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Shashi Tharoor on Tariffs: ट्रंप के टैरिफ से भारत को नुकसान; लोगों की नौकरियां जा रही हैं, बोले शशि थरूर
Fri, 12 Sep 2025 03:34 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 12 Sep 2025 03:34 PM IST
सार
Shashi Tharoor on Tariffs: शशि थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे स्वभाव से अस्थिर हैं और कूटनीतिक व्यवहार के पारंपरिक मानकों का सम्मान नहीं कर रहे हैं। अमेरिका ने भारत से आयातित रूसी तेल पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसमें रूसी तेल खरीदने के लिए लगाया गया 25 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है। थरूर ने आगे क्या कहा है, आइए विस्तार से जानते हैं।
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कांग्रेस नेता शशि थरूर
- फोटो : PTI
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विस्तार
अमेरिका की ओर से लगाए गए शुल्कों का भारत पर असर पड़ा है और लोगों की नौकरियां जा रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को यह बात कही। थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वभाव से अस्थिर हैं और कूटनीतिक व्यवहार के पारंपरिक मानकों का सम्मान नहीं कर रहे हैं। अमेरिका ने भारत से आयातित रूसी तेल पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसमें रूसी तेल खरीदने के लिए लगाया गया 25 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है।
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थरूर ने कहा कि भारत को टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए निर्यात बाजारों में विविधता लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सूरत में रत्न व आभूषण कारोबार, समुद्री खाद्य और विनिर्माण क्षेत्र में 1.35 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं।
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थरूर ने भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष उद्योग संगठन क्रेडाई द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भारत-अमेरिका संबंधों और टैरिफ लगाने से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, "श्री ट्रम्प बहुत ही चंचल व्यक्ति हैं और अमेरिकी प्रणाली राष्ट्रपति को बहुत अधिक छूट देती है।"
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ट्रंप के बारे में अपनी राय जारी रखते हुए थरूर ने कहा, "हालांकि उनसे पहले 44 या 45 राष्ट्रपति हुए हैं, लेकिन किसी ने भी व्हाइट हाउस से इस तरह का व्यवहार नहीं देखा।" कांग्रेस नेता ने ट्रम्प को हर पैमाने पर एक "असामान्य राष्ट्रपति" बताया और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति निश्चित रूप से राजनयिक व्यवहार के पारंपरिक मानकों का सम्मान नहीं करते हैं।
थरूर ने कहा, "मेरा मतलब है, क्या आपने कभी किसी विश्व नेता को खुलेआम यह कहते सुना है कि वह नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार है? ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। क्या आपने किसी विश्व नेता को यह कहते सुना है कि, 'ओह, दुनिया के सभी देश आकर मेरी पीठ चाटना चाहते हैं।'"
उन्होंने कहा, "क्या आपने किसी ऐसे विश्व नेता के बारे में सुना है जिसने मूलतः यह कहा हो कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं मृतप्राय हैं। मुझे इसकी परवाह नहीं कि वे दोनों एक साथ बर्बाद हो जाएं।" उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की भाषा किसी भी सरकार के प्रमुख से कभी नहीं सुनी गई।
कांग्रेस नेता ने कहा, "इसलिए ट्रंप असामान्य हैं और मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि उनके व्यवहार से हमारे प्रदर्शन का आकलन न करें।" टैरिफ के प्रभाव पर थरूर ने कहा कि सच्चाई यह है कि टैरिफ का भारत पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, "पहले से ही लोग नौकरियां खो रहे हैं। सूरत में रत्न एवं आभूषण व्यवसाय में 1.35 लाख लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।" उन्होंने कहा कि समुद्री खाद्य और विनिर्माण क्षेत्र में भी नौकरियां जाने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि टैरिफ से भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, "मैं नहीं चाहता कि किसी को यह भ्रम हो कि हम इसे ऐसे ही खत्म कर देंगे।" थरूर ने कहा कि शुरुआती 25 प्रतिशत टैरिफ के कारण कई उत्पादों का निर्यात अव्यवहारिक हो गया है और 25 प्रतिशत के अतिरिक्त जुर्माने के कारण कम टैरिफ वाले भारतीय प्रतिस्पर्धियों के साथ अमेरिकी बाजार में प्रवेश करना लगभग असंभव हो गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के पास कमर कसने और आगे बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, "हमें अमेरिकी बाजार में प्रवेश करना बहुत कठिन लग रहा है। और मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हम वास्तव में बातचीत कर रहे हैं, यह अच्छी तरह जानते हुए कि हमें अमेरिका तक पहुंच की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रारंभिक 25 प्रतिशत टैरिफ में कमी की संभावनाएं हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा, "अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाना कोई टैरिफ नहीं है। यह वास्तव में प्रतिबंध है और यह रूस से तेल खरीदने के लिए हमारे खिलाफ प्रतिबंध है। लेकिन यह पूरी तरह अनुचित है, क्योंकि चीन रूस से अधिक तेल और गैस आयात कर रहा है।" थरूर ने कहा कि अमेरिका को रूस से तेल खरीदने वाले प्रत्येक देश के लिए एक समान नीति अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह संपूर्ण प्रतिबंध नीति पूरी तरह से विचित्र और असंवहनीय प्रतीत होती है। लेकिन, जब तक यह प्रतिबंध हटा नहीं लिया जाता, चाहे हम बुनियादी व्यापार समझौते पर कितनी भी सफलतापूर्वक बातचीत कर लें, हमारे सामने अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।"
थरूर ने कहा कि निर्यात बाजारों में विविधता लाने की जरूरत है और उनका मानना है कि ब्रिटेन के साथ हाल में हुए व्यापार समझौते से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।