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अनुमान: पहली तिमाही जीडीपी में रहेगी 12 फीसदी गिरावट
Fri, 18 Jun 2021 07:32 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 18 Jun 2021 07:32 AM IST
सार
- यूबीएस इंडिया की रिपोर्ट, 2.5 महीने के अनियोजित लॉकडाउन ने बढ़ाईं मुश्किलें
- आरबीआई ने पहली तिमाही में 26.2 फीसदी तेजी का जताया है अनुमान
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जीडीपी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
महामारी की दूसरी लहर पर काबू पाने के लिए अप्रैल और मई में ज्यादातर राज्यों में लॉकडाउन के कारण 2021-22 की पहली यानी जून तिमाही में जीडीपी में 12 फीसदी की गिरावट आ सकती है। उधर, आरबीआई ने पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में 26.2 फीसदी तेजी का अनुमान जताया है।
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यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि के लिहाज से 2020-21 अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खराब वित्त वर्ष रहा। इस दौरान जीडीपी में 7.3 फीसदी गिरावट आई थी, जो चार दशक में सबसे बड़ी थी। सरकार के चार घंटे के नोटिस पर ढाई महीने के अनियोजित लॉकडाउन की घोषणा से 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की सबसे बड़ी गिरावट आई थी।
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हालांकि, दूसरी तिमाही में सुधार के बाद यह कम होकर 17.5 फीसदी रह गई। दूसरी छमाही से अर्थव्यवस्था में तेज सुधार देखने को मिला था और मार्च तिमाही के दौरान इसमें 1.6 फीसदी तेजी रही, जिससे जीडीपी में कुल गिरावट 7.3 फीसदी तक सीमित रह गई।
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नहीं दिखेगा ‘वी’ आकार में तेज सुधार
यूबीएस इंडिया की तन्वी जैन गुप्ता का कहना है कि पहली तिमाही में जीडीपी में 12 फीसदी की गिरावट से पिछले साल की तरह इस बार अर्थव्यवस्था में ‘वी’ आकार में तेज सुधार देखने को नहीं मिलेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह उपभोक्ता भावना में ज्यादा कमजोरी है। लोग महामारी को लेकर पिछले साल के मुकाबले इस वक्त ज्यादा चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि, टीकाकरण में तेजी से उपभोक्ताओं और कारोबारियों का भरोसा बढ़ने के कारण 2021-22 की दूसरी छमाही से अर्थव्यवस्था में सुधार दिखने की उम्मीद है।
वैश्विक कीमतों में नरमी में सोना 861 रुपये सस्ता
वैश्विक बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में नरमी से बृहस्पतिवार को दिल्ली सराफा बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोना 861 रुपये सस्ता होकर 46,863 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। चांदी भी 1,709 रुपये सस्ती होकर 68,798 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटी) तपन पटेल ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया। लेकिन, अब 2024 के बजाय 2023 तक दरों में वृद्धि के संकेत दिए हैं। इससे बुधवार रात की बिकवाली के बाद सोने पर दबाव रहा। फेड रिजर्व के रुख से डॉलर मजबूत होकर दो महीने के शीर्ष पर पहुंच गया, जिससे सोने में बिकवाली बढ़ गई। कीमतों पर यह दबाव थोड़े समय तक रहेगा, जिससे सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।