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तुर्की ने वापस लौटाया भारत का गेहूं: विदेश भेजा गया 17 लाख टन गेहूं बंदरगाहों पर अटका, बारिश की वजह से नुकसान होने की आशंका

Thu, 02 Jun 2022 08:45 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 02 Jun 2022 08:45 PM IST
सार

रूस-यूक्रेन के बीच पैदा हुए गेहूं संकट के बीच तुर्की ने भारत से गए गेहूं की 56,877 टन की खेप को 29 मई को लौटा दी है। इस्तांबुल के एक कारोबारी द्वारा गेहूं में रुबेला वायरस पाए जाने की बात कही गई थी, जिससे तुर्की के कृषि मंत्रालय ने इस खेप को वापस कांडला बंदरगाह भेज दिया।

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Turkey returned Indian wheat: 17 lakh tonnes of wheat sent abroad stuck at ports fear of damage due to rain Latest News Update
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत का करीब 17 लाख टन गेहूं विभिन्न बंदरगाहों पर अटक गया है। बारिश में इसके खराब होने की आशंका है। पिछले महीने निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद से भारत ने विदेश के लिए 469,202 टन गेहूं के शिपमेंट की मंजूरी दी थी। यह शिपमेंट मुख्य रूप से बांग्लादेश, फिलीपीन, तंजानिया और मलयेशिया की ओर बढ़ गए हैं। 14 मई को चिलचिलाती गर्मी से उपजे हालातों और घरेलू कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाते देख गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि उन शिपमेंट्स को अपवाद के तहत निर्यात की अनुमति दी गई थी जो पहले से जारी किए गए क्रेडिट लेटर्स से भेजे जाने वाले थे। साथ ही उन देशों के लिए भी छूट दी गई थी जिन्होंने अपनी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से मदद मांगी थी।

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इस बीच रूस-यूक्रेन के बीच पैदा हुए गेहूं संकट के बीच तुर्की ने भारत से गए गेहूं की 56,877 टन की खेप को 29 मई को लौटा दी है। इस्तांबुल के एक कारोबारी द्वारा गेहूं में रुबेला वायरस पाए जाने की बात कही गई थी, जिससे तुर्की के कृषि मंत्रालय ने इस खेप को वापस कांडला बंदरगाह भेज दिया। जून के मध्य तक यह जहाज वापस आ जाएगा। भारत के खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा कि सरकार तुर्की के अधिकारियों से इस बारे में जानकारी मांगी है और निर्यातकों का दावा है कि इसके लिए सभी जरूरी मंजूरी ली गई थी।
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अच्छी फसल की उम्मीद में ज्यादा गेहूं भेजा
वैश्विक कंपनियों के तीन डीलरों के मुताबिक प्रतिबंध लगाने से पहले, निर्यातकों ने बड़ी मात्रा में बंदरगाहों पर गेहूं भेज दिया था। उस समय तक अच्छी फसल की पैदावार का अनुमान था। व्यापारियों को उम्मीद थी कि भारत इस साल 80 लाख से एक करोड़ टन या इससे भी अधिक के शिपमेंट को मंजूरी देगा। पिछले साल 72 लाख टन के निर्यात की अनुमति दी गई थी।
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कांडला और मुंद्रा पोर्ट में सबसे ज्यादा गेहूं
मुंबई के एक ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म के डीलर ने कहा कि कांडला और मुंद्रा पोर्ट्स में सबसे ज्यादा गेहूं का भंडार फंसा है। इन दोनों बंदरगाहों पर करीब 13 लाख टन से अधिक गेहूं पड़ा हुआ है। सरकार को तुरंत निर्यात परमिट जारी करने की आवश्यकता थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि बंदरगाहों पर गेहूं खुले में था। बारिश की चपेट में यह कभी भी आ सकता है। एक डीलर ने कहा कि गेहूं को बंदरगाहों से बाहर और आंतरिक शहरों में स्थानीय खपत के लिए ले जाना संभव नहीं था। इससे व्यापारियों को लोडिंग और यातायात लागत के कारण और भी ज्यादा नुकसान होगा।


सरकारी सौदे के लिए मंजूरी देनी चाहिए
डीलरों ने कहा कि सरकार को सरकारी सौदे के लिए बंदरगाहों पर पड़े गेहूं के निर्यात की अनुमति देनी चाहिए। गौरतलब है कि भारत को कमी का सामना कर रहे कई देशों ने 15 लाख टन से अधिक गेहूं की आपूर्ति की मांग की है। 

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