हैं। 
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संयुक्त राष्ट्र की ओर से रिपोर्ट के बारे में जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि 15 वर्षों में भारत में 41.5 करोड़ लोगों का गरीबी के चक्रव्यूह से बाहर आना एक ऐतिहासिक बदलाव है। यूनए ने कहा है कि भारत में आया यह बदलाव सतत विकास लक्ष्यों के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। गरीबी को उसके सभी रूपों में समाप्त करना और सभी आयामों में गरीबी में रहने वाले सभी उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के अनुपात को वर्ष 2030 कम से कम आधा करने का लक्ष्य एक मिसाल की तरह है। 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में सबसे ज्यादा गरीब भारत में है। यहां गरीबों की संख्या 228.9 मिलियन (22.89 करोड़) है। इसके बाद नाइजीरिया का नंबर है जहां 96.7 मिलियन (9.67 करोड़) गरीब है।

प्रगति के बावजूद भारत की आबादी COVID-19 महामारी के बढ़ते प्रभावों और खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के के कारण प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुपोषण और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए से एकीकृत नीतियाें को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



रिपोर्ट में कहा गया है कि आंकड़ों में सुधार के बावजूद वर्ष 2019-21 में भारत में 97 मिलियन गरीब बच्चे थे, जो वैश्विक एमपीआई की ओर से कवर किए गए किसी भी अन्य देश में मौजूद संयुक्त रूप से गरीब लोगों, बच्चों और वयस्कों की कुल संख्या से अधिक थे। बहुआयामी नीतिगत दृष्टिकोणों से पता चलता है कि एकीकृत हस्तक्षेप से लाखों लोगों के जीवन में सुधार लाया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 111 देशों के 1.2 अरब लोगों में 19.1 प्रतिशत लोग भीषण बहुआयामी गरीबी से जूझ रहे हैं। इनमें से आधे लोग लाग 593 मिलियन (59 करोड़ से अधिक) 18 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चे हैं।

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