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Report: 25 अरब डॉलर पर टिक सकता है व्यापार घाटा, जानें रुपये की कमजोरी से निर्यात को कैसे मिलेगा सहारा

Tue, 16 Dec 2025 04:05 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 16 Dec 2025 04:05 PM IST
सार

नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का व्यापार घाटा निकट से मध्यम अवधि में नवंबर के स्तर यानी करीब 25 अरब डॉलर के आसपास बना रह सकता है। भले ही वैश्विक सुस्ती के कारण निर्यात पर दबाव है, लेकिन कमजोर रुपया भारतीय उत्पादों को विदेशों में सस्ता बनाकर निर्यात को सहारा दे सकता है और आयात को महंगा कर सीमित रखेगा।

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Trade deficit may remain at $25 billion, learn how rupee weakness will support exports
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

नुवामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश का व्यापार घाटा निकट से मध्यम अवधि में नवंबर के मौजूदा स्तरों के आसपास ही बना रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रुपये की कमजोरी निर्यात और आयात के बीच के अंतर को नियंत्रण में रखने में मददगार साबित हो सकती है।

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रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक भारत के कुल निर्यात प्रदर्शन में नरमी बनी हुई है। वैश्विक व्यापार में आई सुस्ती आने वाले महीनों में भारत के निर्यात पर और दबाव डाल सकती है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े घटनाक्रम अहम रहेंगे, क्योंकि इनका असर भविष्य की निर्यात दिशा पर पड़ सकता है।
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कमजोर रुपये से कैसे मिल सकता है फायदा?

रिपोर्ट में बताया गया कि भले ही निर्यात में फिलहाल सुस्ती है, लेकिन रुपये के कमजोर होने से भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते होते हैं, जिससे समय के साथ निर्यात को सहारा मिल सकता है। साथ ही, आयात महंगा होने से उसमें भी कुछ हद तक कमी आ सकती है। नतीजतन, निकट से मध्यम अवधि में व्यापार घाटा नियंत्रण में रहने की संभावना है।


रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निर्यात धीमी रफ्तार से आगे बढ़ सकता है, लेकिन घरेलू मांग कमजोर रहने के कारण आयात भी सीमित रह सकता है। इससे व्यापार घाटे के ज्यादा बढ़ने की आशंका कम है।

वस्तु व्यापार घाटे में तेज सुधार देखने को मिला

नवंबर के व्यापार आंकड़ों में वस्तु व्यापार घाटे में तेज सुधार देखने को मिला। यह 17 अरब डॉलर घटकर 25 अरब डॉलर पर आ गया। इसकी मुख्य वजह सोने के आयात में भारी गिरावट रही। अक्तूबर में जहां सोने का आयात 15 अरब डॉलर था, वहीं नवंबर में यह घटकर सिर्फ 4 अरब डॉलर रह गया। तेल और सोने को छोड़कर कोर ट्रेड डेफिसिट भी 4 अरब डॉलर घटकर 10 अरब डॉलर पर आ गया।



नवंबर में माल निर्यात में भी मजबूत उछाल दर्ज किया गया। निर्यात साल-दर-साल आधार पर 19 फीसदी बढ़ा, जबकि अक्तूबर में इसमें 12 फीसदी की गिरावट आई थी। दूसरी ओर, मर्चेंडाइज आयात की वृद्धि दर नवंबर में घटकर 2 फीसदी रह गई, जो अक्तूबर में 17 फीसदी थी। हालांकि, तीन महीने के मूविंग एवरेज के आधार पर आयात में 11 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। कोर आयात 12 फीसदी बढ़े, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स और मशीनरी में मजबूत मांग को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, नुवामा की रिपोर्ट का कहना है कि भले ही निर्यात पर दबाव बना रहे, लेकिन आयात में नरमी और रुपये की कमजोरी आने वाले महीनों में भारत के व्यापार घाटे को स्थिर रखने में मदद कर सकती है।

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